सड़क हादसे में घायल व्यक्ति का इलाज करने से मना नहीं कर सकते अस्पताल : उच्‍च न्‍यायालय

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सड़क हादसे में घायल व्यक्ति का इलाज करने से मना नहीं कर सकते अस्पताल : उच्‍च न्‍यायालय

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  • Publish Date - September 25, 2026 / 10:16 PM IST,
    Updated On - September 25, 2026 / 10:16 PM IST

लखनऊ, 25 सितंबर (भाषा) इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने शुक्रवार को कहा कि सड़क हादसे में घायल व्यक्ति को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना अस्पताल और चिकित्सक की जिम्मेदारी है।

दुर्घटना के मामले में ‘मेडिको-लीगल’ औपचारिकता या पुलिस कार्रवाई का हवाला देकर घायल का इलाज टालना स्वीकार्य नहीं है।

खंडपीठ ने राज्य सरकार को इस संबंध में उठाए गए कदमों और अस्पतालों में लागू व्यवस्था का पूरा ब्योरा देने का निर्देश दिया है।

न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति मंजिव शुक्ला की पीठ ने यह आदेश अंजू प्रकाश श्रीवास्तव की ओर से वर्ष 2000 में दाखिल एक जनहित याचिका पर पारित किया है।

अदालत ने याचिका पर राज्य सरकार को 10 दिन में जवाबी हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया। अदालत ने 25 वर्षों से जवाब दाखिल न किए जाने पर नाराजगी जताते हुए याचिकाकर्ता को 25 हजार रुपये जुर्माने का भुगतान करने का भी निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई एक अक्टूबर को होगी।

पीठ ने कहा कि प्रत्येक चिकित्सक का सर्वोच्च दायित्व जीवन की रक्षा करना है। सरकारी अथवा निजी अस्पताल में कार्यरत चिकित्सक को दुर्घटना में घायल व्यक्ति को तत्काल उपचार उपलब्ध कराना चाहिए।

पीठ ने कहा कि किसी कानून या प्रक्रिया के कारण इस दायित्व को निभाने में देरी नहीं की जा सकती।

भाषा सं आनन्द जोहेब

जोहेब