अपशिष्ट से ज्ञान: खेल-खेल में संविधान के बारे में सीखेंगे बच्चे
अपशिष्ट से ज्ञान: खेल-खेल में संविधान के बारे में सीखेंगे बच्चे
लखनऊ, 29 जनवरी (भाषा) संविधान को समझना अब सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहेगा। बागपत के बड़ौत नगर पालिका परिषद परिसर में एक अनोखा संविधान पार्क बनाया गया है जहां बच्चे खेल-खेल में संवैधानिक मूल्यों को सीख सकेंगे।
राज्य सरकार द्वारा बृहस्पतिवार को जारी एक बयान के मुताबिक बागपत के बड़ौत नगर पालिका परिसर में ऐसा अनोखा संविधान पार्क विकसित किया गया है, जहां बच्चे खेल-खेल में संविधान के मूल्यों को सीखेंगे, युवा नागरिक कर्तव्यों से जुड़ेंगे और आमजन स्वस्थ जीवन के साथ जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा पाएंगे। कचरे को रिसाइकिल करके बनाए गए इस पार्क ने ‘वेस्ट टू वेल्थ’ की अवधारणा को जमीन पर उतारते हुए देश के लिए एक नई मिसाल पेश की है।
बयान के अनुसार यह पार्क सिर्फ हरियाली या टहलने की जगह नहीं बल्कि एक खुली कक्षा और ‘स्ट्रीट लाइब्रेरी’ के रूप में विकसित किया गया है। इसमें कहा गया है कि न्याय, समता, स्वतंत्रता और बंधुत्व जैसे संविधान के मूल आदर्शों को प्रतीकों, बोर्डों और संरचनाओं के माध्यम से इस तरह प्रस्तुत किया गया है कि हर आयु वर्ग का व्यक्ति सहजता से उनसे जुड़ सके। बयान में कहा गया है कि बच्चों के लिए यह पार्क सीखने का आनंददायक माध्यम बन गया है, जहां पढ़ाई बोझ नहीं, अनुभव बन जाती है।
बयान के मुताबिक संविधान पार्क की सबसे बड़ी विशेषता यहां स्थापित 600 किलोग्राम की संविधान की किताब की विराट प्रतिकृति है। बयान के मुताबिक यह 11 फुट ऊंची और 14 फुट चौड़ी प्रतिकृति ना केवल आकार में भव्य है, बल्कि अपने संदेश में भी अत्यंत प्रभावशाली है। बयान के अनुसार संविधान की मूल प्रस्तावना की प्रतिकृति बड़ौत नगर पालिका में स्थापित की गई है और इसका लोकार्पण राज्य मंत्री के पी मलिक और जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने किया है।
अधिकारियों के मुताबिक पूरी तरह रीसाइकल की गयी सामग्री से निर्मित यह प्रतिकृति पर्यावरण संरक्षण और जिम्मेदारीपूर्ण विकास का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करती है।
जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने बताया कि पार्क में स्थापित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का चरखा आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी आंदोलन की भावना को जीवंत करता है। उन्होंने बताया कि वहीं बागपत के प्राचीन नाम ‘व्याघ्रप्रस्थ’ के विषय पर विकसित वाटर कियोस्क स्थानीय संस्कृति और इतिहास से जुड़ाव को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि बदलते शहरी परिवेश में भी अपनी जड़ों से जुड़े रहने का यह संदेश पार्क को खास बनाता है।
भाषा सलीम
अमित
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