Akhilesh Yadav Tweet: “अब कोई बचाने नहीं आएगा… अब ये पक्षपाती पुलिसवाले अकेले बैठकर पछताएंगे”.. अखिलेश यादव ने क्यों किया यह Tweet? जानें
Akhilesh Yadav Tweet on Sambhal Violence: यह हिंसा 24 नवंबर, 2024 को शाही जामा मस्जिद के कोर्ट के आदेश पर सर्वे के दौरान भड़की थी। तब हिंदू पक्ष ने दावा किया था कि यह ढांचा पहले एक मंदिर था। झड़पों में चार लोगों की मौत हो गई थी और 29 पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। पुलिस ने 12 FIR दर्ज कीं और 79 लोगों को गिरफ्तार किया था, जिसमें कई राजनीतिक हस्तियों और सैकड़ों अज्ञात लोगों के नाम शामिल थे।
Akhilesh Yadav Tweet on Sambhal Violenc || Image- Akhilesh Yadav Twitter (x)
- अखिलेश यादव का तीखा ट्वीट
- संभल हिंसा में FIR का आदेश
- पुलिस और BJP पर आरोप
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 2024 के संभल हिंसा मामले में (Akhilesh Yadav Tweet on Sambhal Violence) तत्कालीन संभल सर्किल ऑफिसर अनुज चौधरी और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करने के कोर्ट के आदेश के बाद योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार पर तीखा हमला बोला है।
अखिलेश ने किया ट्वीट
दंगों की एक तस्वीर के साथ अनुज चौधरी की इमेज शेयर करते हुए, अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा, “अब कोई बचाने नहीं आएगा… अब ये पक्षपाती पुलिसवाले अकेले बैठकर पछताएंगे।” उन्होंने आगे BJP पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया, “BJP का फॉर्मूला नंबर 1: पहले इस्तेमाल करो, फिर खत्म करो। BJP का फॉर्मूला नंबर 2: BJP वाले किसी के सगे नहीं होते।”
अब कोई बचाने नहीं आयेगा… अब ये पक्षपाती पुलिसकर्मी अकेले में खाली बैठकर याद करेंगे :
– भाजपा का फ़ार्मूला न. 1 : पहले इस्तेमाल करो फिर बर्बाद करो!
– भाजपा का फ़ार्मूला न. 2 : भाजपाई किसी के सगे नहीं हैं। pic.twitter.com/lC8iW5alcC— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) January 14, 2026
यामीन की याचिका पर एफआईआर के निर्देश
बता दें कि, अखिलेश की यह प्रतिक्रया चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट तरफ से संभल के खग्गू सराय अंजुमन के रहने वाले यामीन की याचिका पर FIR दर्ज करने के आदेश के बाद आईं। (Akhilesh Yadav Tweet on Sambhal Violence) यामीन ने आरोप लगाया था कि उनके 24 साल के बेटे आलम को 24 नवंबर, 2024 को तब गोली मार दी गई थी जब वह सामान बेचने जा रहा था। याचिका में अनुज चौधरी, कोतवाली इंस्पेक्टर अनुज तोमर और अन्य पुलिसकर्मियों को आरोपी बनाया गया है।
सर्वे के दौरान भड़की थी हिंसा
बता दें कि, यह हिंसा 24 नवंबर, 2024 को शाही जामा मस्जिद के कोर्ट के आदेश पर सर्वे के दौरान भड़की थी। तब हिंदू पक्ष ने दावा किया था कि यह ढांचा पहले एक मंदिर था। झड़पों में चार लोगों की मौत हो गई थी और 29 पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। पुलिस ने 12 FIR दर्ज कीं और 79 लोगों को गिरफ्तार किया था, जिसमें कई राजनीतिक हस्तियों और सैकड़ों अज्ञात लोगों के नाम शामिल थे।
18 जून को, एक स्पेशल SIT ने SP सांसद जियाउर्रहमान बर्क सहित 23 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी, (Akhilesh Yadav Tweet on Sambhal Violence) जबकि SP विधायक के बेटे सुहैल इकबाल को क्लीन चिट दे दी गई थी।

Facebook


