शहमात The Big Debate: ‘श्रेय’ पर समर अभी शेष.. नक्सल फ्रंट पर बंटी कांग्रेस! कवासी ने सरकार को दिए पूरे नंबर! आखिर गृहमंत्री की तारीफ के मायने क्या?

'श्रेय' पर समर अभी शेष.. नक्सल फ्रंट पर बंटी कांग्रेस! कवासी ने सरकार को दिए पूरे नंबर! Congress divided on Naxal front

शहमात The Big Debate: ‘श्रेय’ पर समर अभी शेष.. नक्सल फ्रंट पर बंटी कांग्रेस! कवासी ने सरकार को दिए पूरे नंबर! आखिर गृहमंत्री की तारीफ के मायने क्या?

Congress divided on Naxal front. Photo Credit: file

Modified Date: February 26, 2026 / 11:59 pm IST
Published Date: February 26, 2026 11:48 pm IST

रायपुरः Congress divided on Naxal front बस्तर में दशकों बाद नक्सलवाद खात्मे की ओर है। नक्सलियों के सफाए, सरेंडर और गिरफ्तारियों के साथ-साथ नक्सली स्मारकों के भी साफ किया जा रहा है। पूर्व मंत्री कवासी लखमा सदन में स्वीकार कर चुके हैं कि बस्तर बदल रहा है। नक्सल मुक्त हो रहा है। बयान पर सरकार ने फिर दोहराया कि नक्सलमुक्ति का संकल्प 31 मार्च से पहले ही पूरा हो सकता है। विपक्षी कांग्रेसी विधायक अब भी कवासी लखमा को भोला-भाला बताकर पूरी ताकत लगाकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं। सवाल है कि नक्सवाद के सफाए के संकल्प पर सवाल उठाने वाला विपक्ष इस सबसे बड़ी समस्या के अंत को स्वीकारने में इतना असहज क्यों है?

Congress divided on Naxal front प्रदेश के पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा ने विधानसभा में खुलकर स्वीकार किया है कि अब बस्तर में लोग शांति से जीने लगे हैं। प्रदेश से नक्सलवाद जैसी दशकों पुरानी बड़ी समस्या का अंत हो रहा है। जाहिर है एक खांटी आदिवासी कांग्रेसी लीडर पूर्व मंत्री लखमा की ओर से आया ये बयान सत्तापक्ष के नक्सल सफाए को दावों को बल दे रहा है। सत्तापक्ष ने लखमा की प्रशंसा को हाथों-हाथ लिया। प्रदेश के गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि अब नक्सलियों के अंत बस्तर के विपक्षी नेता भी स्वीकार कर रहे हैं, उस बदलाव को महसूस कर रहे हैं जिसे बस्तर की जनता जी रही है।

जाहिर है लखमा की ये तारीफ कांग्रेसियों के गले नहीं उतर रही है। कांग्रेसी नेता इस पर साफ-साफ कुछ भी कहने से बच रहे हैं। गोल-मोल शब्दों में लखमा के मौजूदा हाल का हवाला देकर सफाई देते नजर आए हैं तो कुछ विपक्षी विधायक सत्तापक्ष के दावे खारिज करते हुए सत्ता पक्ष को चुनौती देते नजर आए। वैसे ये भी सच है कि बीते दिनों सत्तापक्ष के नेताओं ने करप्शन चार्जेस में फंसे कवासी लखमा को उन्हें मोहरा बनाए जाने की बात कहकर उन्हें फीलगुड कराया था, जिसपर लखमा ने सत्तापक्ष के नेताओं को धन्यवाद कहा था। अब लखमा खुलकर स्वीकार कर रहे हैं कि बस्तर में नक्सलवाद खत्म होता दिख रहा है, अप्रत्याशित बदलाव साफ नजर आ रहा है तो कांग्रेसी उन्हें भोला बताते हुए सरकार पर निशाना साधने की कोशिश कर रहे हैं…सवाल ये है कि जो सच है सामने है, जिसे लखमा जैसे बस्तरिया आदिवासी नेता खुले तौर स्वीकार कर रहे हैं उसे मानने से कांग्रेस कब तक इंकार करेगी?

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