संभल में भीड़ का मकसद सर्वेक्षण दल पर हमला करना था: कोर्ट कमिश्नर
संभल में भीड़ का मकसद सर्वेक्षण दल पर हमला करना था: कोर्ट कमिश्नर
संभल (उप्र), छह अगस्त (भाषा) उत्तर प्रदेश विधानसभा में नवंबर 2024 की संभल हिंसा पर न्यायिक आयोग की रिपोर्ट पेश किए जाने के एक दिन बाद बृहस्पतिवार को कोर्ट कमिश्नर रमेश राघव ने आरोप लगाया कि भीड़ का मकसद सर्वेक्षणक्षण करने वाले दल पर हमला करना और अदालत के आदेश से हो रही कार्रवाई को रोकना था।
वहीं, हिंदू पक्ष के वकील ने आयोग की रिपोर्ट पर विधानसभा सदन में विस्तार से चर्चा कराने की मांग की है।
हिंसा के बाद उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित न्यायिक आयोग ने निष्कर्ष निकाला कि अदालत के आदेश पर संभल की शाही जामा मस्जिद के सर्वेक्षण के दौरान हुई झड़पें एक पूर्व नियोजित षड्यंत्र का नतीजा थीं।
आयोग ने राज्य और देशभर में अशांति को बड़े सांप्रदायिक दंगों में बदलने से रोकने के लिए पुलिस और नागरिक प्रशासन की तारीफ की।
शाही जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी के अध्यक्ष जफर अली ने रिपोर्ट पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
वहीं, मस्जिद-मंदिर विवाद में हिंदू पक्ष की ओर से पेश वकील गोपाल शर्मा ने कहा कि विधानसभा में रिपोर्ट पर विस्तार से चर्चा होनी चाहिए।
शर्मा ने संवाददाताओं से कहा, ‘सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार अरोड़ा की अध्यक्षता में गठित आयोग में सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशक अरविंद कुमार जैन और सेवानिवृत्त आईएएस अफसर अमित मोहन प्रसाद शामिल थे। आयोग ने निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले गहन जांच की, घटनास्थल का निरीक्षण किया और सभी संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए। रिपोर्ट के हर पहलू पर सदन में विस्तार से चर्चा होनी चाहिए।’
सर्वेक्षण की कार्यवाही को याद करते हुए शर्मा ने कहा कि वह 19 नवंबर और 24 नवंबर 2024, दोनों दिन सर्वेक्षण के दौरान मौके पर मौजूद थे।
उन्होंने आरोप लगाया, ’19 नवंबर को, बड़ी संख्या में लोगों के मस्जिद परिसर में घुसने और कार्रवाई में बाधा डालने के कारण सर्वेक्षण अधूरा रह गया था। हमने जिला प्रशासन से बाकी सर्वेक्षण के लिए इंतजाम करने का अनुरोध किया, जो 24 नवंबर को फिर से शुरू हुआ। उस दिन एकत्र हुए लोगों का मकसद सर्वेक्षण दल और प्रशासनिक अधिकारियों पर हमला करना था, लेकिन पर्याप्त सुरक्षा प्रबंधन के कारण उन्हें ऐसा करने से रोक दिया गया।’
सर्वेक्षण करने के लिए दीवानी अदालत द्वारा कोर्ट कमिश्नर नियुक्त किए गए रमेश राघव ने कहा कि 19 नवंबर को पहला चरण लगभग दो घंटे तक चला, जिसके बाद नमाज के समय और बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होने के कारण इसे रोकना पड़ा।
उन्होंने कहा, ’24 नवंबर को हुआ दूसरा सर्वेक्षण लगभग ढाई घंटे तक चला। मैं वकील विष्णु शंकर जैन और विष्णु शर्मा के साथ मस्जिद के अंदर था। सर्वेक्षण के दौरान, बाहर से गोली चलने की आवाजें सुनाई दे रही थीं। सर्वेक्षण पूरा होने के बाद, प्रशासन ने हमें हिंदू इलाके से होते हुए मुख्य गेट से बाहर निकाला।’
राघव ने आरोप लगाते हुए कहा, ‘मुझे लगता है कि भीड़ सर्वेक्षण में बाधा डालना और सर्वेक्षण करने में शामिल दल पर हमला करना चाहती थी ताकि अदालत के आदेश से हो रही यह प्रक्रिया पूरी न हो सके।’
क्षेम नाथ तीर्थ के महंत योगी दीनानाथ ने कहा कि हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों को सजा मिलनी चाहिए, चाहे वह कितने ही ऊंचे पद पर क्यों ना बैठा हो
यह रिपोर्ट 24 नवंबर, 2024 को अदालत के आदेश पर शुरू किए गए शाही जामा मस्जिद के सर्वेक्षण के दूसरे चरण के दौरान हुई हिंसा से जुड़ी है जिसमें चार लोगों की मौत हो गई थी तथा बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी और अन्य लोग जख्मी हुए थे।
यह सर्वेक्षण एक याचिका पर दिए गए आदेश के बाद हो रहा था जिसमें दावा किया गया था कि मस्जिद एक प्राचीन हरिहर मंदिर की जगह पर बनाई गई थी।
इसके बाद पुलिस ने संभल के सांसद जिया-उर-रहमान बर्क, जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी के अध्यक्ष जफर अली और हजारों अज्ञात लोगों के खिलाफ मामले दर्ज किये थे।
भाषा सं सलीम संतोष
संतोष

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