स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप शांतिपूर्ण ढंग से चले संसद का मानसून सत्र : मायावती

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स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप शांतिपूर्ण ढंग से चले संसद का मानसून सत्र : मायावती

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  • Publish Date - July 19, 2026 / 12:44 PM IST,
    Updated On - July 19, 2026 / 12:44 PM IST

लखनऊ, 19 जुलाई (भाषा) बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने सोमवार से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र को स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप शांतिपूर्ण एवं सुचारू ढंग से संचालित किए जाने का आह्वान किया है।

मायावती ने रविवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘देश महंगाई, गरीबी, बेरोजगारी, महिला सुरक्षा, पेपर लीक और अन्य गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में संसद का सत्र हंगामे और बार-बार के स्थगन की भेंट चढ़ने के बजाय इन मुद्दों के समाधान पर केंद्रित होना चाहिए।’’

उन्होंने कहा कि संसद में जनहित से जुड़े सभी महत्वपूर्ण विषयों पर गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ चर्चा होनी चाहिए, ताकि आम लोगों की समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस पहल हो सके।

बसपा प्रमुख ने अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मुद्दे का भी उल्लेख करते हुए कहा कि इस मामले को लेकर व्यापक जनचर्चा और आक्रोश है। उनके अनुसार, इस विषय की गूंज सड़कों से लेकर अदालत तक सुनाई दे रही है और संसद में भी इस पर चर्चा होने की संभावना है।

मायावती ने पश्चिम बंगाल की राजनीतिक स्थिति, राजस्थान में गर्भवती महिलाओं की मौत, विभिन्न राज्यों में महिला असुरक्षा, सरकारी योजनाओं में कथित भ्रष्टाचार, पुलिस मुठभेड़ों, अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान बस्तियों के ध्वस्तीकरण तथा अन्य मुद्दों का भी जिक्र किया।

उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष तथा रुपये के अवमूल्यन जैसे अंतरराष्ट्रीय और आर्थिक मुद्दों का भी भारत की अर्थव्यवस्था और जनजीवन पर प्रभाव पड़ रहा है। ऐसे विषयों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष को राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर देशहित में मिलकर समाधान तलाशना चाहिए।

मायावती ने कहा कि देश के सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक हालात को देखते हुए संसद का मानसून सत्र बिना किसी उत्तेजना, रोष या विद्वेष के स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप संचालित होना समय की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि सभी संस्थाओं को भी ऐसा प्रयास करना चाहिए कि आम लोगों की कठिनाइयां और न बढ़ें तथा संसद जनहित और सुशासन के लिए प्रभावी भूमिका निभाए।

भाषा

आनन्द रवि कांत