गाय को ‘राष्ट्रीय पशु’ घोषित करने की जमीयत की मांग पर मुस्लिम संगठन लामबंद
गाय को 'राष्ट्रीय पशु' घोषित करने की जमीयत की मांग पर मुस्लिम संगठन लामबंद
(मुहम्मद मजहर सलीम)
लखनऊ, 24 मई (भाषा) बकरीद से चंद रोज़ पहले गाय को ‘राष्ट्रीय पशु’ घोषित करने की जमीयत उलमा-ए-हिंद (एएम गुट) के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी की मांग पर कई प्रमुख मुस्लिम संगठन लामबंद हो रहे हैं।
कई संगठन इस मुद्दे पर समाज को एकमत करने की पहल करने की वकालत कर रहे हैं तो कुछ इस मसले पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने का इरादा भी रखते हैं। यह पहल इसलिए भी खास मायने रखती है कि देश की सबसे बड़ी आबादी वाले उस प्रदेश में, जहां मुसलमानों की आबादी अच्छी-खासी है, प्रायः ये पहल हिन्दू संगठनों की तरफ से ही होती रही है।
वर्ष 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले की इस आखिरी बकरीद पर मुस्लिम समाज की तरफ से उठी इस आवाज के अपने मायने हैं, क्योंकि मुस्लिम संगठनों को उम्मीद है कि इससे गोकशी के मुद्दे का राजनीतिक इस्तेमाल और इसके नाम पर हो रही ‘मॉब लिंचिंग’ (पीट-पीटकर मार देने) जैसी घटनाओं पर भी रोक लगेगी।
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने गाय को ‘राष्ट्रीय पशु’ घोषित करने की मौलाना अरशद मदनी की मांग का खुले दिल से समर्थन किया।
उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि उनकी कोशिश होगी कि विभिन्न मुस्लिम संगठनों को इस मामले पर एकमत किया जाए और इसके लिए दिल्ली में जल्द ही प्रमुख मुस्लिम संगठनों के जिम्मेदार लोगों की बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें एक साझा मांग-पत्र तैयार करके उसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी समेत देश के शीर्ष नेतृत्व को सौंपा जाएगा।
उन्होंने कहा कि सरकार को इस मांग को फौरन पूरा करना चाहिए, क्योंकि इससे न सिर्फ पूरे देश में गोकशी को लेकर सरकार की नीतियों में एकरूपता आएगी, बल्कि इसके नाम पर हो रही ‘मॉब लिंचिंग’ और अन्य जुल्म-ज्यादतियां भी खत्म हो सकेंगी।
मांस के कारोबार से जुड़े कुरैशी समाज के प्रमुख संगठन ‘ऑल इंडिया कुरैशी जमात’ के अध्यक्ष सिराज कुरैशी ने कहा कि बकरीद से पहले गाय की कुर्बानी का मामला फिर से राजनीतिक सरगर्मी का विषय बन गया है और पश्चिम बंगाल में इस सिलसिले में हो रहा घटनाक्रम इसका ताजा उदाहरण है।
उन्होंने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग का खुला समर्थन करते हुए कहा कि जरूरत पड़ी तो इस बारे में उनका संगठन प्रधानमंत्री से मुलाकात भी करेगा।
कुरैशी ने कहा कि उनका संगठन बहुत पहले से गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग कर रहा है, लेकिन आज तक किसी भी सरकार ने इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की।
ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग तो सही है, लेकिन इस पर ईमानदारी से काम करना सरकार की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि सरकार को गाय को लेकर अपनी मंशा ऐसी रखनी चाहिए, जो उसकी नीतियों में भी नजर आए, ऐसा न हो कि कुछ राज्यों में आहार में गोमांस का इस्तेमाल बेरोक-टोक किया जाए और कुछ राज्यों में गाय के नाम पर किसी की जान ले ली जाए।
ऑल इंडिया मुस्लिम लीग के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कौसर हयात खान ने भी मौलाना अरशद मदनी की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि यह मांग तकनीकी रूप से बिल्कुल दुरुस्त है और सरकार को पूरी ईमानदारी से इसपर अमल करना चाहिए।
मुस्लिम संगठनों द्वारा एक मंच पर आकर इस मांग को पूरी मजबूती से उठाए जाने का जिक्र होने पर खान ने कहा कि यह मांग तभी मुकम्मल जोर पकड़ सकती है जब सभी मुस्लिम संगठन एक साथ आगे आयें।
खान ने गाय को लेकर सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि गोवा, असम और पूर्वोत्तर के विभिन्न राज्यों में गाय का मांस अब भी बेरोक-टोक खाया जाता है और मजे की बात यह है कि इनमें से ज्यादातर राज्यों में उसी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ही सरकार है, जो उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों के साथ-साथ अब पश्चिम बंगाल में भी गोकशी को राजनीतिक मुद्दा बनाकर अलग रवैया अपना रही है।
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वरिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा, ‘हमारे हिंदू भाई गाय से मजहबी जज्बात रखते हैं लिहाजा उनका ख्याल करके गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाए।’
मौलाना रशीद ने गोकशी को लेकर पूरे देश में कानून में एकरूपता लाने की मांग करते हुए कहा कि कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक पूरे देश में गोकशी के खिलाफ एक समान कानून लागू किया जाए।
मुस्लिम संगठनों द्वारा गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किए जाने के समन्वित प्रयास की संभावना से जुड़े एक सवाल पर मौलाना खालिद रशीद ने कहा कि सभी धार्मिक संगठनों को इस दिशा में आगे आना चाहिए।
जमीयत उलमा-ए-हिंद (एएम गुट) के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने मुसलमानों के दूसरे प्रमुख त्योहार बकरीद से कुछ दिन पहले गत बुधवार को अपने एक बयान में अपनी अर्से पुरानी मांग को दोहराते हुए कहा कि गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा दिया जाए और वध के लिए गाय की खरीद-फरोख्त तथा उसके मांस का कारोबार करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान किया जाए।
संगठन की उत्तर प्रदेश इकाई के कानूनी सलाहकार मौलाना काब रशीदी ने कहा कि यह मांग कोई नई नहीं है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में मुंबई में आयोजित सर्वधर्म सम्मेलन में भी मौलाना मदनी ने गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा देने की मांग की थी और हाल के वर्षों में विभिन्न हिंदू संगठनों ने भी गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग तेज कर दी है, लेकिन इस पर सरकार की तरफ से कोई प्रगति नजर नहीं आ रही है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2017 में कथित रूप से गोकशी पर सख्ती से रोक लगाने के लिए सभी अवैध बूचड़खानों को बंद करवा दिया था। हालांकि बाद में केवल भैंस के मांस का कारोबार करने के लिए सख्त नियमों के तहत लाइसेंस जारी किये गये थे।
भाषा सलीम मनीष सुरेश
सुरेश

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