नवाचार तथा प्रौद्योगिकी जैसे मानकों पर विधायिकाओं के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की आवश्यकता : बिरला

नवाचार तथा प्रौद्योगिकी जैसे मानकों पर विधायिकाओं के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की आवश्यकता : बिरला

नवाचार तथा प्रौद्योगिकी जैसे मानकों पर विधायिकाओं के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की आवश्यकता : बिरला
Modified Date: January 20, 2026 / 10:40 pm IST
Published Date: January 20, 2026 10:40 pm IST

लखनऊ, 20 जनवरी (भाषा) लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिरला ने मंगलवार को बिरला ने उत्कृष्टता, नवाचार तथा प्रौद्योगिकी के उपयोग जैसे मानकों पर राज्य विधायिकाओं के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की विधानसभा जीवंत लोकतंत्र का प्रतीक लगती है। देश भर की विधायिकाओं में अपनाई जा रही सर्वोत्तम प्रक्रियाओं को उत्तर प्रदेश विधान सभा की कार्यप्रणाली में समाहित करने के लिए उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना के प्रयासों की प्रशंसा की।

पीठासीन अधिकारियों के 86वें अखिल भारतीय सम्मेलन के दूसरे दिन यहां विधानभवन के मंडप (जहां सत्र की कार्यवाही संचालित होती है) में प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए बिरला ने कहा कि इस विधानसभा में पहले भी आना हुआ है और उत्तर प्रदेश की विधानसभा जीवंत लोकतंत्र का प्रतीक लगती है।

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बिरला ने उत्कृष्टता, नवाचार तथा प्रौद्योगिकी के उपयोग जैसे मानकों पर राज्य विधायिकाओं के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की आवश्यकता पर बल दिया। इस संदर्भ में देहरादून में 2019 में आयोजित पीठासीन अधिकारियों के अखिल भारतीय सम्मेलन में हुई चर्चाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने राज्य विधायिकाओं की कार्यकुशलता एवं कार्यप्रणाली में सुधार पर अपने दीर्घकालिक दृष्टिकोण को दोहराया।

उन्होंने बताया कि इस दिशा में एक समिति का गठन किया गया है, जो भारत में विधायी निकायों की प्रक्रियाओं एवं प्रथाओं के मानकीकरण से संबंधित मुद्दों पर विचार कर रही है।

बिरला ने देश भर की विधायिकाओं में अपनाई जा रही सर्वोत्तम प्रक्रियाओं को उत्तर प्रदेश विधान सभा की कार्यप्रणाली में समाहित करने के लिए उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना के प्रयासों की प्रशंसा की।

बिरला ने विधायकों की शैक्षणिक योग्यताओं एवं पेशेवर अनुभवों को पहचानकर उनका रचनात्मक उपयोग करने की श्री महाना की पहल की भी सराहना की।

बिरला ने कहा कि प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने देश और दुनिया की सबसे बड़ी विधानसभा में लोकतांत्रिक मूल्यों, श्रेष्ठ परंपराओं, अच्छी परिपाटियों को लागू किया। लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि विधानसभा के विशेष योग्यता धारक जनप्रतिनिधियों, डॉक्टर, इंजीनियर, सनदी लेखाकार आदि, के अनुभवों का महाना ने पेशेवरों के अलग-अलग समूह बनाकर लाभ उठाया।

सम्मेलन में उप्र विधानसभा के बदलाव से संबंधित दिखाई गई 13 मिनट की एक लघु फिल्‍म की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा, “उप्र विधानसभा ने महिलाओं और युवाओं के अलग- अलग सत्र आयोजित किये, ताकि महिलाओं की भागीदारी राजनीति में बढ़े और उसकी प्रेरणा सभी राज्य की महिलाओं को मिले। युवाओं की भागीदारी लोकतंत्र में बढ़ाने के लिए युवा संवाद और युवा चर्चा जैसे सत्र आयोजित करने जैसे अच्छे प्रयास किये गये।”

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि किसी भी विधानसभा की श्रेष्ठ परिपाटी, परंपराएं, नियमों में बदलाव, लोकतंत्र में भागीदारी, नये प्रयोग प्रेरणादायी होते हैं और निश्चित रूप से हम इसीलिए चर्चा करते हैं।

उन्होंने कहा, “मैंने अपने छह साल के कार्यकाल में बदलती लोकतांत्रिक विधानसभाओं का स्वरूप देखा है। विधानसभाओं में पहले गया और उसके तीन-चार साल बाद गया…सभी माननीय अध्‍यक्षों ने बदलाव किया और समाज की सक्रिय भागीदारी के लिए बहुत प्रयास किये।”

बिरला ने कहा कि स्थायी समिति की बैठक में इस पर चर्चा भी हुई और मुझे आशा है कि आप बहुमूल्य सुझाव देंगे तो उसके लिए एक समिति बनाकर शीघ्र ही इसी सत्र के अंदर राज्यों की विधानसभाओं व लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति लोगों का और विश्वास बनाने, चर्चाओं और संवाद के सकारात्मक परिणाम के लिए प्रयास करेंगे।

इसके पहले उप्र विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना ने अतिथियों का स्वागत किया। राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने दूसरे दिन सम्मेलन की शुरुआत कराई।

राज्यसभा के उपसभापति, हरिवंश ने विधान मंडलों की कार्यकुशलता में वृद्धि करने में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की भूमिका पर बल दिया, साथ ही इस तकनीक को उपयुक्त एवं विश्वसनीय बनाने के लिए अपेक्षित विभिन्न कदमों का भी उल्लेख किया।

संसद में एआई के व्यावहारिक उपयोग एवं इसके क्रियान्वयन के विभिन्न तरीकों को रेखांकित करते हुए, उन्होंने संसद और राज्य विधान मंडलों के बीच अधिक समन्वय किये जाने की आवश्यकता पर बल दिया, जिससे विधान मंडलों के संस्थागत ज्ञान का उपयोग संसद तथा राज्य विधान सभाओं, दोनों के द्वारा प्रभावी रूप से किया जा सके।

इस अवसर पर अपने संबोधन में राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा, “लोकतंत्र का सबसे सशक्त आधार जनता का अटूट विश्वास होता है। यह विश्वास रातों रात निर्मित नहीं होता और न ही वह किसी एक चुनावी सफलता के परिणाम से परिलक्षित होता है। यह निरंतर व्यवहार, सतत संवाद और अटूट उत्तरदायित्व की परिणति है।”

देवनानी ने कहा, “हम सदन में बैठते हैं तो हमें संविधान के ट्रस्टी के रूप में व्यवहार करना चाहिए क्योंकि हमारे हाथ में जो शक्ति है वह जनता द्वारा दी गई पवित्र धरोहर है। जब हम जनता के प्रति विधायिका की जवाबदेही की बात करते हैं तो हमें यह स्मरण रखना चाहिए कि विधायिका कोई स्वायत्त सत्ता केंद्र नहीं है बल्कि जनता की आकांक्षाओं और अभिलाषाओं का एक दर्पण है।”

उन्होंने कहा, “सदन की सर्वश्रेष्ठता इस बात से तय नहीं होती कि वहां बहुमत कितना प्रभावी है बल्कि वह इस बात से तय होती है कि वहां अल्पमत की आवाज को कितना सम्मान और महत्व दिया जाता है।”

असहमति के स्वर को महत्व देने की वकालत करते हुए उन्होंने कहा कि जनता हमसे अपेक्षा करती है कि हम शासन के हर निर्णय की समीक्षा करें और एक एक पैसा जनकल्‍याण में खर्च हो, यह विधायिका की जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि पीठासीन अधिकारियों की भूमिका रेफरी या अंपायर से ज्यादा संरक्षक के रूप में होती है।

मध्य प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष नरेन्‍द्र तोमर ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के प्रयासों और उप्र विधानसभा अध्यक्ष महाना के नये प्रयोगों की सराहना करते हुए कहा कि आज निश्चित रूप से हम सबके लिए प्रसन्नता का क्षण है कि जब उप्र के इस ऐतिहासिक विधान भवन में हम लोग अपनी बात रखने के लिए एकत्र हुए हैं।

तोमर ने कहा कि बिरला जी जबसे लोकसभा अध्यक्ष बने हैं, तब से लगातार राज्यों की विधानसभा की सक्रियता, क्षमता, संपर्क बढ़े और लोकसभा से सम्बद्ध रखते हुए अपने राज्य के विधानमंडलों में कीर्तिमान बनाएं, इसके लिए उनकी जितनी प्रशंसा की जाए कम ही है।

उन्होंने चुनावी विसंगतियों की ओर इशारा करते हुए कहा, “आजकल चुनावों की ऐसी स्थिति हो गई है कि किसी भी प्रकार से चुनावों में टिकट प्राप्त हो, टिकट मिले तो किसी प्रकार से जीतें, जीतने के लिए किसी भी सीमा पर जाना पड़े…। स्वाभाविक रूप से चुनाव होंगे तो जो भी लड़ेगा जीतने के लिए लड़ेगा, लेकिन उसमें भी अर्न्‍तमापदंड स्‍थापित होंगे तो हम लोकतंत्र को और भी खूबसूरत बना सकेंगे। जवाबदेही को और ज्यादा सुनिश्चित करने में सफल हो सकेंगे।”

त्रिपुरा विधानसभा के कार्यवाहक अध्यक्ष राम प्रसाद पॉल ने सभी अतिथियों का स्वागत किया।

भाषा

आनन्द जफर रवि कांत


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