अविमुक्तेश्वरानंद मामले आदित्यनाथ ने कहा, हर व्यक्ति खुद को शंकराचार्य नहीं बता सकता

अविमुक्तेश्वरानंद मामले आदित्यनाथ ने कहा, हर व्यक्ति खुद को शंकराचार्य नहीं बता सकता

अविमुक्तेश्वरानंद मामले आदित्यनाथ ने कहा, हर व्यक्ति खुद को शंकराचार्य नहीं बता सकता
Modified Date: February 13, 2026 / 08:54 pm IST
Published Date: February 13, 2026 8:54 pm IST

लखनऊ, 13 फरवरी (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले महीने प्रयागराज में माघ मेले के दौरान स्नान के लिये जा रहे ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को पुलिस द्वारा रोके जाने से जुड़े विवाद पर शुक्रवार को कहा कि शंकराचार्य बनने की एक निर्धारित प्रक्रिया है और हर व्यक्ति खुद को शंकराचार्य नहीं बता सकता।

उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति को पीठ का आचार्य बनकर वातावरण खराब करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वह कानून का पालन करना और करवाना जानते हैं।

आदित्यनाथ ने विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा, ”मैं कहता हूं कि क्या हर व्यक्ति मुख्यमंत्री बनकर प्रदेश में घूम सकता है… मंत्री बनकर घूम सकता है…समाजवादी पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनकर घूम सकता है? इसके लिये एक व्यवस्था है। भारत के सनातन धर्म की भी यही व्यवस्थाएं हैं।”

उन्होंने कहा कि शंकराचार्य का पद सनातन धर्म में सर्वोच्च और सम्मानित पद माना जाता है, हर कोई खुद को शंकराचार्य नहीं लिख सकता।

उन्होंने वर्ष 2015 में तत्कालीन सपा सरकार में अविमुक्तेश्वरानंद पर हुए लाठीचार्ज का जिक्र करते हुए कहा, ‘अगर वह शंकराचार्य थे तो आप लोगों ने वाराणसी में उनपर लाठीचार्ज क्यों किया था? मुकदमा क्यों दर्ज किया था? आप नैतिकता की बात करते हैं?’

आदित्यनाथ ने कहा, ”सपा को उन्हें पूजना है तो पूजे, लेकिन हम मर्यादा में रहते हैं। कानून के शासन पर विश्वास करते हैं। कानून का पालन करना भी जानते हैं, करवाना भी जानते हैं।”

पुलिस ने मेला क्षेत्र को ‘नो-व्हीकल जोन’ बताते हुए अविमुक्तेश्वरानंद को संगम तट पर जाने से रोक दिया था। इसके बाद शंकराचार्य के समर्थकों और पुलिसकर्मियों के बीच झड़प व धक्का-मुक्की हुई थी। इससे खासा विवाद खड़ा हो गया था, जिसके बाद शंकराचार्य ने स्‍नान करने से मना कर दिया था।

भाषा सलीम जोहेब

जोहेब


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