ऑपरेशन सिंदूर : अभिभावकों ने बेटियों का पालन देशभक्ति की भावना से करने की जताई प्रतिबद्धता

ऑपरेशन सिंदूर : अभिभावकों ने बेटियों का पालन देशभक्ति की भावना से करने की जताई प्रतिबद्धता

ऑपरेशन सिंदूर : अभिभावकों ने बेटियों का पालन देशभक्ति की भावना से करने की जताई प्रतिबद्धता
Modified Date: May 8, 2026 / 03:13 pm IST
Published Date: May 8, 2026 3:13 pm IST

कुशीनगर (उप्र), आठ मई (भाषा) पाकिस्तान के आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाने के लिए पिछले साल भारतीय सेना द्वारा चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से प्रेरित होकर अपनी बेटियों का नाम ‘सिंदूर’ रखने वाले अभिभावकों ने इस साहसिक कार्रवाई की सालगिरह पर कहा कि वे देशभक्ति और राष्ट्रीय सेवा की भावना के साथ अपनी बेटियों का पालन-पोषण करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

ऑपरेशन सिंदूर भारत द्वारा छह-सात मई, 2025 की दरमियानी रात को शुरू किया गया था। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादियों द्वारा 26 लोगों की हत्या किये जाने के जवाब में भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में आतंकी बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया।

भारतीय सेना ने ऑपरेशन ऑपरेशन के बाद सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपने आधिकारिक हैंडल से पोस्ट किया, ‘‘पहलगाम आतंकी हमलें के पीड़ितों को न्याय मिल गया है। जय हिंद!’’, साथ ही एक डिजिटल पोस्टर भी जारी किया जिसका शीर्षक ‘ऑपरेशन सिंदूर’ था।

बाद में संघर्ष भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य हमलों और जवाबी हमलों में बदल गया। दोनों पक्ष 10 मई को सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमत हुए।

कुशीनगर में, पिछले साल 10 और 11 मई को जिला चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल में पैदा हुई कम से कम 17 लड़कियों को सैन्य अभियान की याद में उनके परिवारों द्वारा ‘सिंदूर’ नाम दिया गया था।

ऑपरेशन सिंदूर की पहली सालगिरह पर परिवार के सदस्यों ने कहा कि यह नाम आज भी साहस, बलिदान और देश के प्रति समर्पण का प्रतीक है।

पडरौना क्षेत्र के सोहरौना निवासी मदन गुप्ता की पोती का नाम प्रतीका उर्फ सिंदूर है। उन्होंने कहा कि पहलगाम हमले के बाद सशस्त्र बलों की प्रतिक्रिया पर परिवार अब भी गर्व महसूस करता है।

गुप्ता ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘जब सेना ने पाकिस्तान को करारा जवाब देकर महिलाओं के माथे से मांग का सिंदूर मिटाने का बदला लिया, तो हमारे परिवार ने फैसला किया कि बच्ची को उस स्मृति को अपने नाम के माध्यम से याद रखना चाहिए।’’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम उसे अच्छी तरह से शिक्षित करना चाहते हैं और यदि संभव हो तो उसे सशस्त्र बलों में एक वरिष्ठ अधिकारी के रूप में देश की सेवा करते देखना चाहते हैं।’’

अजीत शाही की पत्नी अर्चना ने पिछले साल भेड़िहारी गांव में एक बेटी को जन्म दिया था। शाही ने कहा कि ‘सिंदूर’ नाम परिवार को प्रेरित करता है।

उन्होंने कहा, ‘‘हम अब भी मानते हैं कि यह नाम देशभक्ति और बलिदान को दर्शाता है। हम सुनिश्चित करेंगे कि उसे अच्छी शिक्षा मिले और वह देश के प्रति समर्पण के साथ बड़ी हो।’’

भथही बाबू और जंगल नाहर छपरा गांवों के अन्य परिवारों ने भी इसी तरह की भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर की सालगिरह ने उनकी बेटियों में साहस और राष्ट्रीय कर्तव्य के मूल्यों को स्थापित करने की उनकी प्रतिबद्धता की पुष्टि की है।

कुशीनगर चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल के पूर्व प्राचार्य डॉ आर के शाही ने कहा कि कई माता-पिता जिन्होंने पिछले साल अपनी बेटियों का नाम ‘सिंदूर’ रखा था, उन्होंने उन्हें अच्छी तरह से शिक्षित करने और भविष्य में सार्वजनिक या सैन्य सेवा के लिए प्रोत्साहित करने की इच्छा व्यक्त की थी।

इस बीच, पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए 26 लोगों में से एक, कानपुर के शुभम द्विवेदी की पत्नी ऐशन्या ने भी ‘ऑपरेशन सिंदूर’की सालगिरह पर अभियान की सराहना की और इसे दुखी परिवारों के लिए “न्याय” बताया।

उन्होंने बृहस्पतिवार को कहा, ‘‘इस तरह का बदला पहले कभी नहीं लिया गया था। आतंकी हमले पहले भी हुए थे, लेकिन यह पहली बार था कि सरकार और सेना ने इस पैमाने के हमले के बाद इतनी जोरदार प्रतिक्रिया दी।’’

भाषा सं जफर मनीषा धीरज

धीरज


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