कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मामले में आपत्तियां दाखिल करने का निर्देश

कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मामले में आपत्तियां दाखिल करने का निर्देश

कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मामले में आपत्तियां दाखिल करने का निर्देश
Modified Date: January 30, 2026 / 10:26 pm IST
Published Date: January 30, 2026 10:26 pm IST

प्रयागराज, 30 जनवरी (भाषा) उत्तर प्रदेश के मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद विवाद के मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मुकदमों में लंबित कुछ आवेदनों पर शुक्रवार को गौर किया और अगली तिथि तक पक्षकारों को संशोधनों समेत अपनी आपत्तियां दाखिल करने का निर्देश दिया।

दोनों पक्षकारों के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना ने अगली सुनवाई की तिथि 20 फरवरी, 2026 तय की।

सुनवाई के दौरान, अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने एक आवेदन दाखिल कर उन्हें सभी मुकदमों के लिए प्रतिनिधि बनाए जाने का अनुरोध किया। अदालत ने कहा कि वह अगली तिथि पर इस आवेदन पर आदेश पारित करेगी।

इससे पूर्व, अदालत ने कहा था, “यह रिकॉर्ड स्थूल है। पक्षकार सभी लंबित आवेदनों में आपत्तियां दाखिल कर सकते हैं ताकि इन आवेदनों पर जल्द निर्णय किया जा सके। कार्यालय को सामान्य नियम (दीवानी) के मुताबिक फाइल को पुनः व्यवस्थित कर उसे क्रमवार रखने का निर्देश दिया जाता है।”

उल्लेखनीय है कि हिंदू पक्ष ने शाही ईदगाह मस्जिद का ढांचा हटाने के बाद जमीन का कब्जा लेने और मंदिर का पुनर्निर्माण करने के लिए 18 वाद दाखिल किए हैं।

इससे पूर्व, एक अगस्त, 2024 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने हिंदू पक्षों द्वारा दायर इन मुकदमों की पोषणीयता (सुनवाई योग्य) को चुनौती देने वाली मुस्लिम पक्ष की याचिका खारिज कर दी थी।

अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि ये मुकदमे समय सीमा, वक्फ अधिनियम और पूजा स्थल अधिनियम, 1991 से बाधित नहीं हैं। पूजा स्थल अधिनियम किसी भी धार्मिक ढांचे को जो 15 अगस्त, 1947 को मौजूद था, उसे परिवर्तित करने से रोकता है।

यह विवाद मथुरा में मुगल सम्राट औरंगजेब के समय की शाही ईदगाह मस्जिद से जुड़ा है जिसे कथित तौर पर भगवान श्रीकृष्ण के जन्म स्थान पर एक मंदिर को ध्वस्त करने के बाद बनाया गया है।

भाषा

राजेंद्र

रवि कांत


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