प्रयागराज से काशी, अयोध्या, मथुरा: आस्था कॉरिडोरों ने 2025 में बदला यूपी का पर्यटन परिदृश्य
प्रयागराज से काशी, अयोध्या, मथुरा: आस्था कॉरिडोरों ने 2025 में बदला यूपी का पर्यटन परिदृश्य
(आनन्द राय)
लखनऊ, एक जनवरी (भाषा) महाकुंभ 2025 में प्रयागराज धार्मिक-आध्यात्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा, जहां देश के कोने-कोने से करोड़ों श्रद्धालु पहुंचे। प्रयागराज पहुंचे श्रद्धालुओं में से बड़ी संख्या में लोगों ने काशी (वाराणसी), अयोध्या, मथुरा समेत राज्य के अन्य धार्मिक स्थलों की भी यात्रा की।
भव्य आयोजन से पहले ही प्रयागराज धार्मिक पर्यटन का अहम केंद्र बन चुका था, और उसके बाद से यहां श्रद्धालुओं की आवाजाही लगातार बनी हुई है।
गौरतलब है कि पिछले वर्ष 29 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन महाकुंभ के दौरान हुई भगदड़ से श्रद्धालुओं की आवाजाही कुछ समय के लिए प्रभावित हुई थी, हालांकि यह असर केवल कुछ दिनों तक ही रहा।
सरकार ने भगदड़ में 30 लोगों की मौत की घोषणा की थी, जो बाद में बढ़कर 37 हो गई। हालांकि, दहशत पर आस्था भारी पड़ी और इसके बाद राज्य में धार्मिक पर्यटन के सबसे तीव्र दौर की शुरुआत हो गई।
वर्ष 2017 के विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को प्रचंड बहुमत मिलने के बाद जब गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, तभी से हिंदुत्व के एजेंडे पर सरकार का झुकाव और धर्म स्थलों के उन्नयन की दिशा में तेजी दिखी। प्रदेश में मंदिरों और अन्य धार्मिक स्थलों के जीर्णोद्धार का सिलसिला शुरू हुआ और श्रद्धालुओं की आमद भी बढ़ी।
वर्ष 2019 में उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो गई थी। लोकसभा चुनाव 2024 से पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मौजूदगी में हुए प्राण-प्रतिष्ठा समारोह से इसकी लोकप्रियता और बढ़ गई। 25 नवंबर को प्रधानमंत्री ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की मौजूदगी में राम मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वज फहराया।
वर्ष 2017 से अयोध्या का एक और प्रमुख आकर्षण वार्षिक दीपोत्सव रहा है, जिसने सरकार के अनुसार 2025 में दो नए विश्व रिकॉर्ड बनाए—सबसे अधिक दीपों की सजावट और एक साथ सबसे ज्यादा लोगों द्वारा आरती करने का।
दिसंबर 2021 में मोदी ने काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का उद्घाटन किया था, जिससे मंदिर को गंगा नदी के किनारे स्थित घाटों से जोड़ा गया।
इसके साथ ही अयोध्या में राम मंदिर ने 2025 में प्रयागराज आने वाले श्रद्धालुओं को इन तीन पवित्र स्थलों तक अपनी तीर्थयात्रा की योजना बनाने के लिए प्रेरित किया। भगवान कृष्ण की जन्मभूमि मथुरा-वृंदावन के आकर्षण ने इस दायरे को और विस्तारित किया।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष 13 जनवरी से 26 फरवरी के बीच आयोजित महाकुंभ के दौरान ही प्रयागराज में 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए
अधिकारियों के अनुसार, अयोध्या, काशी और मथुरा में नए साल के जश्न के लिए दिसंबर के अंतिम सप्ताह से ही पर्यटकों की भीड़ जुटने लगी थी, जिसके चलते पुलिस-प्रशासन को अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम करने पड़े।
एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, वर्ष 2024 में उत्तर प्रदेश में कुल पर्यटक 64.91 करोड़ से अधिक आए जिनमें विदेशी पर्यटकों की संख्या 23.64 लाख से ज्यादा थी। वहीं, वर्ष 2025 में महज़ छह माह के भीतर (जनवरी से जून तक) कुल पर्यटकों की संख्या 121.81 करोड़ से अधिक रही। इनमें विदेशी पर्यटकों की संख्या 33 लाख से ज्यादा थी।
पर्यटन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश देश में सबसे अधिक भ्रमण वाले राज्यों में से एक बनकर उभरा, जहां वर्ष 2025 में 137 करोड़ से अधिक घरेलू पर्यटक आए और विदेशी पर्यटकों की संख्या में भी लगातार वृद्धि दर्ज की गई। इसमें उप्र के धर्म स्थलों का बड़ा योगदान रहा।
अयोध्या का दीपोत्सव, वाराणसी की देव दीपावली, मथुरा में बरसाने की होली जैसे पर्व भी श्रद्धालुओं को आकर्षित करने की वजह बने।
जनवरी से जून तक छह माह के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार मथुरा आने वाले पर्यटकों की संख्या 03.37 करोड़ से अधिक थी जबकि इस अवधि में काशी पहुंचे पर्यटकों की संख्या 12.96 करोड़ से ज्यादा रही। इस अवधि में अयोध्या पहुंचे श्रद्धालुओं की संख्या- 23.82 करोड़ से अधिक हो गई।
जुलाई माह में उत्तर प्रदेश कांवड़ यात्रियों की आस्था से सराबोर रहा। एक आधिकारिक अनुमान के मुताबिक सात करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं ने विभिन्न शिव मंदिरों में कांवड़ यात्रा के दौरान जलाभिषेक किया।
आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश के धार्मिक स्थलों ने राष्ट्रीय पर्यटन में राज्य की हिस्सेदारी बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है, जो 2016 में 13.1 प्रतिशत से बढ़कर 2024 में 19–20 प्रतिशत से अधिक हो गई।
आदित्यनाथ ने कहा, “केवल महाकुंभ में ही 66 करोड़ श्रद्धालुओं की मौजूदगी ने पर्यटन क्षेत्र में एक विश्व रिकॉर्ड कायम किया।”
मुख्यमंत्री के अनुसार, काशी, अयोध्या, मथुरा, बांके बिहारी धाम, विंध्यवासिनी धाम, चित्रकूट, नैमिषारण्य, शाकुंभरी धाम, देवीपाटन धाम, सारनाथ, कुशीनगर, लुंबिनी, कपिलवस्तु, श्रावस्ती और कौशांबी जैसे स्थल अब सामान्य पर्यटकों को भी आकर्षित कर रहे हैं।
उत्तर प्रदेश में विरासत संरक्षण को लेकर राज्य सरकार का अभियान 2025 में भी लगातार गति पकड़ता रहा।
अगस्त में आदित्यनाथ ने संभल में 659 करोड़ रुपये की कुल लागत वाले 222 विकास कार्यों का उद्घाटन और शिलान्यास किया। उन्होंने दावा किया कि वहां कभी 68 तीर्थस्थल, 19 पवित्र कुएं और एक परिक्रमा मार्ग था, लेकिन “विदेशी बर्बर आक्रांताओं ने हमारे तीर्थस्थलों को अपवित्र किया और नष्ट कर दिया।”
उन्होंने घोषणा की कि इन स्थलों और कुओं को फिर से विकसित किया जाएगा।
प्रदेश का बौद्ध सर्किट भी आस्था, विश्वास और वैश्विक पर्यटन का सशक्त केंद्र बनकर उभरा। पर्यटन विभाग की जनवरी से सितंबर 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के बौद्ध स्थलों पर देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। सारनाथ, कुशीनगर, श्रावस्ती, कौशांबी, कपिलवस्तु और संकिसा जैसे छह प्रमुख बौद्ध स्थल उत्तर प्रदेश को वैश्विक बौद्ध पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिला रहे हैं।
पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश में बौद्ध पर्यटन को लेकर वैश्विक रुचि लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 के नौ महीनों (जनवरी से सितंबर) के दौरान भगवान बुद्ध से जुड़े प्रदेश के छह प्रमुख स्थलों पर कुल 61,15,850 पर्यटकों ने दर्शन किए, जिनमें 58,44,591 घरेलू तथा 2,71,259 विदेशी पर्यटक शामिल हैं। वहीं, पर्यटन विभाग ने वर्ष 2025 के अंत तक इन पवित्र स्थलों पर आने वाले पर्यटकों की संख्या के 64 लाख के पार जाने का अनुमान जताया है।
भाषा आनन्द पवनेश नरेश
नरेश

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