लखनऊ, 25 सितंबर (भाषा) उत्तर प्रदेश में आगामी राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों को लेकर राजनीतिक दलों में जोड़तोड़ और लामबंदी तेज हो गई है। राज्यसभा की 10 सीटों के लिए 16 अक्टूबर और विधान परिषद की 11 सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान होगा।
विधानसभा में मौजूदा संख्या बल के आधार पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और समाजवादी पार्टी (सपा) ही अपने उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने की स्थिति में हैं। ऐसे में दोनों दलों में उम्मीदवारों के चयन और रणनीति को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं।
सपा के मुख्य प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने शुक्रवार को ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि चुनावी रणनीति तय करने के लिए पार्टी 28 सितंबर को विधायकों की बैठक करेगी।
भाजपा भी जल्द ही उम्मीदवारों के नामों को अंतिम रूप देने के लिए बैठक करेगी। शुक्रवार को भाजपा की बैठक के बारे में पूछे जाने पर पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि अभी ऐसी कोई बैठक नहीं हुई है।
भाजपा के एक अन्य नेता ने कहा, ‘‘हम जल्द इस संबंध में फैसला लेंगे। हमारी पार्टी कैडर आधारित है और सभी प्रमुख नेताओं से सलाह लेकर फैसले किए जाते हैं।’’
निर्वाचन आयोग के अनुसार, राज्यसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की 10 सीट शामिल हैं, जिन पर मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है। चुनाव के लिए अधिसूचना 29 सितंबर को जारी होगी, नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि छह अक्टूबर और मतगणना 16 अक्टूबर को होगी।
उत्तर प्रदेश से सेवानिवृत्त होने वाले राज्यसभा सदस्यों में भाजपा के अरुण सिंह, गीता शाक्य, नीरज शेखर, बृजलाल, बी.एल. वर्मा, सीमा द्विवेदी और हरदीप सिंह पुरी, सपा के रामगोपाल यादव तथा बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के रामजी गौतम शामिल हैं।
पूर्व उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा की सीट 11 सितंबर से रिक्त है। अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह के उपराज्यपाल नियुक्त किए जाने के बाद उनका इस्तीफा प्रभावी हुआ था। निवर्तमान 10 सीटों में से आठ भाजपा, एक सपा और एक बसपा के पास थीं।
मौजूदा विधानसभा में संख्या बल के आधार पर भाजपा को सर्वाधिक सीटें मिलने की संभावना है, जबकि उसके बाद सपा का प्रतिनिधित्व होगा। हाल ही में आगरा की फतेहाबाद सीट से भाजपा विधायक छोटेलाल वर्मा के निधन के बाद 403 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा गठबंधन के 288 विधायक हैं। इनमें भाजपा के 255, अपना दल (सोनेलाल) के 13, राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के नौ, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के छह और निषाद पार्टी के पांच विधायक शामिल हैं।
सपा-कांग्रेस गठबंधन के पास करीब 103 विधायक हैं, जिनमें सपा के 101 विधायक शामिल हैं। जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) के दो और तीन निर्दलीय विधायक हैं। इन तीन निर्दलीय विधायकों में उत्तर प्रदेश सरकार के खाद्य मंत्री मनोज कुमार पांडेय भी शामिल हैं। ये तीनों विधायक सपा के टिकट पर चुनाव जीते थे, लेकिन राज्यसभा चुनाव के दौरान पार्टी से उनकी दूरियां बढ़ गई थीं।
विधान परिषद की 11 सीटों के लिए चुनाव 23 अक्टूबर को होगा और मतगणना 27 अक्टूबर को की जाएगी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के अनुसार, पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए अधिसूचना 29 सितंबर को जारी होगी।
नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि छह अक्टूबर, नामांकन पत्रों की जांच सात अक्टूबर और नाम वापसी की अंतिम तिथि नौ अक्टूबर होगी।
इन सीटों के लिए मतदान 23 अक्टूबर को सुबह आठ बजे से शाम चार बजे तक होगा और पूरी चुनाव प्रक्रिया 31 अक्टूबर तक पूरी कर ली जाएगी। संबंधित सदस्यों का कार्यकाल छह दिसंबर को समाप्त हो रहा है।
विधान परिषद के जिन सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनमें भाजपा के अवनीश कुमार सिंह, मानवेन्द्र प्रताप सिंह, दिनेश कुमार गोयल, उमेश द्विवेदी, श्रीचंद शर्मा और हरि सिंह ढिल्लों; सपा के लाल बिहारी यादव, आशुतोष सिन्हा और डॉ. मान सिंह यादव; निर्दलीय आकाश अग्रवाल तथा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से ध्रुव कुमार त्रिपाठी शामिल हैं।
भाषा
अरुणव, आनन्द रवि कांत