मथुरा, नौ अगस्त (भाषा) उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में श्रीकृष्ण जन्मभूमि स्थल पर मंदिर निर्माण के लिए रविवार को प्रस्तावित ‘शंखनाद’ और ‘कारसेवा’ कार्यक्रम आयोजकों ने रद्द कर दिया। आयोजकों ने कहा कि उनके कई अनुयायी श्रावण माह की कांवड़ यात्रा में शामिल हो रहे हैं।
गोवर्धन क्षेत्र के राधाकुंड के पास जुल्हेंदी गांव स्थित श्री चित्रगुप्त पीठ के अध्यक्ष स्वामी डॉ. सच्चिदानंद ने इस कार्यक्रम को रद्द करने की घोषणा की। उन्होंने चार जुलाई को घोषणा की थी कि नौ अगस्त को श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर कारसेवा की जाएगी।
स्वामी सच्चिदानंद ने बताया कि उनके कई अनुयायी कांवड़ यात्रा में शामिल हैं, इसलिए कार्यक्रम को स्थगित किया गया है। उन्होंने सनातन परंपरा से जुड़े संतों और अनुयायियों से बड़ी संख्या में कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की थी।
जुल्हेंदी स्थित चित्रगुप्त पीठ में रविवार को हवन किया गया। स्वामी सच्चिदानंद ने बताया कि उनकी चार मांगें हैं- पूजा स्थल कानून, 1991 को निरस्त किया जाए, श्रीकृष्ण जन्मस्थान मामले की रोजाना सुनवाई के लिए त्वरित अदालत गठित की जाए, जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण को माखन-मिश्री अर्पित करने की अनुमति दी जाए और शाही ईदगाह मस्जिद के पुरातात्विक सर्वेक्षण पर लगी रोक हटाई जाए।
उन्होंने कहा कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे छह दिसंबर को कारसेवा करेंगे।
इसी तरह राष्ट्रीय हनुमान दल ने भी रविवार को ईदगाह में जलाभिषेक और कारसेवा का आह्वान किया था, जिसे बाद में रद्द कर दिया गया।
इस बीच, अखिल भारत हिंदू महासभा की आगरा इकाई की अध्यक्ष मीरा राठौर को पुलिस ने ईदगाह में प्रवेश करने का प्रयास करने पर हिरासत में ले लिया। पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने से पहले उन्होंने शाही ईदगाह जाते समय रास्ते में श्रीकृष्ण की प्रतिमा का जलाभिषेक किया।
मीरा राठौर ने कहा कि मंदिर निर्माण तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने कहा, ‘‘मैं यहां कारसेवा के लिए आई थी। मैं अपने कान्हा को मुक्त कराऊंगी और इसके लिए जेल जाने या गोलियां खाने के लिए भी तैयार हूं।’’
कांग्रेस नेता यतेंद्र मुक्कदम ने इस पूरे मामले को ‘नाटक’ करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह के आह्वान शहर की शांति और सद्भाव बिगाड़ने के लिए किए जाते हैं।
इससे पहले दिन में प्रस्तावित कार्यक्रम को देखते हुए मथुरा जिला प्रशासन ने गोवर्धन क्षेत्र में नयी धार्मिक शोभायात्राओं और अवैध गतिविधियों पर रोक लगा दी थी।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि प्रशासन ने यह कार्रवाई विवादित स्थल से जुड़े उच्चतम न्यायालय और इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्देशों के मद्देनजर की है।
अपर पुलिस अधीक्षक (नगर) राजीव कुमार सिंह ने एक वीडियो संदेश में कहा कि उच्चतम न्यायालय और इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्देशों के तहत जिले में किसी नयी परंपरा की शुरुआत पर रोक है।
उन्होंने कहा कि आयोजकों ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि स्थल पर मंदिर निर्माण के लिए कारसेवा और ‘शंखनाद’ कार्यक्रम में शामिल होने के लिए प्रमुख लोगों और संतों से अपील की थी, लेकिन इसके लिए पुलिस से अनुमति नहीं ली गई थी।
सिंह ने कहा, ‘‘हम क्षेत्र की ओर जाने वाले सभी लोगों को रोक रहे हैं और उन्हें उनके संबंधित थाना क्षेत्रों में वापस भेज रहे हैं।’’
पुलिस के अनुसार, जिन संगठनों और व्यक्तियों से संपर्क किया गया था तथा जिन्हें कार्यक्रम में शामिल होने या सहयोग करने के लिए आमंत्रित किया गया था, उन्हें ‘रेड कार्ड’ नोटिस जारी कर कार्यक्रम से दूर रहने की चेतावनी दी गई है।
अधिकारियों ने बताया कि साध्वी ऋतंभरा, देवकीनंदन ठाकुर, महंत फूलडोल बिहारीदास, श्रीचरनदास, सौरभ गौड़, सीताराम दास, अभिषेक ब्रह्मचारी, मोहिनी बिहारी शरण और महामंडलेश्वर कृष्णानंद समेत 12 संतों और धार्मिक नेताओं को नोटिस जारी किए गए हैं।
सिंह ने कहा कि संबंधित संगठनों और व्यक्तियों को अदालत के आदेशों और निर्देशों की जानकारी दे दी गई है तथा उन्होंने प्रशासन के साथ सहयोग करने का आश्वासन दिया है।
उन्होंने कहा कि फिलहाल क्षेत्र में शांति और कानून-व्यवस्था की स्थिति सामान्य है तथा सभी पक्षों से संवाद जारी है।
पुलिस ने बताया कि इलाके में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। अधिकारियों ने कहा कि जानकारी के अभाव में क्षेत्र की ओर आने वाले लोगों को स्थिति समझाकर सम्मानपूर्वक वापस भेजा जा रहा है।
मथुरा का श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद हिंदू पक्ष के इस दावे पर केंद्रित है कि भगवान श्रीकृष्ण के जन्मस्थान पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर बना था और स्थल के एक हिस्से पर शाही ईदगाह मस्जिद स्थित है, जिसके बारे में हिंदू पक्ष का दावा है कि इसे मंदिर तोड़कर बनाया गया था।
भाषा
सं, राजेंद्र रवि कांत