राम मंदिर दान राशि मामला: निजी सुरक्षा एंजेसी ने अपनी संलिप्तता से इनकार किया
राम मंदिर दान राशि मामला: निजी सुरक्षा एंजेसी ने अपनी संलिप्तता से इनकार किया
वाराणसी (उत्तर प्रदेश), एक जुलाई (भाषा) राम मंदिर में नकदी संभालने वाली इकाई में तैनाती के लिए कर्मचारी उपलब्ध कराने वाली निजी सुरक्षा एजेंसी ने चढ़ावे के कथित गबन में किसी भी भूमिका से इनकार किया है और कहा है कि उसने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के अनुरोध पर बैंक के लिए कर्मचारी भर्ती किए थे।
अयोध्या में राम मंदिर दान के कथित गबन से जुड़े मामले की जांच के बीच सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज नामक एजेंसी ने यह स्पष्टीकरण दिया है। एजेंसी के माध्यम से भर्ती किए गए छह कर्मचारी विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा गिरफ्तार किए गए आठ लोगों में शामिल हैं।
एजेंसी के निदेशक गौरव सिंह ने बुधवार को ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि कंपनी ने 22 कर्मचारियों की भर्ती की थी और उन्हें एसबीआई की अयोध्या शाखा में ‘हाउसकीपिंग’ काम के लिए भेजा था और बाद में उनकी ड्यूटी तय करने में उसकी कोई भूमिका नहीं थी।
उन्होंने कहा, “हमारी कंपनी का राम मंदिर कथित दान चोरी से कोई लेना-देना नहीं है। हमने 22 लोगों को भर्ती किया और उन्हें हाउसकीपिंग काम के लिए एसबीआई अयोध्या शाखा में भेजा। बैंक ने उन्हें आगे क्या काम दिया, यह हमें पता नहीं है,”
सिंह ने दावा किया कि इन सभी 22 कर्मचारियों की भर्ती एसबीआई अयोध्या शाखा के मुख्य प्रबंधक के निर्देश पर की गई थी।
उन्होंने कहा, “एसबीआई अयोध्या शाखा के मुख्य प्रबंधक ने हमें इन 22 लोगों के नाम और बायोडाटा भेजा था। ये सभी पहले किसी दूसरी एजेंसी में काम कर रहे थे।”
सिंह ने कहा कि उनकी कंपनी मंदिरों के लिए कोई ठेका नहीं लेती और उसने केवल एसबीआई शाखा को कर्मचारी उपलब्ध कराए थे।
उन्होंने कहा, “हमसे केवल एसबीआई अयोध्या शाखा को हाउसकीपिंग स्टाफ देने के लिए कहा गया था। इन कर्मचारियों ने बाद में कौन-कौन से काम किए और क्यों किए, यह बैंक को बताना चाहिए।”
सिंह ने कहा कि एसआईटी इस मामले की जांच कर रही है और एजेंसी ने जांचकर्ताओं द्वारा मांगी गई सभी जानकारी दे दी है।
यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि एसबीआई के सूत्रों ने पहले ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया था कि बैंक लगभग तीन महीने पहले राम मंदिर में दान की नकदी गिनने वाले ‘आउटसोर्स’ कर्मचारियों को बदलना चाहता था, क्योंकि उसे अनियमितताओं का शक था। लेकिन आरोप है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्यों ने कर्मचारियों को बदलने की अनुमति नहीं दी।
कथित गबन का मामला उस समय सामने आया जब उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एसआईटी ने अपनी शुरुआती जांच रिपोर्ट दी, जिसके बाद 25 जून को प्राथमिकी दर्ज की गई।
इसके बाद आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
पुलिस ने कहा कि अब तक छह आरोपियों के पास से लगभग 80 लाख रुपये नकद और कुछ विदेशी मुद्रा बरामद हुई है। जांच अभी जारी है।
भाषा सं. सलीम
जोहेब
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