वाराणसी में मात्र एक घंटे में ढाई लाख से ज्यादा पौधे रोपकर बनाया गया कीर्तिमान
वाराणसी में मात्र एक घंटे में ढाई लाख से ज्यादा पौधे रोपकर बनाया गया कीर्तिमान
वाराणसी, एक मार्च (भाषा) उत्तर प्रदेश में वाराणसी के सुजाबाद डोमरी क्षेत्र में आयोजित ‘वृहद पौधारोपण कार्यक्रम’ में रविवार को मात्र एक घंटे की समयावधि में लोगों ने दो लाख 51 हजार से ज्यादा पौधों का रोपण किया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि दो लाख 51 हजार 446 पौधों का रोपण किया गया और इसके साथ ही चीन के आठ साल पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। मौके पर मौजूद गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के निर्णायक मंडल के सदस्य ऋषि नाथ ने वाराणसी के महापौर अशोक कुमार तिवारी व नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल को प्रमाणपत्र सौंपा।
अधिकारियों ने बताया कि इस ऐतिहासिक पल को दर्ज करने के लिए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की टीम सुबह से ही डोमरी में मौजूद रही। नगर निगम और विभिन्न सामाजिक व सरकारी संस्थाओं के समन्वय से सुजाबाद डोमरी के 350 बीघा क्षेत्र में विकसित किए गए इस आधुनिक ‘शहरी वन’ ने आज विश्व पटल पर देश और प्रदेश का मान बढ़ाया है।
अधिकारियों ने बताया कि 10 मार्च 2018 को 1,53,981 पौधों का रोपण कर यह रिकॉर्ड चीन के पास था। एक घंटे में सर्वाधिक पौधे लगाने का विश्व रिकॉर्ड चीन की हेनान प्रांतीय समिति और हेनान शिफांगे ग्रीनिंग इंजीनियरिंग कंपनी के नाम था।
गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के निर्णायक मंडल के सदस्य ऋषि नाथ और विश्व रिकॉर्ड रणनीतिकार निश्चल बारोट ने मौके पर मौजूद रहकर प्रत्येक गतिविधि की निगरानी की। ड्रोन कैमरों और आधुनिक डिजिटल गणना तंत्र के जरिए हुई सटीक पुष्टि के बाद ऋषि नाथ ने आधिकारिक रूप से इस नए रिकॉर्ड की घोषणा की।
अधिकारियों के अनुसार इस ‘शहरी वन’ की सबसे अनूठी विशेषता इसकी बनावट और वैचारिक पृष्ठभूमि है। पूरे वन क्षेत्र को 60 अलग-अलग सेक्टरों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक सेक्टर का नाम काशी के प्रसिद्ध गंगा घाटों जैसे -दशाश्वमेध, ललिता घाट, नया घाट, मणिकर्णिका घाट, केदार घाट, चौसट्टी घाट, मान मंदिर घाट और शीतला घाट के नाम पर रखा गया है।
‘शहरी वन’ की यह बनावट ऐसी है कि भविष्य में जब ये पौधे वृक्ष बनेंगे, तो गंगा किनारे एक हरा-भरा ‘मिनी काशी’ का स्वरूप नजर आएगा। प्रत्येक सेक्टर में लगभग 4,000 से अधिक पौधे लगाए गए हैं। इनमें शीशम, अर्जुन, सागौन और बांस जैसी 27 देशी प्रजातियों के साथ-साथ आम, अमरूद और पपीता जैसे फलदार वृक्षों और अश्वगंधा, शतावरी व गिलोय जैसी औषधियों को प्राथमिकता दी गई है।
भारतीय सेना के 39 जीटीसी, 34 जीटीसी, 39 जीआर, और 137 सीएफटीएफ (टीए) के जवानों ने अनुशासन की मिसाल पेश की। वहीं राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), नागरिक सुरक्षा (सिविल डिफेंस) और उत्तर प्रदेश पुलिस की 36 व 39 वाहिनी पीएसी के जवानों ने पूरी ऊर्जा के साथ पौधरोपण किया।
अधिकारियों ने बताया कि इन पौधों को जीवित रखने के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। वन क्षेत्र में 10,827 मीटर लंबी अत्याधुनिक पाइपलाइन बिछाई गई है। 10 बोरवेल और 360 ‘रेन गन’ सिस्टम के जरिए सिंचाई की ऐसी व्यवस्था की गई है कि पानी की बर्बादी न हो।
अधिकारियों ने बताया कि यह परियोजना केवल हरियाली तक सीमित नहीं है, बल्कि नगर निगम के लिए आय का बड़ा स्रोत भी बनेगी। मध्य प्रदेश की एमबीके संस्था के साथ हुए समझौते के तहत तीसरे वर्ष से ही निगम को दो करोड़ रुपये की आय होने लगेगी, जो सातवें वर्ष तक सात करोड़ रुपये वार्षिक तक पहुंच सकती है।
महापौर अशोक कुमार तिवारी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रेरणा व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में यह उपलब्धि सिद्ध करती है कि काशी न केवल अपनी प्राचीन परंपराओं को संजोए हुए है, बल्कि पर्यावरण जैसे वैश्विक मुद्दों पर भी दुनिया का नेतृत्व करने के लिए तैयार है।
भाषा
सं, आनन्द रवि कांत

Facebook


