विशेषाधिकार हनन और पुलिस हिरासत में बिजलीकर्मी की मौत मामलों पर सपा सदस्‍यों ने किया बहिर्गमन

विशेषाधिकार हनन और पुलिस हिरासत में बिजलीकर्मी की मौत मामलों पर सपा सदस्‍यों ने किया बहिर्गमन

विशेषाधिकार हनन और पुलिस हिरासत में बिजलीकर्मी की मौत मामलों पर सपा सदस्‍यों ने किया बहिर्गमन
Modified Date: November 29, 2022 / 08:16 pm IST
Published Date: September 20, 2022 7:46 pm IST

लखनऊ, 20 सितंबर (भाषा) उत्‍तर प्रदेश विधानपरिषद में मंगलवार को सपा सदस्‍यों ने विशेषाधिकार हनन और गोंडा जिले में पुलिस हिरासत में पिछले दिनों एक संविदा बिजलीकर्मी की मौत से जुड़ी सूचनाओं पर सरकार के जवाब से असंतुष्‍ट होकर सदन से बहिर्गमन किया।

सपा के लाल बिहारी यादव ने सोमवार को विधानपरिषद के सदस्यों को विक्रमादित्य मार्ग पर समाजवादी पार्टी कार्यालय के निकट पुलिस बलों द्वारा सदन में भाग लेने से रोके जाने पर नियम-223 के तहत विशेषाधिकार हनन की सूचना दी।

उन्होंने कहा कि सोमवार को सपा सदस्यों ने सदन की कार्यवाही में भाग लेने के लिए पैदल विधानभवन जाने का निर्णय लिया, इस पर सरकार की पुलिस ने उन्हें रोक दिया।

उन्होंने कहा कि ऐसा लग रहा था कि जैसे यहां वाघा सीमा है और पाकिस्तान और हिंदुस्तान के बीच संघर्ष होने वाला है। उनके अनुसार ऐसे हालात में सपा सदस्य बहुत मुश्किलों से सदन पहुंचे। उनका कहना था कि यह उनके विशेषाधिकार का हनन है, लिहाजा इस पर आवश्यक कार्यवाही की जाए।

सदन के नेता केशव प्रसाद मौर्य ने सपा सदस्य के आरोपों को नकारते हुए उल्टा इल्‍जाम लगाया कि सपा सदस्य कल सदन में नहीं आना चाहते थे और रास्ते में अवरोध खड़ा कर जनता की परेशानी को बढ़ाना चाहते थे। उन्होंने कहा कि सुरक्षित क्षेत्र में धरना-प्रदर्शन करके हिंसात्मक घटनाएं करने का प्रयास किया गया।

उन्‍होंने कहा कि सरकार की कभी यह मंशा नहीं रही कि किसी सदस्य के विशेषाधिकार का हनन हो। उपमुख्यमंत्री मौर्य ने कहा कि जब सपा विधायक और विधानपरिषद सदस्य अपने कार्यालय से निकले तो उनके बीच अन्य लोग भी शामिल हो गए जिससे आम जनता के साथ साथ सदन के एक सदस्य को भी आने में परेशानी हुई।

सरकार के इस उत्तर से असंतुष्ट होकर सपा के सभी सदस्य सदन से बहिर्गमन कर गए।

शून्य काल के दौरान ही सपा सदस्यों लाल बिहारी यादव, आशुतोष सिन्हा और मान सिंह यादव ने कार्य स्थगन प्रस्ताव के जरिए गोंडा जिले के नवाबगंज थाने में पिछली 14 सितंबर को पुलिस हिरासत में एक संविदा बिजली कर्मी की मौत का मामला उठाते हुए सदन का बाकी काम रोक कर इस पर चर्चा कराने की मांग की।

सपा सदस्य स्वामी प्रसाद मौर्य, मान सिंह यादव, आशुतोष सिन्हा और लाल बिहारी यादव में सूचना की ग्राह्यता पर बल देते हुए अपने-अपने विचार व्यक्त किए।

मौर्य ने सरकार का पक्ष रखते हुए बताया कि इस मामले में थानाध्यक्ष समेत 10 पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है और उनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही की जा रही है।

मौर्य ने वर्ष 2012 से 2017 के बीच रही समाजवादी पार्टी की सरकार के कार्यकाल के दौरान गुंडाराज को प्रश्रय देने का आरोप लगाया और कहा कि आज बड़े-बड़े अपराधी और माफिया गले में तख्ती डालकर थाने में आत्मसमर्पण कर रहे हैं। उन्होंने वर्ष 2016 में सपा के कार्यकाल और कानून-व्यवस्था से जुड़े इस साल के आंकड़ों की तुलना की।

सरकार के उत्तर से संतुष्ट न होने के कारण सपा के सभी सदस्य सदन से बाहर चले गए।

अधिष्ठाता सुरेश कुमार त्रिपाठी ने कार्यस्थगन की सूचना को नामंजूर करते हुए आवश्यक कार्यवाही के लिए सरकार के पास भेजने के निर्देश दिए।

भाषा सलीम राजकुमार

राजकुमार


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