एनआरएचएम से जुड़े तीन मामलों में चल रही अभियोजन कार्यवाही पर रोक

एनआरएचएम से जुड़े तीन मामलों में चल रही अभियोजन कार्यवाही पर रोक

एनआरएचएम से जुड़े तीन मामलों में चल रही अभियोजन कार्यवाही पर रोक
Modified Date: April 8, 2026 / 10:42 pm IST
Published Date: April 8, 2026 10:42 pm IST

लखनऊ, आठ अप्रैल (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) से जुड़े तीन मामलों में चल रही अभियोजन कार्यवाही पर रोक लगाकर पूर्व मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ अनिल कुमार शुक्ला को अंतरिम राहत दी।

ये मामले गाजियाबाद में विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निरोधक-सीबीआई) के समक्ष लंबित हैं। अदालत ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को मई के पहले हफ्ते तक अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

न्यायमूर्ति राजीव सिंह की पीठ ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 528 के तहत शुक्ला द्वारा दायर की गयी तीन अलग-अलग याचिकाओं पर मंगलवार को आदेश पारित किया।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, नयी दिल्ली में सीबीआई द्वारा दर्ज किए गए मामले 2007 और 2009 के बीच दवाओं एवं उपकरणों की खरीद में कथित अनियमितताओं से संबंधित हैं, जिसके परिणामस्वरूप सरकारी खजाने को नुकसान हुआ। तीनों मामलों में आरोप पत्र दाखिल हो चुका है।

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नंदित श्रीवास्तव ने दलील दी कि शुक्ला के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है। उन्होंने कहा कि अधीनस्थ अदालत के समक्ष दायर एक ‘डिस्चार्ज’ आवेदन लंबित है, जिससे याचिकाकर्ता को उच्च न्यायालय का रुख करना पड़ा। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि शुक्ला को उनकी बढ़ती उम्र को देखते हुए अनावश्यक उत्पीड़न का शिकार होना पड़ रहा है।

याचिका का विरोध करते हुए, सीबीआई के विशेष वकील अनुराग कुमार सिंह ने प्रारंभिक आपत्ति जताते हुए कहा कि याचिकाएं सुनवाई योग्य नहीं थीं क्योंकि ‘डिस्चार्ज’ आवेदन अब भी गाजियाबाद में ट्रायल कोर्ट के समक्ष लंबित है।

आपत्ति को खारिज करते हुए पीठ ने कहा कि कथित घटनाएं 17 से 19 साल पुरानी हैं । पीठ ने कहा कि एक मामले में, याचिकाकर्ता ने केवल डेढ़ दिन के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी सीएमओ के रूप में कार्य किया था।

उच्च न्यायालय ने आरोपपत्रों और संज्ञान आदेशों के बीच विसंगतियों को भी चिह्नित किया और बताया कि एक मामले में, अपेक्षित अभियोजन मंजूरी के बिना एक पूरक आरोपपत्र दाखिल किया गया था।

पीठ ने कहा कि मुकदमे में इतनी लंबी देरी आरोपी के बचाव पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है, खासकर यह देखते हुए कि शुक्ला लगभग 73 वर्ष के हैं।

भाष सं जफर राजकुमार

राजकुमार


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