बंधुआ मजदूरों ने अमानवीय परिस्थितियों में रहने और मारपीट किये जाने का आरोप लगाया

बंधुआ मजदूरों ने अमानवीय परिस्थितियों में रहने और मारपीट किये जाने का आरोप लगाया

बंधुआ मजदूरों ने अमानवीय परिस्थितियों में रहने और मारपीट किये जाने का आरोप लगाया
Modified Date: June 25, 2026 / 02:42 pm IST
Published Date: June 25, 2026 2:42 pm IST

मुजफ्फरनगर (उप्र), 25 जून (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के तितावी थाना क्षेत्र स्थित एक पेपर प्लेट निर्माण फैक्ट्री से बचाए गए 12 बंधुआ मजदूरों ने कथित तौर पर महीनों तक अमानवीय परिस्थितियों में रहने, मारपीट एवं जबरन श्रम कराने के गंभीर आरोप लगाए हैं। अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी।

मजदूरों का कहना है कि उन्हें 12,000 से 15,000 रुपये मासिक वेतन, भोजन, आवास और आठ घंटे की नौकरी का लालच देकर लाया गया था, लेकिन बाद में फैक्ट्री परिसर में बंद कर दिया गया।

उनका आरोप है कि उनके मोबाइल फोन और पहचान पत्र छीन लिए गए तथा उन्हें लंबे समय तक लगातार काम करने के लिए मजबूर किया गया।

आगरा के रहने वाले एक श्रमिक ने बताया कि उसे दिन में केवल तीन-चार रोटियां दी जाती थीं और कई महीनों तक सब्जी या दाल नहीं मिली।

उसका आरोप है कि भोजन के नाम पर पशुओं के चारे में इस्तेमाल होने वाली चोकर की रोटियां दी जाती थीं, मजदूरों ने यह भी दावा किया कि काम में कमी या गलती होने पर बेल्ट और डंडों से पिटाई की जाती थी।

श्रमिकों के अनुसार, फैक्ट्री में ऊंची चारदीवारी, बंद दरवाजे, सीसीटीवी कैमरे और पिटबुल कुत्तों की निगरानी के कारण वहां से निकलना लगभग असंभव था। कुछ मजदूरों ने आरोप लगाया कि भागने की कोशिश करने वालों को कुत्तों से डराया जाता था।

पुलिस ने बताया कि प्रशासन और पुलिस की संयुक्त छापेमारी में मंगलवार को नाबालिगों समेत 12 मजदूरों को मुक्त कराया गया। उन्होंने बताया कि कई श्रमिकों के शरीर पर चोट और यातना के निशान पाए गए हैं। घायलों का उपचार कराया जा रहा है।

बचाए गए मजदूरों ने पुलिस को यह भी बताया कि नेपाली मूल के एक श्रमिक अर्जुन उर्फ टोपी की पिछले वर्ष कथित यातना के कारण मौत हो गई थी और इस संबंध में पुलिस ने नया मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस के अनुसार, मामले की विस्तृत जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

भाषा सं जफर मनीषा रंजन

रंजन


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