विलुप्त हो रहे अलगोजा वादन का अभिलेखीकरण किया गया

विलुप्त हो रहे अलगोजा वादन का अभिलेखीकरण किया गया

विलुप्त हो रहे अलगोजा वादन का अभिलेखीकरण किया गया
Modified Date: May 11, 2026 / 09:45 pm IST
Published Date: May 11, 2026 9:45 pm IST

लखनऊ, 11 मई (भाषा) उत्तर प्रदेश की लोक संगीत परंपरा और विलुप्तप्राय वाद्यों के संरक्षण के लिए ‘संपदा’ कार्यक्रम के तहत अलगोजा वादन का अभिलेखीकरण किया गया। एक आधिकारिक बयान में सोमवार को यह जानकारी दी गई।

बयान के मुताबिक, कार्यक्रम का आयोजन उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान और उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में लखनऊ के गोमतीनगर स्थित अकादमी स्टूडियो में हुआ।

उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान के निदेशक अतुल द्विवेदी ने बताया कि मथुरा के लोक कलाकार सुखवीर और हरप्रसाद ने अलगोजा और चंग वादन की पारंपरिक शैली का प्रभावी प्रदर्शन किया।

उन्होंने बताया कि ब्रज क्षेत्र की सांगीतिक विरासत और लोक धुनों की प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम में अलगोजा वादन और लोक संगीत पर केंद्रित विशेष साक्षात्कार भी हुआ।

संगीत नाटक अकादमी के निदेशक डॉ. शोभित नाहर ने कलाकारों से अलगोजा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, तकनीकी विशेषताओं, वर्तमान चुनौतियों और नयी पीढ़ी तक इस परंपरा को पहुंचाने के उपायों पर चर्चा की।

नाहर ने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य विलुप्त होती लोक कलाओं और वाद्य परंपराओं का दस्तावेजीकरण कर उन्हें संरक्षित करना और लोक कलाकारों को प्रोत्साहित करना है।

कला प्रेमियों और शोधार्थियों ने इस कार्यक्रम को लोक संस्कृति के संरक्षण की दिशा में सार्थक पहल बताया।

भाषा

आनन्द पारुल

पारुल


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