उप्र:सामूहिक दुष्कर्म मामले में जाली शपथ दाखिल करने के 31 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज

उप्र:सामूहिक दुष्कर्म मामले में जाली शपथ दाखिल करने के 31 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज

उप्र:सामूहिक दुष्कर्म मामले में जाली शपथ दाखिल करने के 31 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज
Modified Date: September 9, 2026 / 03:46 pm IST
Published Date: September 9, 2026 3:46 pm IST

भदोही (उप्र), नौ सितंबर (भाषा) भदोही जिले में एक महिला से कई बार सामूहिक दुष्कर्म की कथित घटना के आरोपियों को बचाने के लिये अदालत में जाली शपथ पत्र दाखिल करने के आरोप में 31 नामजद और अन्य अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। यह मुकदमा न्यायालय के आदेश पर दर्ज किया गया है।

अपर पुलिस अधीक्षक शुभम अग्रवाल ने बुधवार को बताया कि जिले के ऊंज थाना क्षेत्र के एक गांव की महिला ने इसी साल छह जून को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट आनंद मिश्रा की अदालत में एक याचिका दायर की थी।

इस याचिका की सुनवाई के बाद महिला से सामूहिक दुष्कर्म और अदालत में झूठे शपथ पत्र देकर गुमराह करने के आरोप में राज पति बिंद नामक व्यक्ति सहित 31 नामजद लोगों और कुछ अज्ञात के विरुद्ध अदालत ने मंगलवार को ऊंज थाना पुलिस को मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया था।

उन्होंने बताया कि यह मुकदमा भारतीय दंड विधान की धाराओं 181, 186, 191, 192, 193, 195, 196 (सभी झूठे बयान/सबूत से संबंधित धाराएं), 120—बी (आपराधिक साजिश), 419, 420 (धोखाधड़ी) और 466, 467, 468, 471 (सभी जालसाजी और जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल से संबंधित धाराएं) के तहत दर्ज किया गया है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार वर्ष 2020 में ऊंज थाना क्षेत्र के एक गांव में 45 वर्षीय और पेशे से श्रमिक महिला से उसके घर के अंदर कथित तौर पर कई बार दुष्कर्म किया गया था।

महिला ने आरोप लगाया था कि मनोज, अरविंद और पांच अन्य लोग उसके घर में घुसे, हथियारों के बल पर उसे धमकाया और फिर उससे दुष्कर्म किया। आरोप के मुताबिक बाद में कई अन्य लोग भी दुष्कर्म की इस घटना में कथित तौर शामिल हो गए।

उन्होंने बताया कि पीड़ित महिला की शिकायत के आधार पर ऊंज थाने में सामूहिक दुष्कर्म और आपराधिक धमकी देने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गयी थी।

अग्रवाल ने बताया कि जांच के दौरान शुरू में आरोपियों की ओर से दिए गए हलफनामों के साथ आरोपपत्र दाखिल किया गया था, मगर पीड़ित महिला का बयान दर्ज नहीं किया गया और न ही उसका चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया था।

उन्होंने बताया कि इसके बाद पीड़िता की याचिका पर अदालत ने नए सिरे से जांच का आदेश दिया।

अग्रवाल ने कहा कि दूसरी जांच के दौरान भी पुलिस ने कथित तौर पर झूठे और मनगढ़ंत हलफनामों पर भरोसा किया जिसमें बिना किसी वकील के हस्ताक्षर के दाखिल किए गए दस्तावेज भी शामिल थे और इसके बाद पुलिस ने 30 अक्टूबर 2021 को अदालत के समक्ष अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर दी थी।

उन्होंने आरोप लगाया कि इन घटनाओं के कारण महिला और उसके बच्चों को सामाजिक अपमान का सामना करना पड़ा।

पुलिस ने बताया कि महिला ने अंतिम रिपोर्ट का फिर से विरोध किया जिसके बाद अदालत ने भारतीय दंड विधान की धारा 200 के तहत उसका बयान दर्ज किया।

अग्रवाल ने बताया कि इसके बाद अदालत ने महिला से सामूहिक दुष्कर्म के आरोपों में प्रथम दृष्टया सत्यता पायी और अभियोजन पक्ष को कार्यवाही आगे बढ़ाने की अनुमति दी।

बाद में छह जून 2026 को महिला ने फिर से अदालत का रुख किया और आरोप लगाया कि अधिकारियों ने आरोपी की मदद की थी और अदालत को गुमराह करने और उसके बयान को दबाने के लिए झूठे हलफनामों का इस्तेमाल किया था।

इस शिकायत के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पुलिस को राजपति बिंद और 30 अन्य नामजद लोगों के साथ-साथ अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज करने का निर्देश दिया।

पुलिस सूत्रों ने बताया कि मामले की अब विस्तृत जांच की जा रही है।

भाषा सं. सलीम मनीषा संतोष

संतोष


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