उप्र विस के प्रमुख सचिव की नियुक्ति मामला : अदालत ने राज्य सरकार, विधानसभा सचिवालय से जवाब तलब किया
उप्र विस के प्रमुख सचिव की नियुक्ति मामला : अदालत ने राज्य सरकार, विधानसभा सचिवालय से जवाब तलब किया
लखनऊ, पांच जून (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश विधानसभा के प्रमुख सचिव के रूप में प्रदीप कुमार दुबे की नियुक्ति और सेवा विस्तार को चुनौती देने के लिए दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार, विधान सभा सचिवालय और विधानसभा अध्यक्ष से जवाब तलब किया है।
न्यायमूर्ति आर एस चौहान और न्यायमूर्ति डी सी सामंत की अवकाश पीठ ने विधानसभा के पूर्व सूचना अधिकारी कर्मेश प्रताप सिंह द्वारा अधिवक्ता डॉ. चेत नारायण सिंह और बालकेश्वर श्रीवास्तव के माध्यम से दायर रिट याचिका पर यह आदेश पारित किया। 68 वर्षीय दुबे को भी मामले में प्रतिवादी बनाया गया है।
अदालत ने सभी उत्तरदाताओं को सुनवाई की अगली तारीख से पहले संक्षिप्त या विस्तृत जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया और आगे की कार्यवाही के लिए छह जुलाई, 2026 की तारीख तय की। पीठ ने टिप्पणी की कि इस मामले को निर्धारित तिथि पर एक ताजा मामले के रूप में माना जाएगा।
सुनवाई के दौरान विधानसभा सचिवालय और विधानसभा अध्यक्ष के वकील अभिनव त्रिवेदी ने याचिका की पोषणीयता को लेकर शुरुआती आपत्ति जताई।
उन्होंने दलील दी कि दुबे किसी ऐसे सार्वजनिक पद पर नहीं हैं जो ‘अधिकार पृच्छा’ जारी करने के लिए आवश्यक हो और वे संप्रभु कार्यों का निर्वहन नहीं करते हैं। साथ ही जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए समय मांगा गया।
याचिकाकर्ता के वकील नयी दिल्ली से ऑनलाइन माध्यम से पेश हुए और तत्काल सुनवाई का अनुरोध करते हुए दलील दी कि दुबे बिना किसी वैध अधिकार के पद पर बने हुए हैं और शक्तियों का प्रयोग कर रहे हैं। पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद पीठ ने प्रतिवादियों को अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया।
याचिका के अनुसार, 2009 में दुबे की नियुक्ति और उसके बाद सेवा विस्तार कथित तौर पर वैधानिक नियमों और संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन था।
याचिकाकर्ता ने दावा किया कि विधानसभा सचिवालय (भर्ती और सेवा की शर्तें) नियम, 1974 में संबंधित श्रेणी के पदों पर नियुक्ति के लिए 52 वर्ष की ऊपरी आयु सीमा निर्धारित की गई है, जबकि दुबे पहले ही वह आयु पार कर चुके थे।
याचिका में कहा गया कि दुबे ने 13 जनवरी 2009 को उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली और उसी दिन उन्हें प्रमुख सचिव (संसदीय कार्य) नियुक्त किया गया। इसमें आरोप लगाया कि छह दिन बाद 19 जनवरी 2009 को उन्हें विधान सभा सचिवालय के प्रमुख सचिव पद का प्रभार दे दिया गया।
याचिकाकर्ता ने आगे आरोप लगाया कि नियुक्ति प्रक्रिया बिना विज्ञापन, प्रतिस्पर्धी चयन, लोक सेवा आयोग के परामर्श या संवैधानिक प्रावधानों के तहत आवश्यक अनुमोदन के बिना की गई थी।
याचिका में सेवा नियमों में बाद के संशोधनों, सेवा के कथित विस्तार और दुबे के 65 वर्ष की आयु के बाद भी बने रहने पर भी सवाल उठाए गए हैं।
याचिका में अदालत से ‘अधिकार पृच्छा’ जारी करने का अनुरोध किया गया है, जिसमें किसी पद पर आसीन व्यक्तति को उस अधिकार का खुलासा करने का निर्देश दिया जाता है जिसके तहत वह पद पर बना हुआ है।
भाषा सं जफर धीरज
धीरज

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