उप्र : कुशीनगर में एक महीने के भीतर सर्पदंश के 492 मामले सामने आए

उप्र : कुशीनगर में एक महीने के भीतर सर्पदंश के 492 मामले सामने आए

उप्र : कुशीनगर में एक महीने के भीतर सर्पदंश के 492 मामले सामने आए
Modified Date: July 30, 2026 / 04:09 pm IST
Published Date: July 30, 2026 4:09 pm IST

कुशीनगर (उप्र), 30 जुलाई (भाषा) उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में बारिश के मौसम में सर्पदंश की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं और स्थानीय चिकित्सा महाविद्यालय में पिछले 30 दिनों में सर्पदंश के 492 मरीज भर्ती किए गए, जिनमें से नौ की मौत हो गयी।

चिकित्सकों का दावा है कि झाड़-फूंक के चक्कर में इलाज में देरी के कारण सर्पदंश के शिकार लोगों को समय से उपचार की सुविधा नहीं मिली, जिससे उनकी जान बचाई नहीं जा सकी।

सर्पदंश की शिकार ठाढ़ीभार की सरिता देवी, खिरकिया के 25-वर्षीय राजा हुसैन, जंगल नाहर छपरा के 55-वर्षीय नरेश गोंड, कोटवा की सीमा देवी और रामपुर राजा के 55-वर्षीय राम नारायण को उपचार के लिए ‘मेडिकल कॉलेज कुशीनगर’ में भर्ती कराया गया है।

वहीं, बुधवार को अस्पताल पहुंचे 22-वर्षीय सत्येंद्र सिंह की हालत गंभीर देख चिकित्सकों ने उन्हें गोरखपुर मेडिकल कालेज भेज दिया।

कुशीनगर मेडिकल कॉलेज के नवनियुक्त प्राचार्य डॉ. के. पी. गौड़ ने बताया कि अस्पताल में सर्पविष-रोधी (एएसवी) इंजेक्शन सहित आवश्यक दवाएं उपलब्ध हैं और विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में मरीजों का उपचार चल रहा है।

उन्होंने बताया कि मेडिकल कालेज में प्रतिदिन औसतन आठ से अधिक सर्पदंश पीड़ित उपचार के लिए पहुंच रहे हैं।

चिकित्सकों का कहना है कि सर्पदंश के बाद शुरुआती एक से दो घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं।

आपातकालीन सेवा प्रभारी पुष्कर पाठक ने बताया कि बीते 21 जून से 20 जुलाई तक सर्पदंश से पीड़ित 492 मरीज आए, जिनके उपचार में कुल 2300 एएसवी इस्तेमाल किये गये।

वरिष्ठ फिजिशियन डा. उपेंद्र चौधरी ने कहा कि सर्पदंश के शिकार भयभीत हो जाते हैं, जिसकी वजह से उन्हें घबराहट, बेचैनी, चक्कर और झनझनाहट महसूस होने लगती है।

उन्होंने यह भी कहा कि सदमे के कारण कई बार लोगों को दिल का दौरा पड़ जाता है। हालांकि, सर्पदंश के लगभग 90 प्रतिशत मामलों में सर्प जहरीले नहीं होते हैं और समय रहते एएसवी इंजेक्शन देने पर जान बच जाती है।

भाषा सं राजेंद्र सुरेश

सुरेश


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