उप्र : बहराइच में हाथी के हमले में बुजुर्ग महिला की मौत

उप्र : बहराइच में हाथी के हमले में बुजुर्ग महिला की मौत

उप्र : बहराइच में हाथी के हमले में बुजुर्ग महिला की मौत
Modified Date: March 22, 2026 / 07:16 pm IST
Published Date: March 22, 2026 7:16 pm IST

बहराइच, 22 मार्च (भाषा) उत्तर प्रदेश में बहराइच जिले के कतर्नियाघाट वन्यजीव अभयारण्य क्षेत्र के भवानीपुर गांव में रविवार सुबह जंगल के किनारे हाथी के हमले में एक बुजुर्ग महिला की मौत हो गई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

पिछले 36 दिनों में हाथी के हमले में किसी व्यक्ति की मौत की यह तीसरी घटना है, जिससे क्षेत्र के ग्रामीणों में दहशत का माहौल है।

कतर्नियाघाट वन्यजीव अभयारण्य के प्रभागीय वनाधिकारी अपूर्व दीक्षित ने बताया कि कतर्निया रेंज के भवानीपुर गांव की 80 वर्षीय कुवारिया देवी जंगल से सटे अपने खेत में बकरियां चरा रही थीं। इसी दौरान उनकी एक बकरी जंगल की ओर चली गई, जिसे खोजने के लिए वह जंगल की तरफ बढ़ीं। तभी जंगल से निकले एक हाथी ने उन पर हमला कर दिया और पैरों तले कुचल दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

स्थानीय लोगों के अनुसार महिला ने बचने के लिए शोर मचाया, जिसे सुनकर आसपास के खेतों में काम कर रहे लोग मौके पर पहुंचे लेकिन तब तक हाथी हमला कर चुका था। ग्रामीणों ने हांका लगाने की कोशिश की, लेकिन हाथी कुछ देर तक मौके पर डटा रहा और बाद में जंगल की ओर लौट गया।

ग्रामीणों ने बताया कि इसी हाथी ने रविवार सुबह गांव के एक किसान के खेत में घुसकर फसल को भी नुकसान पहुंचाया था।

घटना की सूचना मिलने पर वन विभाग और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची तथा शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।

प्रभागीय वनाधिकारी ने बताया कि मृतका के परिजनों को 10 हजार रुपये की तात्कालिक सहायता दी गई है, जबकि शासन द्वारा दी जाने वाली पांच लाख रुपये की मुआवजा राशि के लिए आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले 14 फरवरी को मिहींपुरवा-लखीमपुर मार्ग पर लखीमपुर निवासी 45 वर्षीय मुन्नी देवी को हाथी ने पटककर मार डाला था। इसके अगले दिन 15 फरवरी को कतर्निया रेंज के कारीकोट गांव में हाथी के हमले में 100 वर्ष से अधिक आयु के एक साधु की भी मौत हो गई थी।

लगातार हो रही ऐसी घटनाओं से क्षेत्र में भय का माहौल है और ग्रामीण वन विभाग से रोकथाम के प्रभावी उपाय करने की मांग कर रहे हैं।

भाषा

सं, सलीम रवि कांत


लेखक के बारे में