उप्र : काशी में मणिकर्णिका घाट पर चिता की भस्म से खेली गई होली

उप्र : काशी में मणिकर्णिका घाट पर चिता की भस्म से खेली गई होली

उप्र : काशी में मणिकर्णिका घाट पर चिता की भस्म से खेली गई होली
Modified Date: February 28, 2026 / 08:21 pm IST
Published Date: February 28, 2026 8:21 pm IST

वाराणसी, 28 फरवरी (भाषा) उत्तर प्रदेश में वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर रंगभरी एकादशी के दूसरे दिन शनिवार को चिता की भस्म से होली खेली गई।

कार्यक्रम के आयोजक गुलशन कपूर ने बताया कि सुबह से ही लोग चिता की भस्म से खेली जाने वाली दुनिया की दुर्लभ होली की तैयारी में जुटे हुए थे। जहां दुख व अपनों से बिछड़ने का संताप देखा जाता था, वहां आज के दिन शहनाई की मंगल ध्वनि बजती रही।

हर कोई अपने-अपने लिए उपयुक्त स्थान खोज कर इस दिव्य व अलौकिक दृश्य को अपनी अंतरात्मा में उतार कर शिवोहम होने को अधीर हुए जा रहे थे।

उन्होंने कहा कि संपूर्ण विश्व में काशी का मणिकर्णिका घाट ही एक ऐसा महा मसान है जहां दुःख नहीं उत्सव होते हैं। ये वो मंगल स्थान है, जहां लोग देह त्यागने आते है फिर भी जिनके किस्मत में होता हैं वहीं यहां देह त्याग पाता हैं।

गुलशन कपूर ने बताया कि मणिकर्णका घाट पर नव निर्माण कार्य के कारण अस्त-व्यस्त व्यवस्था के कारण शिव भक्तों को ललिता एवं सिंधिया घाट पर भारी पुलिस बल एवं अवरोधकों को पार कर मणिकर्णिका घाट जाने से रोका गया, जिससे उनको काफी निराशा हुई। हालांकि जो कुछ इंतजार कर पाए, उन्हें दो बजे के बाद बाबा महाश्मशान नाथ जी को भस्म अर्पित करने का सौभाग्य मिला।

कपूर ने कहा कि ऐसी मान्यता है कि बाबा दोपहर में मध्याह्न स्नान करने मणिकर्णिका तीर्थ पर आते हैं। तत्पश्चात सभी तीर्थ स्नान करके यहां से पुन्य लेकर अपने स्थान जाते हैं और उनके वहां स्नान करने वालों को वह पुन्य बांटते हैं।

बाबा स्नान के बाद अपने प्रिय गणों के साथ मणिकर्णिका घाट पर आकर चिता की भस्म से होली खेलते हैं। यह परंपरा अनादि काल से यहां भव्य रूप से मनायी जाती रही हैं।

गुलशन कपूर ने बताया कि पिछले 26 वर्षों से इस परंपरा को भव्य रूप देकर दुनिया के कोने-कोने तक जन सहयोग से पहुंचा पा रहा हैं।

गुलशन कपूर ने इस कार्यक्रम के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि काशी में यह मान्यता है कि रंगभरी एकादशी के दिन बाबा विश्वनाथ माता पार्वती का गौना (विदाई) करा कर अपने धाम काशी लाते हैं जिसे उत्सव के रूप में काशीवाशी मनाते हैं और इसे रंगों के त्योहार होली की शुरुआत माना जाता है।

इस आयोजन में गुलशन कपूर ने बाबा महाश्मशान नाथ और माता मशान काली (शिव शक्ति) का मध्याह्न आरती कर बाबा को जया, विजया, मिष्ठान व सोमरस का भोग लगाया। बाबा व माता को चिता की भस्म व गुलाल चढ़ाया, माता मशान काली को लाल गुलाल चढ़ा कर होली प्रारंभ की गयी।

भाषा

सं, आनन्द रवि कांत


लेखक के बारे में