वाराणसी नगर निगम सावन से पहले मांस, मछली की दुकानों को शहर की सीमा से बाहर स्थानांतरित करेगा

वाराणसी नगर निगम सावन से पहले मांस, मछली की दुकानों को शहर की सीमा से बाहर स्थानांतरित करेगा

वाराणसी नगर निगम सावन से पहले मांस, मछली की दुकानों को शहर की सीमा से बाहर स्थानांतरित करेगा
Modified Date: June 10, 2026 / 03:05 pm IST
Published Date: June 10, 2026 3:05 pm IST

वाराणसी (उप्र) 10 जून (भाषा) वाराणसी नगर निगम ने सावन के पवित्र महीने की शुरुआत से पहले सभी मांस, मछली और पोल्ट्री की दुकानों को शहर की सीमा के बाहर स्थानांतरित करने का फैसला किया है।

नगर निकाय के इस फैसले पर निवासियों, व्यापारियों और नेताओं ने मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है।

नगर निगम के जनसंपर्क अधिकारी संदीप श्रीवास्तव ने बुधवार को कहा कि शहर के भीतर लगभग 350 से 400 मांस, मछली और चिकन की दुकानें चल रही हैं और सावन शुरू होने से पहले उन सभी को बाहरी इलाके में निर्दिष्ट स्थानों पर स्थानांतरित कर दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि इस उद्देश्य के लिए पांच स्थलों रामनगर, सुजाबाद, गणेशपुर, अवलेशपुर और शिवपुर की पहचान की गई है।

श्रीवास्तव ने कहा कि मांस व्यापारियों को हर साल सावन के दौरान काफी नुकसान होता है क्योंकि इस अवधि के दौरान शहर के भीतर दुकानें आमतौर पर बंद रहती हैं।

जनसंपर्क अधिकारी ने कहा कि मांस की दुकानों को नगर निगम सीमा के बाहर स्थानांतरित करने से कारोबार का परिचालन जारी रखने और इस पेशे से जुड़े लोगों की आजीविका में व्यवधान उत्पन्न होने की आशंका दूर की जा सकेगी।

इस निर्णय पर लोगों ने मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है।

वाराणसी निवासी अजय शर्मा ने इस कदम का स्वागत किया और कहा कि भगवान विश्वनाथ के निवास के रूप में प्रतिष्ठित यह शहर भारत और विदेश से लाखों भक्तों को आकर्षित करता है।

शर्मा ने कहा, ‘‘हम नगर निगम प्रशासन और महापौर अशोक तिवारी के फैसले का स्वागत करते हैं। काशी बाबा विश्वनाथ की नगरी है और इससे करोड़ों भक्तों की भावनाएं जुड़ी हैं।’’

उन्होंने दावा किया कि दशकों तक शहर में महापौर पद पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के काबिज रहने के बावजूद पहले ऐसी कोई पहल नहीं की गई थी।

शर्मा ने शराब की दुकानों को काशी क्षेत्र से बाहर स्थानांतरित करने की भी मांग की और कहा कि ऐसे प्रतिष्ठान शहर के धार्मिक परिक्षेत्र में संचालित नहीं होने चाहिए।

हालांकि, कई निवासियों ने प्रस्तावित स्थानांतरण पर चिंता व्यक्त की।

बंगाली टोला निवासी सुब्रत मुखर्जी ने कहा कि मछली और मांस कई परिवारों के दैनिक आहार और धार्मिक परंपराओं का अभिन्न अंग हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारा परिवार लगभग हर दिन मछली खाता है। मछली और मांस खरीदने के लिए नियमित रूप से शहर से बाहर यात्रा करना व्यावहारिक नहीं होगा।’’

मुखर्जी ने सवाल किया कि प्रशासन मांस की दुकानों को क्यों निशाना बना रहा है जबकि शहर भर में शराब और नशे की दुकानें चल रही हैं।

मंडुआडीह के निवासी अनीश सिंह ने कहा कि इस कदम से हिंदू और मुस्लिम दोनों को असुविधा होगी।

उन्होंने कहा, ‘‘मांस की खपत किसी एक समुदाय तक ही सीमित नहीं है। लोग वर्तमान में स्थानीय बाजारों से मांस खरीदते हैं, लेकिन ऐसी खरीदारी के लिए लंबी दूरी की यात्रा करना मुश्किल होगा।’’

सिंह ने कहा कि इस निर्णय से उपभोक्ताओं के लिए लागत बढ़ने के साथ-साथ ऑनलाइन मांस वितरण व्यवसायों को लाभ हो सकता है।

जिला युवा कांग्रेस अध्यक्ष विकास सिंह ने कहा कि वाराणसी की स्वच्छता और सांस्कृतिक विरासत को बनाए रखना प्रत्येक निवासी की जिम्मेदारी है और उस उद्देश्य को प्राप्त करने के उद्देश्य से कोई भी कदम स्वागत योग्य है।

उन्होंने हालांकि कहा कि अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि व्यापारियों की आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े और पर्याप्त वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।

सिंह ने कहा, ‘‘अगर मांस की दुकानों को शहर के बाहर स्थानांतरित किया जा रहा है, तो काशी के धार्मिक और सांस्कृतिक चरित्र को संरक्षित करने के लिए शराब की दुकानों के लिए भी इसी तरह की नीति पर विचार किया जाना चाहिए।’’

मांस व्यापारी साहिल ने कहा कि दुकानों को बाहरी इलाके में स्थानांतरित करने से व्यापार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

उन्होंने कहा, ‘‘अगर दुकानें शहर के बाहर आवंटित की जाती हैं, तो हमारी बिक्री प्रभावित होगी क्योंकि कई ग्राहक खरीदारी करने के लिए इतनी लंबी दूरी की यात्रा नहीं कर पाएंगे। हम अपने नियमित ग्राहक खो सकते हैं, जिससे हमारे व्यवसाय को नुकसान होगा।’’

नगर निगम ने अभी तक स्थानांतरण प्रक्रिया की समयसीमा या वैकल्पिक स्थानों पर दुकानों के आवंटन के तौर-तरीकों की घोषणा नहीं की है।

भाषा सं जफर मनीषा धीरज

धीरज


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