आरएसएस के दिग्गज कार्यकर्ता ठाकुर राम सिंह आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे: जे.पी. नड्डा

आरएसएस के दिग्गज कार्यकर्ता ठाकुर राम सिंह आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे: जे.पी. नड्डा

आरएसएस के दिग्गज कार्यकर्ता ठाकुर राम सिंह आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे: जे.पी. नड्डा
Modified Date: February 15, 2026 / 08:06 pm IST
Published Date: February 15, 2026 8:06 pm IST

हमीरपुर (हिप्र), 15 फरवरी (भाषा) केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने रविवार को हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कार्यकर्ता ठाकुर राम सिंह की 111वीं जयंती के अवसर पर आयोजित एक समारोह में कहा कि वह एक ऐसी शख्सियत थे जो पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे।

नड्डा ने कहा कि हमीरपुर के नेरी स्थित अनुसंधान संस्थान भारत के इतिहास के दस्तावेजीकरण में सराहनीय सेवा प्रदान कर रहा है और उन्होंने संस्थान की स्थापना से ही इसके विकास के लिए ठाकुर राम सिंह को श्रेय दिया।

आधिकारिक बयान के अनुसार, इस अवसर पर उन्होंने ठाकुर राम सिंह की प्रतिमा का अनावरण किया। कार्यक्रम में संस्थान द्वारा एक प्रदर्शनी का आयोजन किया और कई पुस्तकों का विमोचन किया गया।

ठाकुर राम सिंह को याद करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘आज हम एक ऐसे व्यक्तित्व की जयंती मना रहे हैं जिनसे आने वाली पीढ़ियां प्रेरित होती रहेंगी।’’

इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि ठाकुर राम सिंह ने इतिहास के अध्ययन को एक नई दिशा दी और वृद्धावस्था में भी सांस्कृतिक संरक्षण के प्रति गहरी प्रतिबद्धता बनाए रखी।

धूमल ने कहा कि 88 वर्ष की उम्र में अनुसंधान संस्थान स्थापित करने का जो संकल्प उन्होंने लिया था, अब उसका फल मिल रहा है।

उन्होंने कहा, “ठाकुर राम सिंह ने न सिर्फ इतिहास पढ़ाया बल्कि उसे एक नई दिशा भी दी।”

आरएसएस के नेता सुरेश सोनी ने कहा कि ठाकुर राम सिंह के लेखन ने हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक चेतना को आकार देने में मदद की और ग्राम स्तर के इतिहास तथा लोक परंपराओं को उजागर किया।

कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रोफेसर ईश्वर शरण विश्वकर्मा ने कहा कि ठाकुर राम सिंह एक महान व्यक्ति थे, जिन्होंने अपना जीवन इतिहास को समर्पित कर दिया।

उन्होंने कहा, ‘‘उनके नेतृत्व में 1994, 1995 और 1996 में इतिहास संकलन के तीन प्रमुख सम्मेलन आयोजित किए गए थे।’’

भाषा यासिर संतोष

संतोष


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