युवा किताबें पढ़ना चाहते हैं, हमें उन तक किताबें पहुंचानी होंगी: मुख्यमंत्री योगी

युवा किताबें पढ़ना चाहते हैं, हमें उन तक किताबें पहुंचानी होंगी: मुख्यमंत्री योगी

युवा किताबें पढ़ना चाहते हैं, हमें उन तक किताबें पहुंचानी होंगी: मुख्यमंत्री योगी
Modified Date: September 12, 2026 / 03:30 pm IST
Published Date: September 12, 2026 3:30 pm IST

लखनऊ, 12 सितंबर (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को कहा कि आज के युवा किताबें पढ़ना चाहते हैं और हमें ऐसी व्यवस्था करनी होगी कि किताबें उन तक पहुंचें।

मुख्यमंत्री यहां लखनऊ विश्वविद्यालय में नौ दिवसीय पांचवें ‘गोमती पुस्तक महोत्सव’ की शुरुआत करने के बाद समारोह को संबोधित कर रहे थे।

यह पुस्तक मेला 20 सितंबर तक जारी रहेगा।

एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकारों की आलोचना करते हुए कहा कि बेसिक और माध्यमिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों की स्थिति पहले ऐसी थी कि उनके भवन और व्यवस्थाएं जर्जर नजर आती थीं।

उन्होंने कहा कि जब सरकारें ही जर्जर थीं तो ‘सिस्टम’ का जर्जर होना स्वाभाविक था।

मुख्यमंत्री ने युवाओं से अपनी जरूरत के अनुसार किताबें खरीदने और पढ़ने की आदत बनाने की अपील की।

उन्होंने युवाओं से अपना ‘बुक बैंक’ बनाने की अपील करते हुए कहा कि खाली समय में पुस्तक पढ़ने की आदत जीवन में नई दिशा दे सकती है।

योगी ने कहा कि हर बच्चे को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पुस्तक ‘एग्जाम वॉरियर्स’ जरूर पढ़नी और आत्मसात करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि ज्ञान को संकुचित दायरे में सीमित करने के दुष्परिणाम समाज और राष्ट्र, दोनों को भुगतने पड़ते हैं।

इससे पहले उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में लगी प्रदर्शनी का अवलोकन किया।

मुख्यमंत्री ने वहां मौजूद बच्चों को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पुस्तक ‘एग्जाम वॉरियर्स’ वितरित की।

मुख्यमंत्री ने कहा, “किसी व्यक्ति की तरह ही समाज और राष्ट्र भी तब बीमार होता है, जब उसकी क्षमता समाप्त होने लगती है और वह अपनी विरासत से दूरी बनाने लगता है।”

उन्होंने कहा, “पहले भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को संकुचित दायरे में बांधने का प्रयास किया गया, जिसके परिणाम सहने पड़े।”

योगी ने कहा, “उत्तर प्रदेश की धरती भारतीय ज्ञान परंपरा की महत्वपूर्ण केंद्र रही है। लखनऊ से करीब 70 किलोमीटर दूर नैमिषारण्य में ऋषियों ने चिंतन और ज्ञान की परंपरा को आगे बढ़ाया। काशी ज्ञान और संवाद की भूमि रही है। इसी प्रदेश के मुजफ्फरनगर स्थित शुक्रतीर्थ में करीब पांच हजार वर्ष पहले श्रीमद्भागवत महापुराण की पहली कथा के वाचन की परंपरा जुड़ी है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने ग्राम सचिवालय की व्यवस्था विकसित की और उसमें केवल प्रधान व ग्राम पंचायत अधिकारी के बैठने की व्यवस्था नहीं की, बल्कि ग्रामीणों के लिए कॉन्फ्रेंस रूम और ‘डिजिटल लाइब्रेरी’ भी बनाई।

उन्होंने कहा कि प्रदेश की 57,600 ग्राम पंचायतों में पुस्तकालय की व्यवस्था की गई है और इनमें नेशनल बुक ट्रस्ट की पुस्तकें उपलब्ध कराई गई हैं।

योगी ने कहा, “जब पहला पुस्तक मेला आयोजित हुआ था, तो मैंने कहा था कि गोरखपुर में भी ऐसा ही एक मेला आयोजित किया जाए। गोरखपुर के पुस्तक मेले में लोगों की संख्या लखनऊ से भी ज्यादा थी और लखनऊ की तुलना में वहां ज्यादा किताबें खरीदी गईं।”

उन्होंने कहा कि इसके नतीजों ने इस धारणा को पूरी तरह गलत साबित कर दिया कि आज के युवा किताबें नहीं पढ़ते।

योगी ने कहा, “असल में हमने किताबें उन तक पहुंचाने की कोशिश ही नहीं की थी।”

उन्होंने कहा, “यह कहना गलत होगा कि युवा सोशल मीडिया पर बहुत ज्यादा समय बिताते हैं। वे किताबें पढ़ना चाहते हैं और हमें उन तक किताबें पहुंचाने की व्यवस्था करनी होगी।”

समारोह को प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय, माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गुलाब देवी और बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने भी संबोधित किया।

इस मौके पर लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर जेपी सैनी, नेशनल बुक ट्रस्ट के चेयरमैन प्रो. मिलिंद सुधाकर मराठे, निदेशक युवराज मलिक समेत कई प्रमुख लोग मौजूद थे।

भाषा आनन्‍द जितेंद्र

जितेंद्र


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