सर्दियों की अपेक्षाकृत गर्म शुरुआत अमेरिका में तूफान की तीव्रता बढ़ाने में मददगार हुई
सर्दियों की अपेक्षाकृत गर्म शुरुआत अमेरिका में तूफान की तीव्रता बढ़ाने में मददगार हुई
( मैथ्यू बार्लो, यूमास लॉवेल एवं ज्यूडा कोहेन – मैसाच्युसेट्स इन्स्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी )
बोस्टन, 26 जनवरी (द कन्वरसेशन) अमेरिका के मध्य और पूर्वी हिस्सों में आया भीषण शीतकालीन तूफान टेक्सास से न्यू इंग्लैंड तक कई राज्यों को प्रभावित कर रहा है। भारी बर्फबारी, ओले और बारिश के कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कई राज्यों में आपातकाल घोषित कर दिया गया है, जबकि मौसम विभाग ने खतरनाक ठंड, बाधित यातायात और बिजली आपूर्ति ठप होने की चेतावनी दी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सर्दियों की अपेक्षाकृत गर्म शुरुआत के बाद अचानक आई ठंड कई लोगों के लिए चौंकाने वाली है, लेकिन यही गर्मी इस तूफान की तीव्रता बढ़ाने में सहायक भी बनी। मौसम और जलवायु वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसे भीषण शीतकालीन तूफान कई कारकों के एक साथ सक्रिय होने से बनते हैं।
आमतौर पर शीतकालीन तूफान तब विकसित होते हैं जब सतह के पास गर्म और ठंडी हवाओं के बीच तापमान में अंतर हो और ‘जेट स्ट्रीम’ दक्षिण की ओर झुक जाए। इस बार उत्तर से आई मजबूत आर्कटिक ठंडी हवा ने दक्षिण की गर्म हवा के साथ ऐसा ही तापमान अंतर पैदा किया। ‘जेट स्ट्रीम’ में मौजूद कई व्यवधानों ने वर्षा के अनुकूल परिस्थितियां बनाईं और तूफान को मेक्सिको की खाड़ी के असामान्य रूप से गर्म पानी से बड़ी मात्रा में नमी मिली।
वैज्ञानिकों ने इस तूफान में ‘पोलर वॉर्टेक्स’ की भूमिका को भी अहम बताया है। ‘पोलर वॉर्टेक्स’ उत्तरी ध्रुव के चारों ओर तेज गति से घूमने वाली ठंडी हवाओं की प्रणाली है, जो वायुमंडल की ऊपरी परत ‘स्ट्रैटोस्फियर’ में स्थित होती है। सामान्य तौर पर यह ध्रुव के पास सीमित रहती है, लेकिन कभी-कभी यह दक्षिण की ओर खिसक जाती है।
जब ‘पोलर वॉर्टेक्स’ अमेरिका के ऊपर ‘जेट स्ट्रीम’ के साथ मेल खाता है, तो इससे ‘जेट स्ट्रीम’ में उत्तर-दक्षिण दिशा में अत्यधिक उतार-चढ़ाव बढ़ जाता है। इससे ठंडी हवा सतह तक तेजी से पहुंचती है और भारी बर्फबारी व कड़ाके की ठंड के हालात बनते हैं। जनवरी 2026 के इस तूफान के दौरान ‘पोलर वॉर्टेक्स’ और ‘जेट स्ट्रीम’ का ऐसा ही मजबूत मेल देखा गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही पृथ्वी समग्र रूप से गर्म हो रही है और औसतन बर्फबारी घट रही है, इसका मतलब यह नहीं कि गंभीर शीतकालीन तूफान समाप्त हो जाएंगे। कुछ शोध बताते हैं कि जलवायु परिवर्तन के कारण ठंड की घटनाएं कम हो सकती हैं, लेकिन जब वे होंगी, तो उनकी तीव्रता बनी रह सकती है।
इसके अलावा, महासागरों के गर्म होने से वाष्पीकरण बढ़ता है और वातावरण में अधिक नमी उपलब्ध होती है। यह नमी तूफानों को अतिरिक्त ऊर्जा देती है, जिससे वे और अधिक शक्तिशाली बन सकते हैं। वहीं, तापमान के अंतर में कमी कुछ स्थितियों में तूफानों को कमजोर भी कर सकती है, जिससे भविष्य के रुझानों का आकलन जटिल हो जाता है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि बदलते जलवायु परिदृश्य में सबसे तीव्र शीतकालीन तूफानों के और अधिक शक्तिशाली होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। साथ ही, बर्फ के बजाय जमाव वाली बारिश और ओले गिरने की घटनाएं बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
(द कन्वरसेशन)
मनीषा अविनाश
अविनाश


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