एक ऐसा टीका जो कैंसर को शुरू होने से पहले ही रोक सकता है, लेकिन इसे जल्दी लगवाना क्यों जरूरी है

एक ऐसा टीका जो कैंसर को शुरू होने से पहले ही रोक सकता है, लेकिन इसे जल्दी लगवाना क्यों जरूरी है

एक ऐसा टीका जो कैंसर को शुरू होने से पहले ही रोक सकता है, लेकिन इसे जल्दी लगवाना क्यों जरूरी है
Modified Date: March 18, 2026 / 05:02 pm IST
Published Date: March 18, 2026 5:02 pm IST

(जियाओ लेई और शिकियांग वू, करोलिंस्का संस्थान)

सोलना (स्वीडन), 18 मार्च (द कन्वरसेशन) जब 12 साल के बच्चों को स्कूल की नर्स से एचपीवी टीके के बारे में पत्र मिलता है, तो उनकी प्रतिक्रिया अक्सर मिली-जुली होती है। कुछ छात्र सुई से डरते हैं, जबकि अन्य सोचते हैं कि उन्हें ऐसी चीज के लिए टीका क्यों लगवाना चाहिए जिसके बारे में उन्होंने कभी सुना ही नहीं है।

उनमें से कई लोग शायद यह नहीं जानते होंगे कि यह नियमित स्कूल टीकाकरण एक ऐसे वायरस से सुरक्षा प्रदान करता है जो बाद में जीवन में कैंसर का कारण बन सकता है। कई छात्रों को जब यह पत्र पहली बार मिलता है तब वे इस विचार से रूबरू होते हैं कि एक टीका कैंसर को शुरू होने से पहले ही रोकने में मदद कर सकता है।

टीके से मिलने वाली सुरक्षा के प्रमाण अब स्पष्ट होते जा रहे हैं। हमारे हालिया अध्ययन में, हमने लगभग दो दशकों तक लड़कियों और युवतियों के दीर्घकालिक स्वास्थ्य आंकड़ों का विश्लेषण किया और पाया कि एचपीवी टीका गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर के जोखिम को काफी हद तक कम कर देता है।

यह महत्वपूर्ण है क्योंकि गर्भाशय कैंसर, जिसे काफी हद तक रोका जा सकता है, दुनिया भर में महिलाओं को प्रभावित करने वाले सबसे आम कैंसरों में से एक बना हुआ है। महत्वपूर्ण बात यह है कि समय के साथ इससे मिलने वाली सुरक्षा कमजोर नहीं होती है।

ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) दुनिया के सबसे आम वायरस में से एक है। अधिकतर लोग अपने जीवन में कभी न कभी इससे संक्रमित हो जाते हैं और अक्सर उन्हें इसके संक्रमण का पता भी नहीं चलता। कई मामलों में, शरीर इस वायरस को प्राकृतिक रूप से खत्म कर देता है। लेकिन एचपीवी के कुछ प्रकार शरीर में वर्षों तक रह सकते हैं और धीरे-धीरे कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं तथा समय के साथ, यह कैंसर का कारण बन सकता है।

एचपीवी टीका कैंसर से कैसे बचाव करता है : एचपीवी पुरुषों और महिलाओं दोनों में कई तरह के कैंसर का कारण बन सकता है। चूंकि, ये कैंसर अक्सर संक्रमण के कई वर्षों बाद यानी आमतौर पर धीरे-धीरे विकसित होते हैं इसलिए वायरस को शुरुआती दौर में ही रोकना इसकी रोकथाम का सबसे प्रभावी तरीका है। एचपीवी टीके को ठीक इसी उद्देश्य से बनाया गया है।

वास्तविक जीवन में टीका कितना कारगर है, यह समझने के लिए हमने स्वीडन में 9,26,362 लड़कियों और युवतियों पर 18 वर्षों तक एक राष्ट्रव्यापी अध्ययन किया। इनमें से कुछ को एचपीवी टीका लगा था, जबकि अन्य को नहीं लगा था।

समय बीतने के साथ, जिन लोगों को टीका लगाया गया था, उनमें गर्भाशय ग्रीवा कैंसर से पीड़ित होने वाले लोगों की संख्या उनकी तुलना में काफी कम थी जिन्हें टीका नहीं लगाया गया था।

हमने यह भी पाया कि टीकाकरण की उम्र मायने रखती है क्योंकि जिन लड़कियों को 17 वर्ष की आयु से पहले टीका लगाया गया था, उनमें बाद में गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर होने की संभावना बहुत कम थी।

वास्तव में, ऐसी लड़कियों में कैंसर का जोखिम उन लड़कियों की तुलना में लगभग चार गुना कम था जिन्हें टीका नहीं लगाया गया था। जिन लड़कियों-युवतियों को बाद में टीका लगाया गया, उन्हें भी काफी हद तक सुरक्षा मिली।

टीकों के बारे में एक आम सवाल यह है कि क्या समय के साथ उनका सुरक्षात्मक प्रभाव कम हो जाता है। हमारे अध्ययन के परिणाम आश्वस्त करने वाले हैं।

हमने टीकाकरण के बाद 18 वर्षों तक प्रतिभागियों का अनुसरण किया और समय के साथ सुरक्षात्मक प्रभाव में कमी का कोई प्रमाण नहीं मिला।

(द कन्वरसेशन) शफीक नरेश

नरेश


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