क्या मांसाहारी लोगों के 100 साल तक जीने की संभावना मांस न खाने वालों की तुलना में अधिक होती है

क्या मांसाहारी लोगों के 100 साल तक जीने की संभावना मांस न खाने वालों की तुलना में अधिक होती है

क्या मांसाहारी लोगों के 100 साल तक जीने की संभावना मांस न खाने वालों की तुलना में अधिक होती है
Modified Date: January 25, 2026 / 06:08 pm IST
Published Date: January 25, 2026 6:08 pm IST

(क्लोई केसी द्वारा, बोर्नमाउथ विश्वविद्यालय)

बोर्नमाउथ, 25 जनवरी (द कन्वरसेशन) हाल में हुए एक अध्ययन के अनुसार मांस न खाने वाले लोगों के 100 वर्ष की आयु तक पहुंचने की संभावना मांस खाने वालों की तुलना में कम हो सकती है। लेकिन शाकाहारी आहार पर पुनर्विचार करने से पहले, इन निष्कर्षों के और भी कई पहलू हैं।

इस शोध में 80 वर्ष और इससे अधिक आयु के 5,000 से अधिक चीनी वयस्कों पर नजर रखी गई, जिन्होंने ‘चाइनीज लॉन्गिट्यूडिनल हेल्दी लॉन्गेविटी सर्वे’ में हिस्सा लिया था। यह एक राष्ट्रीय स्तर का अध्ययन है जो 1998 में शुरू हुआ था। वर्ष 2018 तक, मांस रहित आहार का पालन करने वालों में मांसाहारी लोगों की तुलना में शतायु होने की संभावना कम थी।

हालांकि धरातल पर यह दशकों के शोध के विपरीत प्रतीत होता है जो दर्शाता है कि शाकाहारी आहार स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है। उदाहरण के लिए, शाकाहारी आहार को हृदय रोग, स्ट्रोक, टाइप 2 मधुमेह और मोटापे के कम जोखिम से लगातार जोड़ा गया है। ये फायदे आंशिक रूप से अधिक फाइबर सेवन और कम वसा सेवन से प्राप्त होते हैं।

तो आखिर चल क्या रहा है? कोई भी ठोस निष्कर्ष निकालने से पहले, कई महत्वपूर्ण कारकों पर विचार करना आवश्यक है।

उम्र बढ़ने के साथ आपके शरीर की जरूरतें बदल जाती हैं।

इस अध्ययन में 80 वर्ष और उससे अधिक आयु के वयस्कों पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिनकी पोषण संबंधी आवश्यकताएं युवा लोगों से काफी भिन्न होती हैं। उम्र बढ़ने के साथ-साथ, शारीरिक बदलावों से हमारे खाने की मात्रा और आवश्यक पोषक तत्वों दोनों में बदलाव आता है। ऊर्जा की खपत कम हो जाती है, जबकि मांसपेशियों का द्रव्यमान, हड्डियों का घनत्व और भूख अक्सर घटने लगती है। इन बदलावों से कुपोषण और दुर्बलता का खतरा बढ़ जाता है।

मांस रहित आहार के स्वास्थ्य लाभों के ज्यादातर प्रमाण युवा वयस्कों पर किए गए अध्ययनों से प्राप्त होते हैं, न कि दुर्बल वृद्ध आबादी से। कुछ शोध से पता चलता है कि कम कैल्शियम और प्रोटीन सेवन के कारण मांस न खाने वाले वृद्धों में ‘फ्रैक्चर’ का खतरा अधिक होता है।

बढ़ती उम्र में पोषण संबंधी प्राथमिकताएं बदल जाती हैं। दीर्घकालिक बीमारियों की रोकथाम पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, लक्ष्य मांसपेशियों को बनाए रखना, वजन घटने से रोकना और यह सुनिश्चित करना बन जाता है कि प्रत्येक निवाले में भरपूर पोषक तत्व हों।

यहां एक महत्वपूर्ण बात यह है कि मांस न खाने वालों में 100 वर्ष की आयु तक पहुंचने की कम संभावना केवल कम वजन वाले प्रतिभागियों में ही देखी गई। स्वस्थ वजन वाले वृद्ध वयस्कों में ऐसा कोई संबंध नहीं पाया गया।

वृद्धावस्था में कम वजन होना दुर्बलता और मृत्यु के बढ़ते जोखिम से स्पष्ट रूप से जुड़ा हुआ है। अतः शरीर का वजन इन निष्कर्षों की व्याख्या करने में एक महत्वपूर्ण कारक प्रतीत होता है।

यह बात भी याद रखना महत्वपूर्ण है कि यह एक अवलोकन अध्ययन था, जिसका अर्थ है कि यह कारण और प्रभाव के बजाय संबंधों को दर्शाता है। केवल इसलिए कि दो चीजें एक साथ घटित होती हैं, इसका मतलब यह नहीं है कि एक दूसरे का कारण है।

मांसाहारी न होने वाले लोगों में 100 तक पहुंचने की कम संभावना उन लोगों में स्पष्ट नहीं थी जो अपने आहार में मछली, दूध या अंडे शामिल करते थे।

ये खाद्य पदार्थ मांसपेशियों और हड्डियों के स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करते हैं, जिनमें उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन, विटामिन बी12, कैल्शियम और विटामिन डी शामिल हैं।

इन आहारों का पालन करने वाले वृद्ध वयस्कों की 100 वर्ष की आयु तक जीवित रहने की संभावना मांसाहारी लोगों के समान ही थी।

किसी एक आहार को दूसरे से सार्वभौमिक रूप से बेहतर बताने के बजाय, मुख्य संदेश यह है कि पोषण को जीवन के आपके चरण के अनुसार ढालना चाहिए। उम्र के साथ ऊर्जा की आवश्यकता कम हो जाती है (आराम के समय ऊर्जा व्यय में कमी के कारण), लेकिन कुछ पोषक तत्वों की आवश्यकता बढ़ जाती है।

वृद्ध व्यक्तियों को भी पर्याप्त प्रोटीन, विटामिन बी12, कैल्शियम और विटामिन डी की आवश्यकता होती है – विशेष रूप से मांसपेशियों को बनाए रखने और कमजोरी को रोकने के लिए। वृद्धावस्था में, कुपोषण और वजन घटने से बचाव अक्सर दीर्घकालिक गंभीर बीमारियों की रोकथाम से अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है।

कुल मिलाकर, 90 वर्ष की आयु में हमारी पोषण संबंधी जरूरतें 50 वर्ष की आयु से बहुत अलग हो सकती हैं और आहार संबंधी सलाह जीवनकाल में होने वाले इन परिवर्तनों को ध्यान में रखते हुए दी जानी चाहिए। जो चीजें अभी आपके लिए कारगर हैं, उम्र बढ़ने के साथ उनमें बदलाव की आवश्यकता हो सकती है और यह बिल्कुल सामान्य बात है।

(द कन्वरसेशन)

देवेंद्र नरेश

नरेश


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