Padma Awards 2026: सोना घाटी में जल क्रांति.. गौ-संरक्षण और ग्रामीण विकास के अनेक काम, MP के मोहन नागर को अब मिलेगा पद्मश्री पुरस्कार, जानिए उनकी खासियत

केंद्र सरकार ने गणतंत्र दिवस से पहले पद्म श्री पुरस्कार 2026 की घोषणा की है। मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के पर्यावरण कार्यकर्ता मोहन नागर को जल संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और ग्रामीण विकास में उल्लेखनीय योगदान के लिए इस प्रतिष्ठित सम्मान से नवाज़ा जाएगा।

Padma Awards 2026: सोना घाटी में जल क्रांति.. गौ-संरक्षण और ग्रामीण विकास के अनेक काम, MP के मोहन नागर को अब मिलेगा पद्मश्री पुरस्कार, जानिए उनकी खासियत

Padma Awards 2026/ Image Source : ANI

Modified Date: January 25, 2026 / 06:14 pm IST
Published Date: January 25, 2026 5:42 pm IST
HIGHLIGHTS
  • बैतूल जिले के पर्यावरण कार्यकर्ता मोहन नागर को पद्म श्री 2026 से सम्मानित किया जाएगा।
  • सोना घाटी में जल संरक्षण और ‘गंगा अवतरण अभियान’ से मिली राष्ट्रीय पहचान।
  • जल संरक्षण के साथ जैविक कृषि, गो-संरक्षण और ग्रामीण विकास में भी योगदान।

नई दिल्लीः केंद्र सरकार ने गणतंत्र दिवस से पहले 2026 के लिए पद्म पुरस्कारों की घोषणा कर दी गई है। इस बार देश के 45 हस्तियों को पद्मश्री पुरस्कार दिया जाएगा।  Padma Shri 2026 इसमें मध्यप्रदेश के तीन नाम भी शामिल है। मध्यप्रदेश के भगवान दास रैकवार को राई नृत्य यानी कला के क्षेत्र में, बैतूल जिले के मोहन नागर को शिक्षा के क्षेत्र में और कैलाश चंद्र पंत को साहित्य के क्षेत्र में यह पुरस्कार प्रदान किया गया है।

बैतूल जिले के सक्रिय और जमीनी स्तर पर कार्यरत पर्यावरण कार्यकर्ता मोहन नागर को वर्ष 2026 के पद्मश्री सम्मान से नवाज़े जाने की घोषणा से प्रदेश में हर्ष का माहौल है। 23 फरवरी 1968 को जन्मे मोहन नागर, स्व. भवरलाल नागर एवं स्व. गुलाबदेवी नागर के सुपुत्र हैं। उन्होंने विक्रम यूनिवर्सिटी, उज्जैन से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त की। वर्तमान में वे बैतूल स्थित भारत भारती आवासीय विद्यालय परिसर में निवासरत हैं।

सोना घाटी में जल क्रांति

मोहन नागर ने बैतूल जिले की सोना घाटी में वर्षाजल संचयन और जल संरचनाओं के निर्माण के माध्यम से प्राकृतिक जल चक्र को पुनर्जीवित करने का उल्लेखनीय कार्य किया। Betul News, सूखते जल स्रोतों और गिरते भू-जल स्तर से जूझ रहे क्षेत्रों में उनके प्रयासों से जल उपलब्धता बढ़ी, जिससे खेती और ग्रामीण आजीविका को भी संबल मिला। उनके कार्यों का सकारात्मक प्रभाव यह रहा कि स्थानीय लोग स्वयं जल संरक्षण की पहल से जुड़ने लगे। नागर द्वारा प्रारंभ किया गया ‘गंगा अवतरण अभियान’ पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक जनआंदोलन के रूप में उभरा। इस अभियान के तहत वैज्ञानिक और पारंपरिक जल संरक्षण तकनीकों को जनभागीदारी के साथ लागू किया गया। तालाबों और नालों का पुनर्जीवन, वर्षाजल संग्रहण, जल संरचनाओं का निर्माण और व्यापक जनजागरूकता इसके प्रमुख आयाम रहे हैं।

समग्र दृष्टि से पर्यावरण संरक्षण

जल संरक्षण के साथ-साथ मोहन नागर ने जैविक कृषि, गो-संरक्षण और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य किए हैं। Republic Day Honours उनका मानना है कि पर्यावरण संरक्षण केवल प्रकृति तक सीमित नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पशुधन संरक्षण और सामाजिक संतुलन से गहराई से जुड़ा हुआ है। इसी सोच के तहत उन्होंने किसानों, युवाओं और स्वयंसेवी संगठनों को पर्यावरणीय गतिविधियों से जोड़ा।

अनेक सम्मानों से हो चुके हैं अलंकृत

मोहन नागर के कार्यों को राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर कई प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें वर्ष 2019 में राष्ट्रीय ‘जल प्रहरी’ सम्मान, 2020 में जल शक्ति मंत्रालय द्वारा ‘वाटर हीरो’ सम्मान, मध्यप्रदेश सरकार का ‘गोपाल पुरस्कार’, भाऊराव देवरस राष्ट्रीय पुरस्कार तथा काव्य कृति ‘चातुर्मास’ के लिए दुष्यंत कुमार साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त हुआ है।

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