ईरान में मिनाब के बालिका विद्यालय पर हमले ने उठाए अंतरराष्ट्रीय कानून की प्रासंगिकता पर सवाल
ईरान में मिनाब के बालिका विद्यालय पर हमले ने उठाए अंतरराष्ट्रीय कानून की प्रासंगिकता पर सवाल
( शैनन बॉश, एडिथ कोवन यूनिवर्सिटी )
जोंडालुप, तीन मार्च (द कन्वरसेशन) अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर संयुक्त सैन्य कार्रवाई शुरू किए जाने के बाद दक्षिणी शहर मिनाब में शजराह तैय्यबेह बालिका प्राथमिक विद्यालय पर हमले की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय कानून की प्रासंगिकता पर नई बहस छेड़ दी है।
खबरों के अनुसार, हमले के समय विद्यालय में बड़ी संख्या में छात्राएं मौजूद थीं। ईरानी अधिकारियों ने दावा किया है कि इस घटना में 150 से अधिक लोगों की मौत हुई, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं, जबकि 60 अन्य घायल हुए हैं। इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया द्वारा सत्यापित वीडियो में बचावकर्मियों को मलबे में तलाश करते, स्कूल बैग निकालते और दीवारों पर जलने के निशान देखे जा सकते हैं।
अमेरिकी अखबार ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ का कहना है कि उसने ऐसे वीडियो सत्यापित किए हैं जिनमें विद्यालय के पास इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) का एक नौसैनिक अड्डा और उस अड्डे पर हमले के दृश्य दिखाई देते हैं।
संयुक्त राष्ट्र में ईरान के प्रतिनिधियों ने इसे नागरिक बुनियादी ढांचे को जानबूझकर निशाना बनाने का मामला बताते हुए युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराध करार दिया है।
अमेरिका और इज़राइल ने सार्वजनिक रूप से विद्यालय को निशाना बनाने की पुष्टि नहीं की है। अमेरिकी सैन्य कमान ‘सेंटकॉम’ ने कहा कि नागरिकों को हुए संभावित नुकसान की रिपोर्टों को गंभीरता से लिया जा रहा है और जांच की जा रही है। उसने कहा कि नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और अनपेक्षित क्षति को न्यूनतम करने के लिए सभी एहतियाती कदम उठाए जाते हैं।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि सशस्त्र संघर्ष की स्थिति में अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून लागू होता है, जो ‘भेद’, ‘अनुपातिकता’ और ‘सैन्य आवश्यकता’ जैसे सिद्धांतों पर आधारित है। इन सिद्धांतों के तहत केवल सैन्य ठिकानों और लड़ाकों को निशाना बनाया जा सकता है, जबकि स्कूल, अस्पताल और सार्वजनिक परिवहन जैसे नागरिक ढांचे संरक्षित माने जाते हैं। किसी लक्ष्य की प्रकृति को लेकर संदेह होने पर उसे असैन्य माना जाना चाहिए।
हालांकि, यदि कोई नागरिक भवन सैन्य उपयोग में लाया जा रहा हो, तो वह अपनी संरक्षित स्थिति खो सकता है। अब तक ऐसा कोई प्रमाण सामने नहीं आया है कि मिनाब का विद्यालय सैन्य प्रयोजनों के लिए इस्तेमाल हो रहा था।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि विद्यालय पास के सैन्य ठिकाने पर हमले के दौरान ‘अनपेक्षित क्षति’ का शिकार हुआ हो, तब भी हमले की वैधता इस बात पर निर्भर करेगी कि अपेक्षित सैन्य लाभ की तुलना में नागरिकों को हुआ नुकसान अत्यधिक तो नहीं था। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि क्या सैन्य कमांडरों ने संभावित नागरिक क्षति को कम करने के लिए सभी सावधानियां बरती थीं?
हाल के वर्षों में कई देशों द्वारा अंतरराष्ट्रीय नियमों की अनदेखी करने के बावजूद विशेषज्ञ मानते हैं कि अंतरराष्ट्रीय कानून अप्रासंगिक नहीं हुआ है। उनका तर्क है कि उल्लंघन स्वयं इस बात का प्रमाण हैं कि नियम मौजूद हैं और उन्हें परखा व चुनौती दी जा सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जांच में सिद्ध होता है कि मिनाब के विद्यालय पर हमला अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के सिद्धांतों का उल्लंघन था, तो यह कानून की विफलता नहीं बल्कि उसकी आवश्यकता को रेखांकित करेगा। उनका कहना है कि बालिका विद्यालय का मलबा यह याद दिलाता है कि संघर्ष के समय भी नियमों का पालन क्यों अनिवार्य है ?
( द कन्वरसेशन )
मनीषा वैभव
वैभव

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