बांग्लादेश में 2024 के जनविद्रोह मामले में तीन पत्रकारों को मुकदमे तक जेल में रखने का आदेश

बांग्लादेश में 2024 के जनविद्रोह मामले में तीन पत्रकारों को मुकदमे तक जेल में रखने का आदेश

बांग्लादेश में 2024 के जनविद्रोह मामले में तीन पत्रकारों को मुकदमे तक जेल में रखने का आदेश
Modified Date: August 24, 2026 / 05:32 pm IST
Published Date: August 24, 2026 5:32 pm IST

ढाका, 24 अगस्त (एपी) बांग्लादेश की राजधानी ढाका में एक विशेष न्यायाधिकरण ने सोमवार को अधिकारियों को तीन पत्रकारों को 2024 में हुए उस जनविद्रोह से जुड़े मामले में मुकदमा चलने तक जेल में रखने का आदेश दिया, जिसके चलते तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से हटना पड़ा था। वकीलों ने यह जानकारी दी।

छात्रों के नेतृत्व में हुए इस जनविद्रोह के दौरान सैकड़ों लोग मारे गए थे। बाद में हसीना को मानवता के खिलाफ अपराध के आरोपों में मौत की सजा सुनाई गई। वह दो साल पहले भारत चली गई थीं और उनकी गैरमौजूदगी में मुकदमा चलाया गया।

न्यायाधिकरण ने निजी टीवी चैनल ‘एकात्तर टेलीविजन’ के प्रधान संपादक मोजम्मेल बाबू, उसकी प्रधान संवाददाता फरजाना रूपा और दैनिक ‘भोरेर कागोज’ के संपादक एवं ढाका नेशनल प्रेस क्लब के पूर्व महासचिव श्यामल दत्ता को जेल में रखने का आदेश दिया।

तीनों पत्रकार सोमवार को न्यायाधिकरण के समक्ष पेश हुए। न्यायाधीश ने अगली सुनवाई के लिए 25 अक्टूबर की तारीख तय की और जांचकर्ताओं को पत्रकारों के खिलाफ अपनी रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया।

वैश्विक मानवाधिकार संगठनों ने पत्रकारों को जेल में रखे जाने और उन्हें जमानत नहीं दिए जाने की आलोचना की है। उन्होंने सरकार से उनके खिलाफ आरोप वापस लेने और समाचार रिपोर्टिंग को अपराध की श्रेणी में डालने से रोकने का आग्रह किया है।

अभियोजन पक्ष का आरोप है कि जनविद्रोह के दौरान तीनों पत्रकारों ने छात्र प्रदर्शनकारियों के दमन के लिए उकसाया था। अभियोजन के अनुसार, 14 जुलाई, 2024 को एक संवाददाता सम्मेलन में पत्रकारों ने हसीना से उकसाने वाले सवाल पूछे थे, जिसके बाद उन्होंने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित रूप से अपमानजनक टिप्पणियां कीं और बाद में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ खूनी कार्रवाई शुरू हुई, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए।

हसीना के सत्ता से हटने के बाद से तीनों पत्रकार हिरासत में हैं। उन पर जुलाई-अगस्त 2024 के जनविद्रोह से जुड़े हत्या समेत विभिन्न आरोप हैं।

उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान गिरफ्तार किया गया था। यूनुस ने फरवरी में सत्ता एक नई सरकार को सौंप दी थी।

पत्रकारों के परिवारों ने आरोप लगाया है कि उन्हें अवैध रूप से हिरासत में रखा गया।

पत्रकारों की सुरक्षा के लिए काम करने वाली समिति (सीपीजे) के एशिया-प्रशांत कार्यक्रम समन्वयक कुणाल मजूमदार ने इस महीने की शुरुआत में एक बयान में कहा था कि केवल एक संवाददाता सम्मेलन में सवाल पूछने के लिए श्यामल दत्ता, मोजम्मेल बाबू और फरजाना रूपा के खिलाफ मानवता के खिलाफ अपराध का मामला चलाना ‘‘आक्रोशजनक और बेहद चिंताजनक’’ है।

हसीना पांच अगस्त, 2024 से भारत में हैं, हालांकि उन्होंने हाल में कहा था कि वह दिसंबर में बांग्लादेश लौटेंगी।

भाषा मनीषा माधव

माधव


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