ताकाइची की ताइवान टिप्पणी से बिगड़े संबंध सुधारने चीन पहुंचे जापानी सांसद
ताकाइची की ताइवान टिप्पणी से बिगड़े संबंध सुधारने चीन पहुंचे जापानी सांसद
तोक्यो, 24 अगस्त (एपी) जापान के विभिन्न दलों के सांसदों का एक समूह सोमवार को चीन के लिए रवाना हुआ और उनकी यात्रा का उद्देश्य प्रधानमंत्री साने ताकाइची की ताइवान संबंधी टिप्पणी के बाद दोनों देशों के बीच बिगड़े संबंधों को सुधारने के प्रयास करना है।
ताकाइची की टिप्पणी से चीन नाराज हुआ था और दोनों देशों के बीच तनाव का असर आर्थिक क्षेत्र पर भी पड़ा है।
चीन गए प्रतिनिधिमंडल में ताकाइची की सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद और पूर्व उप स्वास्थ्य एवं कल्याण मंत्री गाकु हाशिमोतो के अलावा कोमेइतो और विपक्षी सेंट्रिस्ट रिफॉर्म एलायंस के एक-एक सांसद शामिल हैं। यह दल बृहस्पतिवार तक चीन में रहेगा और इस दौरान चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के अधिकारियों से मुलाकात करेगा।
‘सेंट्रिस्ट रिफॉर्म एलायंस’ के प्रवक्ता शिनिची इसा ने तोक्यो के हानेदा हवाई अड्डे से रवाना होने से पहले संवाददाताओं से कहा, ‘‘सभी क्षेत्रों में संवाद बंद हो गया है और अब हम कई क्षेत्रों में इसका असर देखना शुरू कर रहे हैं। मुझे उम्मीद है कि हम किसी तरह बातचीत फिर शुरू करने का रास्ता तलाश पाएंगे।’’
पद संभालने के कुछ ही समय बाद ताकाइची ने कहा था कि चीन का ताइवान पर हमला जापान के लिए ‘‘अस्तित्व का खतरा पैदा करने वाली स्थिति’’ हो सकता है और ऐसी स्थिति में बल प्रयोग उचित ठहराया जा सकता है। उनकी इस टिप्पणी से बीजिंग नाराज हो गया था।
चीन में जापानी दूतावास में राजनयिक के तौर पर काम कर चुके इसा ने इस महीने की शुरुआत में सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा था कि द्विपक्षीय संबंध 1972 में दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध सामान्य होने के बाद से सबसे खराब स्थिति में पहुंच गए हैं।
उन्होंने कहा था कि दोनों देशों के बीच संबंधों में पहले आई गिरावट के दौर में भी अधिकारियों के बीच संवाद जारी रहा था, लेकिन ‘‘अब अधिकारियों और मंत्रालयों के बीच सभी संपर्क माध्यम बंद हो गए हैं।’’
इसा ने उस समय कहा था कि मौजूदा स्थिति दोनों देशों के राष्ट्रीय हित में नहीं है। उन्होंने बताया था कि चीनी पक्ष ने जापानी सांसदों के ‘‘संवाद की एक खिड़की’’ खोलने के अनुरोध को स्वीकार किया है।
चीन के विदेश मंत्रालय ने पिछले शुक्रवार को कहा था कि जापान के सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के ‘‘कुछ समझदार लोग’’ चीन-जापान संबंधों की मौजूदा स्थिति को लेकर चिंतित हैं और उन्हें पटरी पर लाने के प्रयास करना चाहते हैं।
ताकाइची की टिप्पणी ताइवान को लेकर चीन की उस ‘‘लाल रेखा’’ को पार करने वाली मानी गई, जिसे बीजिंग अन्य देशों के साथ अपने संबंधों में महत्वपूर्ण मानता है। ताइवान एक स्वशासित द्वीप है, जिस पर चीन अपना दावा करता है।
ताकाइची ने अपनी टिप्पणी वापस नहीं ली है। हालांकि, द्वितीय विश्व युद्ध में जापान के आत्मसमर्पण की 15 अगस्त की बरसी पर उन्होंने विवादित यासुकुनी मंदिर जाने के बजाय दूर से ही प्रार्थना की। चीन और दक्षिण कोरिया इस मंदिर को जापान के युद्धकालीन सैन्यवाद और अत्याचारों पर पर्याप्त पश्चाताप नहीं होने का प्रतीक मानते हैं।
एपी मनीषा नरेश
नरेश

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