बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियां ऑनलाइन बाल यौन शोषण सामग्री से निपटने में अब भी नाकाम

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बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियां ऑनलाइन बाल यौन शोषण सामग्री से निपटने में अब भी नाकाम

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  • Publish Date - February 5, 2026 / 11:54 AM IST,
    Updated On - February 5, 2026 / 11:54 AM IST

(जोएल स्कैनलान, यूनिवर्सिटी ऑफ तस्मानिया)

होबार्ट, पांच फरवरी (द कन्वरसेशन) ‘ऑस्ट्रेलियन सेंटर टू काउंटर चाइल्ड एक्सप्लॉइटेशन’ को वित्त वर्ष 2024–25 के दौरान ऑनलाइन बाल यौन शोषण सामग्री (सीएसएएम) से जुड़े करीब 83,000 मामले प्राप्त हुए, जिनमें से अधिकतर मामले मुख्यधारा के डिजिटल मंच से संबंधित थे। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में 41 प्रतिशत अधिक है।

मुख्यधारा के मंच पर खुले तौर पर हो रहे बाल शोषण के इस परिप्रेक्ष्य में ई-सेफ्टी आयुक्त जूली इनमैन ग्रांट ने गूगल, एप्पल, माइक्रोसॉफ्ट, मेटा सहित अन्य बड़ी टेक कंपनियों से हर छह महीने में पारदर्शिता रिपोर्ट प्रस्तुत करने की आवश्यकता सुनिश्चित की है।

नवीनतम रिपोर्ट में ज्ञात बाल शोषण सामग्री की पहचान में कुछ प्रगति दर्ज की गई है, जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से उत्पन्न सामग्री, लाइव-स्ट्रीमिंग के माध्यम से शोषण, ऑनलाइन ग्रूमिंग और बच्चों व वयस्कों के यौन उत्पीड़न से जुड़े मामले शामिल हैं।

रिपोर्ट में गंभीर सुरक्षा खामियों की ओर भी इशारा किया गया है, जो उपयोगकर्ताओं, विशेषकर बच्चों, को जोखिम में डालती हैं। रिपोर्ट के अनुसार, केवल पारदर्शिता पर्याप्त नहीं है और नुकसान दर्ज करने के बजाय बेहतर समाधान के माध्यम से उन्हें रोकने की आवश्यकता है।

ई-सेफ्टी की रिपोर्ट में कहा गया है कि पारदर्शिता रिपोर्ट नियामकीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अहम हैं, लेकिन तकनीकी क्षमता और कंपनियों द्वारा उठाए गए वास्तविक कदमों के बीच अब भी अंतर बना हुआ है।

रिपोर्ट के अनुसार, स्नैपचैट की मूल कंपनी स्नैप ने बाल यौन शोषण से जुड़ी शिकायतों पर कार्रवाई का औसत समय 90 मिनट से घटाकर 11 मिनट कर दिया है। माइक्रोसॉफ्ट ने आउटलुक में ज्ञात शोषण सामग्री की पहचान के दायरे का विस्तार किया है।

इसके बावजूद, मेटा और गूगल ने मैसेंजर और गूगल मीट जैसी वीडियो कॉलिंग सेवाओं में लाइव-स्ट्रीम में शोषण की निगरानी नहीं कर रही हैं, जबकि उनके अन्य मंच पर पहचान उपकरण मौजूद हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि एप्पल और डिस्कॉर्ड सक्रिय पहचान प्रणाली लागू करने में विफल रहे हैं। एप्पल लगभग पूरी तरह उपयोगकर्ताओं की शिकायतों पर निर्भर है। एप्पल, डिस्कॉर्ड, गूगल चैट, मीट और मैसेजेज, माइक्रोसॉफ्ट टीम्स तथा स्नैप फिलहाल बच्चों के यौन शोषण और ब्लैकमेल की पहचान के लिए उपलब्ध सॉफ्टवेयर का उपयोग नहीं कर रहे हैं।

आयुक्त ने लाइव वीडियो और एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म को सबसे बड़ी चिंता का विषय बताया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि लाइव ऑनलाइन बाल यौन शोषण की पहचान के लिए निवेश अब भी अपर्याप्त है।

रिपोर्ट के साथ ही ई-सेफ्टी ने एक नया डैशबोर्ड भी जारी किया है, जो टेक कंपनियों की प्रगति की निगरानी करता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा रिपोर्टिंग व्यवस्था मंच को सुरक्षित बनाने के लिए पर्याप्त नहीं है। उद्योग को मुनाफे से पहले सुरक्षा को प्राथमिकता देनी होगी, जो आमतौर पर कानून के बिना संभव नहीं हो पाता।

‘ऑनलाइन सेफ्टी एक्ट’ की समीक्षा में प्रस्तावित डिजिटल ‘ड्यूटी ऑफ केयर’ को समाधान का हिस्सा बताया गया है, जिससे कंपनियों को शुरुआत से पहले यह साबित करना होगा कि उनके सिस्टम सुरक्षित हैं।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि केवल पहचान ही नहीं, बल्कि रोकथाम और सहायता की दिशा में भी प्रयास जरूरी हैं। चेतावनी संदेश और रियल-टाइम हस्तक्षेप जैसे उपाय हानिकारक गतिविधियों को कम करने में प्रभावी पाए गए हैं।

ई-सेफ्टी आयुक्त ने कहा कि तकनीक पहले से उपलब्ध है, लेकिन कंपनियां उपयोगकर्ता वृद्धि और मुनाफे पर असर के डर से इसका इस्तेमाल नहीं कर रहीं।

रिपोर्ट के अनुसार, उद्योग समस्याओं का समाधान जानता है, लेकिन गति बेहद धीमी है। सुरक्षा को अतिरिक्त सुविधा नहीं, बल्कि मानक बनाने के लिए कानून को और सशक्त करने की आवश्यकता है।

( द कन्वरसेशन ) मनीषा अमित

अमित