बोरिस जॉनसन के लिए इम्तिहान होगा दो सीटों पर होने वाला चुनाव

बोरिस जॉनसन के लिए इम्तिहान होगा दो सीटों पर होने वाला चुनाव

: , June 23, 2022 / 05:10 PM IST

लंदन, 23 जून (एपी) ब्रिटेन में बृहस्पतिवार को दो विशेष सीटों पर चुनाव के लिए मतदान शुरू हुआ जिसके विपरीत नतीजे पहले ही ‘पार्टीगेट’ मामलों को लेकर निशाने पर चल रहे कंजरवेटिव प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन को एक नया झटका दे सकता है।

उत्तरी इंग्लैंड में वेकफील्ड और टिवर्टन और होनिटोन के दक्षिण-पश्चिमी निर्वाचन क्षेत्र, दोनों कंजरवेटिव सांसदों के लिए प्रतिस्थापन का चुनाव कर रहे हैं जिन्होंने आरोपों के चलते इस्तीफा दे दिया। इनमें से एक सांसद को यौन उत्पीड़न का दोषी ठहराया गया था जबकि दूसरे को हाउस ऑफ कॉमन्स (संसद के निचले सदन) के कक्ष में अश्लील वीडियो (पोर्नोग्राफी) देखते पाया गया था। हालांकि इस प्रकरण पर सांसद ने यह कहकर सफाई देने की कोशिश की थी कि वह अपने फोन पर ट्रैक्टरों की तस्वीरें खोज रहे थे।

किसी भी जिले में हार प्रधानमंत्री की पार्टी के लिए एक झटका होगी। दोनों ही सीटें खोने से, असंतुष्ट कंजरवेटिव के बीच घबराहट बढ़ेगी, जो पहले से ही इस बात को लेकर चिंतित हैं कि अनिश्चित और विभाजनकारी जॉनसन अब चुनाव के लिहाज से सही दांव नहीं हैं।

स्ट्रैथक्लाइड विश्वविद्यालय के चुनाव विशेषज्ञ जॉन कर्टिस ने ‘इंडिपेंडेंट’ समाचार पत्र में लिखा है, “कंजरवेटिव के लिए बृहस्पतिवार को एक उपचुनाव हारना दुर्भाग्यपूर्ण माना जा सकता है। हालांकि, दोनों सीटों को गंवाने का मतलब लापरवाही से कहीं ज्यादा है – यह एक ऐसी सरकार का संकेत है जिस पर अपनी चुनावी जमीन को खोने का खतरा मंडरा रहा है।” मतदाता जब मतदान कर रहे हैं तब जॉनसन रवांडा में एक राष्ट्रमंडल शिखर सम्मेलन में 4,000 मील (6,400 किलोमीटर) दूर हैं।

यह चुनाव ऐसे समय हो रहा है जब यूक्रेन में रूस के आक्रमण के साथ उपभोक्ता मांग बढ़ने के बीच ऊर्जा और खाद्य पदार्थों की आपूर्ति श्रृंखला पर संकट छाया है और ब्रिटेन सबसे खराब ‘कॉस्ट ऑफ लिविंग’ संकट का सामना कर रहा है।

चुनाव संकेत देते हैं कि टिवर्टन में कंजरवेटिव और मध्यमार्गी लिबरल डेमोक्रेट्स के बीच कड़ा मुकाबला है। लिबरल डेमोक्रेट्स के नेता, एड डेवी ने कहा कि निवासी “बोरिस जॉनसन के झूठ और उपेक्षा से तंग आ चुके हैं।” डेवी ने कहा, “परिवार पेट्रोल बिल और खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी का सामना कर रहे हैं, और इस सरकार के पास एक मात्र जवाब लगातार कर वृद्धि से लोगों को चोट पहुंचाना है।”

भाषा

प्रशांत नरेश

नरेश

 

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