अफगानिस्तान का युद्ध में अमेरिका का साथ देने वाले एवं अब कतर में फंसे अफगानों से घर लौटने का आह्वान
अफगानिस्तान का युद्ध में अमेरिका का साथ देने वाले एवं अब कतर में फंसे अफगानों से घर लौटने का आह्वान
काबुल, 25 अप्रैल (एपी) अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि जिन अफगानों ने अमेरिका के युद्ध प्रयासों में उसकी मदद की और अब अमेरिका पहुंचने की उम्मीद में कतर में फंसे गये हैं, वे सुरक्षित रूप से अफगानिस्तान लौट सकते हैं।
अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल कहर बाल्खी ने शनिवार को यह बयान दिया।
इस बयान से पहले खबर आयी थी कि अमेरिका का ट्रंप प्रशासन उन 1,100 अफगानों को कांगो भेजने पर विचार कर रहा है जिन्होंने अफगानिस्तान में युद्ध के दौरान अमेरिका की सहायता की थी। ट्रंप प्रशासन अमेरिकी सैन्य कर्मियों के रिश्तेदारों को भी कांगो भेजने पर गौर कर रहा है।
अफगान पुनर्वास प्रयासों में सहयोग करने वाले संगठन ‘अफगान एवैक’ ने बुधवार को कहा कि अमेरिकी अधिकारियों ने उसे अमेरिका और कांगो के बीच उन अफगान शरणार्थियों को लेने के बारे में हुई चर्चाओं के बारे में जानकारी दी, जो पिछले एक साल से दोहा में अमेरिकी अड्डे कैंप अस-सैलिया में अनिश्चित स्थिति में हैं।
अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि वह शरणार्थियों को किसी तीसरे देश में ‘स्वैच्छिक रूप से’ बसाने के विकल्पों को चुनने पर विचार रहा है, लेकिन उसने यह पुष्टि नहीं की कि किन देशों पर चर्चा की जा रही है।
‘अफगान एवैक’ ने बताया कि शरणार्थियों को दिए गए विकल्पों में से एक अफगानिस्तान वापस लौटना है लेकिन वहां उन्हें तालिबान के हाथों प्रतिशोध तथा यहां तक कि मौत का भी डर है।
उन पर (शरणार्थियों पर) दो दशक के युद्ध के दौरान अमेरिका का साथ देने का आरोप है।
तालिबान 2021 में अफगानिस्तान से अमेरिकी नेतृत्व वाली सेनाओं की वापसी के बाद सत्ता हथियाने के बाद से देश चला रहे हैं।
बाल्खी ने अपने बयान में लिखा, ‘‘अफगानिस्तान का विदेश मंत्रालय दोहराता है कि अफगानिस्तान सभी अफगानों की साझा मातृभूमि है। वह सभी संबंधित लोगों के साथ-साथ समान परिस्थितियों का सामना कर रहे अन्य लोगों को भी अपनी मातृभूमि लौटने के लिए आमंत्रित करता है, क्योंकि मातृभूमि के द्वार उनके लिए खुले हैं, ताकि ऐसे लोग पूर्ण विश्वास और मन की शांति के साथ ऐसा कर सकें।’’
उन्होंने कहा कि “दूसरे देश जाने के इच्छुक लोग उचित समय पर कानूनी और सम्मानजनक माध्यमों से ऐसा कर सकते हैं।”
बाल्खी ने कहा कि अफगानिस्तान का विदेश मंत्रालय “सभी देशों के साथ बातचीत करने के लिए तैयार है।’’
उन्होंने कहा कि विदेश मंत्रालय “सभी पक्षों को यह स्पष्ट कर देता है कि अफगानिस्तान में कोई सुरक्षा खतरा नहीं है और सुरक्षा कारणों से किसी को भी देश छोड़ने के लिए मजबूर नहीं किया जा रहा है।”
कैंप अस-सैलिया में फंसे लोगों की ओर से ‘अफगान एवैक’ द्वारा जारी किये गये एक संयुक्त बयान में, अफगानों ने कहा कि उन्हें अमेरिकी अधिकारियों से संभावित स्थानांतरण को लेकर चल रही बातचीत के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है और उन्हें इसके बारे में प्रेस से पता चला है।
उन्होंने कहा कि जिस अनिश्चित स्थिति में वे जी रहे हैं, उसका उन पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।
‘अफगान एवैक’ ने कहा, “हममें से कई लोग ठीक नहीं हैं। अनिश्चितता का माहौल हममें से कुछ लोगों के लिए असहनीय हो गया है। हम गहरे अवसाद में हैं।”
उसने कहा,“हम यह बात साफ-साफ कहना चाहते हैं। हम कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य नहीं जाना चाहते है।”
उसने कहा, “यह देश खुद ही एक युद्ध में उलझा हुआ है। हम पहले ही बहुत युद्ध देख चुके हैं। हम अपने बच्चों को एक और युद्ध में नहीं ले जा सकते।”
एपी राजकुमार रंजन
रंजन

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