चीन और पाकिस्तान ने दक्षिण एशिया में एकतरफा कार्रवाई का विरोध किया
चीन और पाकिस्तान ने दक्षिण एशिया में एकतरफा कार्रवाई का विरोध किया
(के जे एम वर्मा)
बीजिंग, पांच जनवरी (भाषा) चीन और पाकिस्तान ने सोमवार को दक्षिण एशिया में किसी भी एकतरफा कार्रवाई के प्रति अपने विरोध को एक बार फिर दोहराया। दोनों घनिष्ठ सहयोगी देशों ने बांग्लादेश के साथ त्रिपक्षीय सहयोग और कश्मीर के संदर्भों में अपनी रणनीतिक वार्ता की समाप्ति पर यह बात कही।
चीनी विदेश मंत्री वांग यी और पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इसाक डार के बीच आयोजित सातवीं रणनीतिक वार्ता के समापन पर सोमवार को जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि बीजिंग ने अफगानिस्तान से आतंकी संगठनों को खत्म करने की इस्लामाबाद की मांग का समर्थन किया है। काबुल अपने देश में आतंकी संगठनों की मौजूदगी से इनकार करता रहा है।
इस वार्ता में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद गठित चीन-बांग्लादेश-पाकिस्तान त्रिपक्षीय सहयोग तंत्र का लाभ उठाते हुए नये परिणाम के लिए ‘तत्परता’ की भी बात कही गई।
चीन और पाकिस्तान ने संयुक्त बयान में कहा, ‘‘ दोनों पक्षों ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर, अंतरराष्ट्रीय कानून और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को नियंत्रित करने वाले बुनियादी मानदंडों पर आधारित दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय व्यवस्था के महत्व पर बल दिया। उन्होंने किसी भी एकतरफा कार्रवाई का विरोध दोहराते हुए दक्षिण एशिया में शांति और स्थिरता बनाए रखने के महत्व और संवाद एवं परामर्श के माध्यम से सभी लंबित विवादों को हल करने की आवश्यकता पर बल दिया।’’
संयुक्त बयान के मुताबिक, ‘‘पाकिस्तानी पक्ष ने जम्मू-कश्मीर की स्थिति पर अपना रुख और नवीनतम घटनाक्रमों के बारे में चीनी पक्ष को जानकारी दी।’’
चीन ने एक बार फिर दोहराया कि जम्मू-कश्मीर का मुद्दा ‘इतिहास की देन है, और इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर, संबंधित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और द्विपक्षीय समझौतों के अनुसार उचित और शांतिपूर्ण तरीके से हल किया जाना चाहिए’।
बयान में कहा गया, ‘‘दोनों पक्षों ने समानता और पारस्परिक लाभ के सिद्धांत के तहत सीमा पार जल संसाधन सहयोग और अंतरराष्ट्रीय कानूनी दायित्वों को पूरा करने की अनिवार्यता पर बल दिया।’’
भाषा रवि कांत रवि कांत अविनाश
अविनाश

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