चीन ने बांग्लादेश की संप्रभुता बनाए रखने और ‘विदेशी हस्तक्षेप’ खारिज करने के प्रयासों का समर्थन किया
चीन ने बांग्लादेश की संप्रभुता बनाए रखने और ‘विदेशी हस्तक्षेप’ खारिज करने के प्रयासों का समर्थन किया
(केजेएम वर्मा)
बीजिंग, 26 जून (भाषा) चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने शुक्रवार को यहां बांग्लादेशी प्रधानमंत्री तारिक रहमान से मुलाकात के दौरान कहा कि बांग्लादेश की संप्रभुता बनाए रखने और ‘‘विदेशी हस्तक्षेप को खारिज करने’’ के प्रयासों का बीजिंग समर्थन करता है।
चीन के विदेश मंत्रालय की एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, चिनफिंग ने फरवरी में सत्ता संभालने वाली रहमान नीत सरकार के प्रति बीजिंग का समर्थन व्यक्त किया और कहा कि चीन, उच्च गुणवत्ता वाले ‘बेल्ट एंड रोड’ सहयोग को आगे बढ़ाने तथा विकास रणनीतियों के बेहतर समन्वय के लिए बांग्लादेश के साथ काम करने को तैयार है।
चीन की महत्वाकांक्षी ‘बेल्ट एंड रोड’ पहल का उद्देश्य एशिया, अफ्रीका और यूरोप को रेलवे, बंदरगाहों, राजमार्गों और ऊर्जा पाइपलाइन के व्यापक नेटवर्क के माध्यम से जोड़ना है। इसे मूल रूप से प्राचीन व्यापार मार्ग को पुनर्जीवित करने की पहल के रूप में देखा जाता है।
चिनफिंग ने रहमान से कहा, ‘‘चीन, बांग्लादेश की राष्ट्रीय स्वतंत्रता, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता बनाए रखने तथा विदेशी हस्तक्षेप को खारिज करने के प्रयासों का समर्थन करता है।’’ रहमान की पांच दिवसीय चीन यात्रा शुक्रवार को समाप्त हुई।
चिनफिंग ने कहा, ‘‘दुनिया में चाहे जैसे भी बदलाव हों, चीन-बांग्लादेश मैत्रीपूर्ण संबंधों की समग्र दिशा के प्रति चीन की प्रतिबद्धता में कोई कमी नहीं आएगी।’’
चिनफिंग ने बांग्लादेश, म्यांमा और चीन को जोड़ने वाले एक आर्थिक गलियारे की स्थापना का भी प्रस्ताव रखा, जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय संपर्क और व्यापार को और मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि चीन, क्षेत्रीय संपर्क बढ़ाने के लिए चीन-म्यांमा-बांग्लादेश आर्थिक गलियारे का समर्थन करता है।
यह नया गलियारा वर्ष 2013 में बीजिंग द्वारा प्रस्तावित बांग्लादेश-चीन-भारत-म्यांमा (बीसीआईएम) आर्थिक गलियारे का संक्षिप्त स्वरूप है, जो आगे नहीं बढ़ सका था।
रहमान ने पद संभालने के बाद अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए मलेशिया का चयन किया था। कुआलालंपुर से वह 22 जून को चीन के डालियान शहर पहुंचे। इस बंदरगाह शहर में उन्होंने विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) के एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया, जहां उन्होंने चीनी निवेश आकर्षित करने के लिए जोरदार पैरवी की।
वह बुधवार को अपनी इस यात्रा के अंतिम चरण के तहत बीजिंग पहुंचे। बीजिंग में उन्होंने दो दिनों के प्रवास दौरान चीन के प्रधानमंत्री ली क्विंग सहित कई वरिष्ठ चीनी अधिकारियों के साथ बैठकें कीं।
रहमान का बृहस्पतिवार को ‘ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल’ में प्रधानमंत्री ली ने औपचारिक स्वागत किया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता हुई और व्यापार, निवेश तथा शिक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित 13 समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।
रहमान ने बृहस्पतिवार को इससे पहले चीन के जल संसाधन मंत्री ली गुओयिंग के साथ भी बातचीत की, जिसमें दोनों देशों ने तीस्ता नदी प्रबंधन और अन्य नदी परियोजनाओं पर सहयोग मजबूत करने पर सहमति जताई।
तीस्ता नदी प्रबंधन में चीन की भागीदारी, इसके सामरिक महत्व को देखते हुए, ढाका और नयी दिल्ली के संबंधों को प्रभावित कर सकती है।
तीस्ता नदी पूर्वी हिमालय से निकलकर सिक्किम और पश्चिम बंगाल से होते हुए बांग्लादेश में प्रवेश करती है, जहां यह लाखों लोगों की सिंचाई और आजीविका का प्रमुख स्रोत है।
तीस्ता नदी बेसिन भारत के संवेदनशील सिलीगुड़ी गलियारे के निकट स्थित है। यह 22 किलोमीटर चौड़ी भूमि पट्टी मुख्य भूभाग को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ती है।
हालांकि, बीजिंग ने शुक्रवार को ऐसी चिंताओं को कमतर करने का प्रयास किया।
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने यहां एक प्रेस वार्ता में नयी दिल्ली की संभावित चिंताओं संबंधी प्रश्न के जवाब में कहा, ‘‘तीस्ता नदी के व्यापक प्रबंधन और पुनर्वास की परियोजना बांग्लादेश के लिए जनकल्याण से जुड़ी एक महत्वपूर्ण परियोजना है।’’
उन्होंने किसी देश का नाम नहीं लिये बिना कहा, ‘‘चीन इस परियोजना को समर्थन देने के लिए हरसंभव मदद करने को तैयार है। मैं यह रेखांकित करना चाहता हूं कि चीन-बांग्लादेश सहयोग किसी तीसरे पक्ष को लक्ष्य बनाकर नहीं किया जा रहा है और यह किसी तीसरे पक्ष के प्रभाव से मुक्त होना चाहिए।’’
रहमान और चीनी नेताओं के बीच हुई वार्ता का विवरण देते हुए गुओ ने कहा कि दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों तथा साझा हितों से जुड़े अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया।
उन्होंने कहा कि व्यापक सहमति और व्यावहारिक सहयोग के कई परिणाम हासिल हुए हैं, जो चीन-बांग्लादेश संबंधों के विकास के लिए नई रणनीतिक रूपरेखा तैयार करते हैं।
रहमान ने चिनफिंग से कहा कि बांग्लादेश की विदेश नीति में चीन महत्वपूर्ण स्थान रखता है और वह उसका विश्वसनीय तथा मूल्यवान साझेदार है।
उन्होंने कहा कि बांग्लादेश ‘एक-चीन’ नीति के प्रति दृढ़ता से प्रतिबद्ध है, ताइवान को चीन के क्षेत्र का अभिन्न हिस्सा मानता है और ‘‘ताइवान की स्वतंत्रता’’ के किसी भी स्वरूप का विरोध करता है।
चीनी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, बांग्लादेश चिनफिंग की वैश्विक पहलों का पूर्ण समर्थन करता है और अंतरराष्ट्रीय तथा क्षेत्रीय मामलों में चीन के साथ समन्वय एवं सहयोग बढ़ाने के लिए तैयार है।
बांग्लादेश के प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता महदी अमीन ने दोनों शीर्ष नेताओं की वार्ता पर अलग से मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि उन्होंने चटगांव और मोंगला बंदरगाहों के आधुनिकीकरण में चीन के सहयोग पर चर्चा की।
अमीन ने किसी देश का नाम नहीं बिना कहा, ‘‘हम इस दिशा में काम करना चाहते हैं कि इन बंदरगाहों को क्षेत्रीय केंद्र के रूप में कैसे विकसित किया जाए, जिससे केवल बांग्लादेश ही नहीं, बल्कि अन्य देशों को भी लाभ मिल सके।’’
बांग्लादेश की सरकारी समाचार एजेंसी बीएसएस के अनुसार, अमीन ने यह भी कहा कि पहली बार बांग्लादेश और चीन के बीच विदेश तथा रक्षा मामलों को शामिल करते हुए ‘2+2 संवाद’ तंत्र पर सहमति बनी है।
उन्होंने कहा कि दोनों देशों के विदेश और रक्षा मंत्रालयों के प्रतिनिधि भविष्य में नियमित संवाद करेंगे और इसके तौर-तरीकों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
हालांकि, पाकिस्तान, चीन और बांग्लादेश के बीच त्रिपक्षीय संवाद का कोई उल्लेख नहीं किया गया, जिसकी शुरुआत पूर्ववर्ती मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान हुई थी।
एक अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम में अमीन ने बताया कि बांग्लादेश की शिक्षा व्यवस्था में तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा के साथ मंदारिन भाषा को तीसरी भाषा के रूप में प्राथमिकता दी जा रही है।
ढाका ने अस्पतालों के निर्माण तथा कुनमिंग जैसे चीनी शहरों के अस्पतालों में इलाज कराने के लिए बांग्लादेशी नागरिकों के लिये वीजा नियमों में ढील देने के संबंध में भी चीन से सहयोग मांगा है।
ब्रिक्स की सदस्यता में बांग्लादेश की रुचि के बारे में अमीन ने कहा कि चीन ने ढाका के भविष्य में सदस्यता आवेदन का स्वागत किया है।
भाषा अमित दिलीप
दिलीप

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