सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का चीन समर्थन नहीं करेगा: जॉन बोल्टन

सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का चीन समर्थन नहीं करेगा: जॉन बोल्टन

सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का चीन समर्थन नहीं करेगा: जॉन बोल्टन
Modified Date: September 24, 2026 / 04:27 pm IST
Published Date: September 24, 2026 4:27 pm IST

वाशिंगटन, 24 सितंबर (भाषा) अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने कहा है कि चीन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में स्थायी सीट के लिए भारत की दावेदारी का समर्थन करने को तैयार नहीं है।

बोल्टन ने ‘पीटीआई वीडियो’ से बातचीत में कहा कि 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद की संरचना में बदलाव के प्रयास दशकों से जारी हैं, लेकिन अब तक कोई नतीजा नहीं निकला है और इसमें सुधार की संभावनाएं बहुत कम हैं।

उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता कि इस मुद्दे पर चीन अपना रुख बदल सकता है। मुझे लगता है कि वह पांच स्थायी सदस्यों की व्यवस्था को पसंद करता है जिसमें वह वास्तव में एकमात्र एशियाई देश है। मुझे इसमें बदलाव के आसार नजर नहीं आते।”

बोल्टन ने कहा कि स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने के लिए संयुक्त राष्ट्र चार्टर में संशोधन की जरूरत होगी और चीन भारत की दावेदारी को रोक सकता है।

उन्होंने कहा, “अगर मान लीजिए कि भारत बहुत सफल होता है और उसे समर्थन मिलता हुआ दिखता है, तो मेरा मानना है कि चीन संयुक्त राष्ट्र चार्टर में संशोधन पर वीटो कर देगा, क्योंकि नए स्थायी सदस्य को शामिल करने के लिए यही जरूरी होगा।”

यूएनएससी में 15 सदस्य देश हैं, जिनमें वीटो शक्ति वाले पांच स्थायी सदस्य और दो साल के कार्यकाल के लिए चुने जाने वाले 10 अस्थायी सदस्य शामिल हैं। पांच स्थायी सदस्य चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका हैं।

बोल्टन ने कहा कि ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका समेत कई देशों ने भी स्थायी सदस्यता की मांग की है, जबकि अन्य प्रस्ताव भी सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र खुद व्यापक संस्थागत समस्याओं का सामना कर रहा है।

उन्होंने कहा, “मुझे इसमें कोई रास्ता नजर नहीं आता। मेरा मानना है कि संयुक्त राष्ट्र बहुत, बहुत गंभीर संकट में है।”

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 1945 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थापना हुई थी। तब से इसके स्थायी सदस्यों की संख्या में कोई बदलाव नहीं हुआ है। भारत लगातार यूएनएससी में स्थायी सीट की मांग करता रहा है और उसने इस निकाय को आज की दुनिया का अधिक प्रतिनिधित्व करने वाला बनाने के लिए इसके विस्तार की वकालत की है।

पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष पर बोल्टन ने कहा कि उनका मानना है कि क्षेत्र में दीर्घकालिक स्थिरता के लिए ईरान में सत्ता परिवर्तन जरूरी है।

उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता लाने वाला एकमात्र दीर्घकालिक समाधान तेहरान में सत्ता परिवर्तन है।” हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि सत्ता परिवर्तन स्वत: शांति की गारंटी नहीं होगा।

बोल्टन ने यह भी तर्क दिया कि लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में हूती हमले, ईरान की उस ‘रिंग ऑफ़ फ़ायर’ रणनीति का हिस्सा थे, जिसका मकसद सऊदी अरब और खाड़ी के अन्य देशों पर दबाव डालकर वॉशिंगटन को प्रभावित करना था।

उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता कि संयुक्त राष्ट्र खुद इस मामले में कुछ कर पाएगा।”

भाषा मनीषा नरेश

नरेश


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