चीन की ओर से ईंधन निर्यात पर लगाया गया प्रतिबंध ऑस्ट्रेलियाई हवाई यात्रियों के लिए बेहद चिंताजनक

चीन की ओर से ईंधन निर्यात पर लगाया गया प्रतिबंध ऑस्ट्रेलियाई हवाई यात्रियों के लिए बेहद चिंताजनक

चीन की ओर से ईंधन निर्यात पर लगाया गया प्रतिबंध ऑस्ट्रेलियाई हवाई यात्रियों के लिए बेहद चिंताजनक
Modified Date: March 15, 2026 / 10:49 am IST
Published Date: March 15, 2026 10:49 am IST

(सामंथा हेपबर्न, डीकिन विश्वविद्यालय)

मेलबर्न, 15 मार्च (द कन्वरसेशन) चीन द्वारा तेल शोधकों को सभी ईंधन निर्यात रोकने के निर्देश दिए जाने की खबरों के बीच ऑस्ट्रेलिया में तरल ईंधन की कमी और कीमतों में वृद्धि की आशंका है। इससे ईरान संघर्ष की अवधि और तेल आपूर्ति पर इसके प्रभाव को लेकर वैश्विक स्तर पर बनी अनिश्चितता और भी बढ़ गई है।

ऑस्ट्रेलियाई दैनिक ‘ऑस्ट्रेलियन फाइनेंशियल रिव्यू’ ने शुक्रवार को बताया कि चीन ने तेल रिफाइनरी को सभी निर्यात रोकने के बारे में सूचित किया है जिससे ऑस्ट्रेलिया को भेजे जाने वाले कम से कम दो मालवाहकों को लेकर संदेह पैदा हो गया है।

विश्व के सबसे महत्वपूर्ण परिवहन मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य में दो परिवहन जहाजों को नष्ट कर दिया गया है, जिससे संघर्ष जारी रहने के दौरान भविष्य में इन जहाजों की यात्रा को लेकर आशंका बढ़ गई है।

इसका मतलब यह है कि चीन जैसी एशियाई रिफाइनरियों को तेल की आपूर्ति में काफी कमी आ सकती है।

चीन ने रिफाइनरियों को सभी ईंधन मालवाहकों को रोकने को कहा

एशियाई देशों को अपने तेल का 90 प्रतिशत तक हिस्सा पश्चिम एशिया से मिलता है। तरल ईंधन का शुद्ध आयातक होने के नाते ऑस्ट्रेलिया एशियाई रिफाइनरियों से होने वाले निर्यात पर अत्यधिक निर्भर है।

विमानन विशेषज्ञ काफी समय पहले ऑस्ट्रेलिया में जेट ईंधन की आपूर्ति बाधित होने की आशंका के बारे में चेतावनी दे चुके हैं।

इससे चीन द्वारा ऑस्ट्रेलिया को जेट ईंधन का निर्यात रोकने का कोई भी निर्णय बेहद चिंताजनक हो जाता है। 2025 में ऑस्ट्रेलिया ने अपने जेट ईंधन का लगभग 32 प्रतिशत चीन से आयात किया था।

इन निर्यातों के बिना ऑस्ट्रेलिया को दक्षिण कोरिया, ताइवान, सिंगापुर, मलेशिया और भारत जैसे अन्य देशों की ओर रुख करना होगा। हालांकि, ये देश भी पश्चिम एशिया संघर्ष के प्रभाव का सामना कर रहे हैं।

जब भंडार वास्तव में मायने रखते हैं

यदि ऐसा होता है, तो ऑस्ट्रेलिया को जेट ईंधन के अपने रणनीतिक भंडार पर निर्भर रहना होगा क्योंकि उसके पास घरेलू रिफाइनरी क्षमता बहुत कम है। दुर्भाग्य से ये भंडार पर्याप्त नहीं हैं।

मार्च 2026 के मध्य तक उद्योग, विज्ञान और संसाधन विभाग ने पुष्टि की कि ऑस्ट्रेलिया के पास लगभग 29 से 32 दिनों के जेट ईंधन का भंडार है जो लगभग 80.2 करोड़ लीटर के बराबर है।

ऑस्ट्रेलिया की उड़ानों का क्या होगा?

ऑस्ट्रेलिया की जेट ईंधन आपूर्ति श्रृंखला दीर्घकालिक भंडारण के बजाय निरंतर टैंकर आपूर्ति पर आधारित है। बड़े हवाई अड्डे जेट ईंधन को टैंक फार्मों में संग्रहित करते हैं जिनमें कई भंडारण टैंक होते हैं जो पाइपलाइनों से जुड़े होते हैं। इन केंद्रों में एक समय में केवल कुछ हफ्तों का जेट ईंधन ही रखा जा सकता है।

इसका मतलब है कि यदि नयी आपूर्ति नहीं आती है तो हवाई अड्डों में ईंधन जल्दी खत्म हो जाएगा।

ऑस्ट्रेलिया द्वारा तरल ईंधन के अपने सुरक्षा भंडार को नहीं बढ़ाने के कई कारण हैं। इनमें घरेलू शोधन क्षमता में गिरावट, सस्ते वैश्विक स्रोतों पर निर्भरता और ईंधन भंडारण से जुड़ी लागत और स्थान की कमी शामिल हैं।

ऑस्ट्रेलिया में जेट ईंधन के सबसे बड़ा उपभोक्ता क्वांटास एयरलाइन ने संकेत दिया है कि उसे किराए बढ़ाने पड़ेंगे, हालांकि फिलहाल उड़ानें रद्द नहीं की गई हैं।

एयर न्यूजीलैंड ने ईंधन की कीमतों और आपूर्ति संबंधी समस्याओं के कारण पहले ही अपनी सेवाओं से 1,100 उड़ानें कम कर दी हैं। आशंका है कि इससे निकट भविष्य में हवाई किराए में वृद्धि, ईंधन अधिभार, उड़ानों में कमी और रद्द होने जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

द कन्वरसेशन

सुरभि देवेंद्र

देवेंद्र


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