(सागर कुलकर्णी)
वाशिंगटन, 19 मई (भाषा) अमेरिकी सांसदों ने यहां कहा कि व्यापार और शुल्क को लेकर दोनों देशों की सरकारों के बीच मतभेदों के बावजूद भारत-अमेरिका संबंधों को अमेरिकी कांग्रेस में द्विदलीय समर्थन प्राप्त है। उन्होंने भारत से वैश्विक मुद्दों को सुलझाने में अधिक भूमिका निभाने का आग्रह किया।
सोमवार को ‘कैपिटल हिल समिट 2026’ में भाग लेते हुए, डेमोक्रेट पार्टी से सांसद रो खन्ना और अमी बेरा ने कहा कि भारत को यूक्रेन संघर्ष जैसे वैश्विक मुद्दों को सुलझाने में बड़ी भूमिका निभानी चाहिए।
मोंटाना से रिपब्लिकन पार्टी के सांसद स्टीव डेन्स ने कहा कि भारत अमेरिका के सबसे महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक साझेदारों में से एक है और दोनों के व्यापार और कूटनीति से परे साझा रणनीतिक हित हैं।
डेन्स ने शुल्क के मुद्दे पर संबंधों में आई बाधाओं का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘ हमें अपने सबसे महत्वपूर्ण संबंधों में से एक, यानी अमेरिका और भारत के बीच के संबंधों में इस तरह के टकराव की जरूरत नहीं है।’’
डेन्स ने जनवरी में भारत की अपनी यात्रा को याद किया, जब उन्होंने भारतीय नेतृत्व से सीधे तौर पर शुल्क के मुद्दे पर असंतोष के बारे में सुना। हालांकि यह मुद्दा फरवरी में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच फोन पर हुई बातचीत में सुलझा लिया गया था।
इस सम्मेलन का आयोजन ‘यूएस-इंडिया फ्रेंडशिप काउंसिल’ ने किया था। इसके सह-संस्थापक स्वदेश चटर्जी हैं, जिन्होंने भारत-अमेरिका नागरिक परमाणु समझौते के लिए अमेरिकी सांसदों के बीच समर्थन जुटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
कैलिफोर्निया के सांसद बेरा ने स्वीकार किया कि शुल्क और व्यापार को लेकर मतभेदों ने भारत और अमेरिका के बीच तनाव पैदा किया, लेकिन उन्होंने कहा कि अमेरिकी कांग्रेस भारत के साथ घनिष्ठ संबंधों का दृढ़ता से समर्थन करती है।
उन्होंने कहा, ‘‘संसद के दृष्टिकोण से देखें तो पिछले तीन दशकों में वास्तव में कुछ भी नहीं बदला है। जॉर्ज डब्ल्यू बुश, राष्ट्रपति बिल क्लिंटन से लेकर बराक ओबामा, डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल और जो बाइडन तक, दोनों देशों के बीच संबंध लगातार मजबूत होते रहे हैं।’
भारतीय मूल के सांसद ने कहा कि भारत को एक प्रमुख विश्व शक्ति के रूप में उभरने के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर अधिक जिम्मेदारियां निभानी होंगी।
कैलिफोर्निया से सांसद खन्ना और बेरा के अनुसार, रूस के साथ भारत के दीर्घकालिक संबंधों के कारण उसे यूक्रेन में युद्ध को समाप्त करने में महत्वपूर्ण राजनयिक भूमिका निभानी चाहिए।
भारतीय मूल के नेता खन्ना ने कहा, ‘आप यह नहीं कह सकते कि आप विश्व नेता बनना चाहते हैं, लेकिन फिर जिम्मेदारी से पीछे हट जाएं।’
उन्होंने कहा कि अमेरिका-भारत साझेदारी संकीर्ण भूराजनीतिक गणनाओं के बजाय लोकतांत्रिक आदर्शों पर आधारित होनी चाहिए।
कांग्रेस सदस्य डेबोरा रॉस ने कहा कि भारत और अमेरिका लोकतंत्र और स्वतंत्रता के प्रति एक मूलभूत प्रतिबद्धता साझा करते हैं।
उत्तरी कैरोलिना के डेमोक्रेटिक सांसद रॉस ने कहा, ‘यह साझेदारी दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण साझेदारियों में से एक है, और लोकतंत्र के भविष्य और प्रगति के लिए इसे सफल होना ही चाहिए।’
वहीं भारत में अमेरिका के पूर्व राजदूत रिचर्ड वर्मा ने चेतावनी दी कि व्यापार और वीजा को लेकर हालिया तनाव ने भारत-अमेरिका संबंधों में कमजोरियों को उजागर किया है।
वीजा संबंधी मुद्दों पर सोशल मीडिया पर बढ़ रही भारत विरोधी बयानबाजी का जिक्र करते हुए वर्मा ने कहा, ‘‘सिस्टम थोड़ा खतरे की घंटी बजा रहा है।’’
भाषा शोभना वैभव
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