(सागर कुलकर्णी)
वाशिंगटन, 14 सितंबर (भाषा) अमेरिका में रिपब्लिकन पार्टी के एक नेता द्वारा टेक्सास में फुटबॉल मैच में जीत का जश्न मना रहे दक्षिण एशियाई मूल के छात्रों को ‘‘समस्या’’ बताए जाने से विवाद खड़ा हो गया है।
डेमोक्रेटिक पार्टी के साथ-साथ रिपब्लिकन पार्टी के नेताओं ने भी इस टिप्पणी की निंदा करते हुए इसे ‘‘नस्लवादी’’ करार दिया है।
‘टेक्सास रेलरोड कमिश्नर’ पद के लिए रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार बो फ्रेंच ने ‘लॉन्गहॉर्न्स’ की जीत का जश्न मनाते हुए दक्षिण एशियाई मूल के छात्रों की एक तस्वीर साझा की और कहा कि यह दृश्य दिखाता है कि ‘‘विदेशियों ने कितने अमेरिकियों की जगह ले ली है।’’
फ्रेंच इससे पहले 10 करोड़ प्रवासियों को देश से निर्वासित करने की मांग भी कर चुके हैं।
फ्रेंच ने उसी तस्वीर को साझा करते हुए एक अन्य पोस्ट में लिखा, ‘‘मैंने सुना था कि इस साल टेक्सास विश्वविद्यालय (यूटी) का दीक्षांत समारोह ऐसा ही दिख रहा था। मुझे विश्वास नहीं हुआ था। अब स्पष्ट है कि समस्या किसी की कल्पना से भी कहीं अधिक गंभीर है।’’
सांसद जॉन कॉर्निन ने इस पोस्ट को नस्लवादी बताते हुए इसकी निंदा की और रिपब्लिकन पार्टी के अन्य नेताओं से भी इसके खिलाफ आवाज उठाने की अपील की।
रिपब्लिकन पार्टी के नेता कॉर्निन ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘यह राज्य के एक पद के लिए रिपब्लिकन उम्मीदवार हैं।’’
अमेरिकी सीनेट में ‘इंडिया कॉकस’ के सह-अध्यक्ष कॉर्निन ने कहा, ‘‘क्या रिपब्लिकन पार्टी के अन्य निर्वाचित पदाधिकारी इस असहिष्णुता और नस्लवाद की निंदा करेंगे या इसे सामान्य बनते हुए देखकर भी आंखें फेर लेंगे? महान राजनीतिक दल इसी तरह खुद को बर्बाद कर लेते हैं। दुखद।’’
चार बार के सांसद कॉर्निन इस साल सीनेट का प्राइमरी चुनाव टेक्सास के अटॉर्नी जनरल केन पैक्सटन से हार गए थे।
पैक्सटन के खिलाफ सीनेट चुनाव लड़ रहे डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जेम्स टैलारिको ने कहा, ‘‘आपके नेतृत्व के लिए धन्यवाद जॉन कॉर्निन। टेक्सास में नस्लवाद के लिए कोई जगह नहीं है। केन पैक्सटन, क्या आप इस खुले नस्लवाद की निंदा करेंगे या चरमपंथियों के सामने झुक जाएंगे?’’
टेक्सास प्रतिनिधि सभा के कई रिपब्लिकन सदस्यों ने भी फ्रेंच की आलोचना की और उनसे पोस्ट हटाने का आग्रह किया।
टेक्सास में प्रतिनिधि सभा की सदस्य लेसी हल ने ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘कृपया इसे हटा दें। इस पोस्ट से मेरा दिल दुखा है। मुझे तो कॉलेज के छात्र अपनी फुटबॉल टीम का उत्साह बढ़ाते दिख रहे हैं। मुझे टेक्सास के लोग दिख रहे हैं।’’
राज्य की प्रतिनिधि सभा के एक अन्य सदस्य जेरेड पैटरसन ने भी पोस्ट को ‘‘नस्लवादी’’ बताया और कहा कि इसमें छात्रों की नस्ल या जातीयता के आधार पर उन्हें नीचा दिखाया गया है।
टेक्सास में अनुमानित 19 लाख एशियाई अमेरिकी रहते हैं, जिनमें 4.5 लाख से अधिक भारतीय-अमेरिकी हैं।
कई भारतीय-अमेरिकी अधिकार समूहों ने भी फ्रेंच की पोस्ट की आलोचना की।
‘हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन’ ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘भारतीयों और हिंदुओं के प्रति नफरत अपने चरम पर है। हमारे निर्वाचित नेताओं को ऐसी बयानबाजी की निंदा करनी चाहिए।’’
डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता एवं सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने फ्रेंच की पोस्ट को ‘‘प्रवासियों के प्रति घृणा से भरा’’ बताया।
‘इंडियन अमेरिकन एडवोकेसी काउंसिल’ (आईएएसी) ने ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘हम टेक्सास विश्वविद्यालय में अश्वेत छात्रों पर बो फ्रेंच के घृणित नस्लवादी हमले की स्पष्ट रूप से निंदा करते हैं।’’
आईएएसी ने कहा, ‘‘उन्होंने अपने विश्वविद्यालय की टीम का उत्साह बढ़ा रहे अश्वेतत छात्रों की तस्वीर देखी और तुरंत मान लिया कि वे ‘विदेशी’ हैं। यही नस्लवाद है।’’
हालांकि, कुछ रिपब्लिकन नेताओं ने फ्रेंच का समर्थन भी किया और उनकी निंदा करने के लिए कॉर्निन की आलोचना की।
रिपब्लिनक नेता मैट रिनाल्डी ने कॉर्निन और अन्य रिपब्लिकन नेताओं पर ‘‘सरकारी सहायता और सस्ते श्रम के लिए हमारे बच्चों के भविष्य को गिरवी रखने’’ का आरोप लगाया।
भाषा सिम्मी रंजन
रंजन