लैटिन अमेरिका में तड़के ऑपरेशन : अमेरिका पहले भी ऐसी स्थिति का सामना कर चुका है

लैटिन अमेरिका में तड़के ऑपरेशन : अमेरिका पहले भी ऐसी स्थिति का सामना कर चुका है

लैटिन अमेरिका में तड़के ऑपरेशन : अमेरिका पहले भी ऐसी स्थिति का सामना कर चुका है
Modified Date: January 4, 2026 / 04:33 pm IST
Published Date: January 4, 2026 4:33 pm IST

(एलन मैकफर्सन, टेम्पल विश्वविद्यालय)

फिलाडेल्फिया, चार जनवरी (द कन्वरसेशन) अमेरिका ने छुट्टियों के दौरान आधी रात को एक लैटिन अमेरिकी देश के भीतर अभियान शुरू किया, जिसका उद्देश्य इस बहाने से उस देश के नेता को पकड़ना था कि वह अमेरिकी अदालतों में मादक पदार्थों के आरोपों में वांछित है।

अमेरिका के इस अभियान की तारीख 20 दिसंबर 1989 थी, देश पनामा था और वांछित व्यक्ति जनरल मैनुअल नोरीगा थे।

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अमेरिका में तीन जनवरी, 2026 को जागने वाले कई लोगों को शायद ‘डेजा वू’ (पहले भी ऐसा हो चुका है) का अहसास हुआ होगा।

हालांकि, वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस की गिरफ्तारी अमेरिकी विदेश नीति के एक पुराने युग की याद दिलाती है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि एक रात्रिकालीन अभियान में अमेरिकी सैनिकों ने दंपति को वेनेजुएला की राजधानी काराकस से पकड़ लिया और उन्हें वहां से सुरक्षित बाहर निकाल लिया। यह घटना ट्रंप द्वारा ‘असाधारण सैन्य अभियान’ के रूप में वर्णित घटना के बाद हुई, जिसमें अमेरिका के वायु, थल और नौसैनिक बलों को शामिल किया गया था।

मादुरो और उनकी पत्नी को मादक पदार्थों से संबंधित आरोपों का सामना करने के लिए न्यूयॉर्क ले जाया गया। मादुरो पर 2020 में आतंकवाद-मादक पदार्थों से संबंधित अभियान का नेतृत्व करने के आरोप में अभियोग लगाया गया था, जबकि उनकी पत्नी को चार अन्य नामित वेनेजुएलावासियों के साथ एक नए अभियोग में शामिल किया गया था।

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि उन्हें वेनेजुएला में ‘आगे किसी कार्रवाई की उम्मीद नहीं है’। बाद में ट्रंप ने कहा कि उन्हें अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी से डर नहीं है।

चाहे कुछ भी हो जाए, अमेरिका-लैटिन अमेरिकी संबंधों के विशेषज्ञ के रूप में, मैं वेनेजुएला में अमेरिकी अभियान को हाल के अतीत से एक स्पष्ट बदलाव के रूप में देखता हूं।

किसी विदेशी नेता को सत्ता से बेदखल करना – भले ही वह संदिग्ध चुनावी तरीकों से सत्ता पर काबिज रहा हो – एक प्रकार का तदर्थ साम्राज्यवाद है और यह ट्रंप प्रशासन की आक्रामक नीतियों का स्पष्ट संकेत है।

यह उस राजनयिक दृष्टिकोण को त्याग देता है जो दशकों से अंतर-अमेरिकी संबंधों की पहचान रहा है। दरअसल, 1990 के दशक की शुरुआत में सोवियत संघ के पतन के बाद से ही इस क्षेत्र में संभावित प्रभाव क्षेत्रों पर वैचारिक पकड़ कमजोर हो गई।

परंपरा से हटकर : ट्रंप प्रशासन के दूसरे कार्यकाल के शुरुआती कार्यों में से एक, मैक्सिको की खाड़ी का नाम बदलकर ‘अमेरिका की खाड़ी’ करना, इस नयी नीतिगत दिशा के अनुरूप है। लेकिन कई मायनों में, ट्रंप प्रशासन द्वारा मादुरो को हटाने के लिए चलाए गए अभियान का कोई पूर्व उदाहरण नहीं है।

इससे पहले, कभी भी अमेरिकी सेना ने सत्ता परिवर्तन के लिए दक्षिण अमेरिका में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप नहीं किया था। वाशिंगटन की पिछली सभी प्रत्यक्ष कार्रवाइयां मध्य अमेरिका या कैरेबियाई क्षेत्र के छोटे, निकटवर्ती देशों में थीं।

अमेरिका ने मैक्सिको में अक्सर हस्तक्षेप किया लेकिन उसने कभी भी सीधे तौर पर उसके नेतृत्व को नहीं हटाया या पूरे देश पर कब्जा नहीं किया।

दक्षिण अमेरिका में हस्तक्षेप अप्रत्यक्ष रूप से किए जाते थे: लिंडन जॉनसन के पास ब्राजील में 1964 के तख्तापलट के असफल होने की स्थिति में एक वैक्लपिक योजना थी (हालांकि तख्तापलट सफल रहा)। रिचर्ड निक्सन ने 1970 से चिली में समाजवादी सरकार को कमजोर किया, लेकिन उन्होंने 1973 में राष्ट्रपति सल्वाडोर अलेंडे के खिलाफ तख्तापलट की साजिश नहीं रची।

मादुरो के बाद की कोई योजना? : एक समय अमेरिकी अधिकारियों का मानना ​​था कि दक्षिण अमेरिकी देश बहुत दूर, बहुत बड़े और बहुत स्वतंत्र हैं, इसलिए उन्हें प्रत्यक्ष हस्तक्षेप की आवश्यकता महसूस नहीं होती। जाहिर है, ट्रंप के अधिकारियों ने इस ऐतिहासिक अंतर को नजरअंदाज कर दिया।

मादुरो के बाद वेनेजुएला का क्या होगा? : मादुरो को अमेरिकी हिरासत में लेने से यह बात स्पष्ट हो जाती है कि मादक पदार्थों की आपूर्ति करने वाले कथित जहाजों और तेल टैंकरों पर अमेरिकी सेना द्वारा महीनों तक चले हमले के अभियान का प्राथमिक लक्ष्य हमेशा से ही सत्ता परिवर्तन था, न कि अमेरिकी तटों तक पहुंचने वाले मादक पदार्थों की मात्रा में कोई वास्तविक कमी लाना।

लैटिन अमेरिका की कई क्षेत्रीय सरकारों और वाशिंगटन के नीति विशेषज्ञों के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय यह होगा कि क्या व्हाइट हाउस ने इस नवीनतम तनाव के परिणामों पर विचार किया है।

ट्रंप निस्संदेह रूप से इराक युद्ध जैसी एक और आपदा से बचना चाहते हैं, तथा इसलिए वह अमेरिकी सेना और कानून प्रवर्तन की किसी भी निरंतर उपस्थिति को सीमित करना चाहेंगे। लेकिन आम तौर पर, लैटिन अमेरिकी शासन में बदलाव लाने वाली अमेरिकी सेना को एक मित्रवत नेता को स्थापित करने और संभवतः एक स्थिर परिवर्तन या चुनावों की देखरेख करने के लिए जमीन स्तर पर बने रहना पड़ता है।

मादुरो को काराकस से जबरदस्ती हटाने से यह संभव नहीं है। वेनेजुएला के संविधान के अनुसार, उनके उपराष्ट्रपति को पदभार संभालना चाहिए, और उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज, अपने राष्ट्रपति के जीवित होने का प्रमाण मांग रही हैं। वह मादुरो विरोधी नेता नहीं हैं।

अमेरिका ने शुक्रवार देर रात को वेनेजुएला पर ‘‘बड़े पैमाने पर हमले’’ किये और कहा कि देश के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ लिया गया है और देश से बाहर ले जाया गया है।

मादुरो और उनकी पत्नी को सैन्य अड्डे स्थित उनके घर से रात में पकड़ा गया। उन्हें एक अमेरिकी युद्धपोत पर बैठाकर न्यूयॉर्क ले जाया जा रहा है, जहां उन्हें आपराधिक आरोपों का सामना करना था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को ‘फॉक्स न्यूज’ पर कहा कि अमेरिका अब वेनेजुएला के लिए आगे के कदमों का आकलन कर रहा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अस्थायी रूप से वेनेजुएला का संचालन करेगा और अन्य देशों को बेचने के लिए इसके विशाल तेल भंडार का दोहन करेगा।

ट्रंप ने यह टिप्पणी अमेरिकी सेना द्वारा हमला कर वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को पकड़ने तथा देश से बाहर ले जाने के कुछ घंटों बाद की।

अमेरिका की यह कार्रवाई तेल समृद्ध वेनेजुएला पर महीनों से बढ़ाए जा रहे दबाव की परिणति है। यह हमला महीनों की गुप्त योजना का नतीजा है जिसे 2003 में इराक पर आक्रमण के बाद सत्ता परिवर्तन करने के लिए अमेरिका की सबसे आक्रामक कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है।

(द कन्वरसेशन) रवि कांत रवि कांत शफीक

शफीक


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