ईरान पर हमले का सुझाव सबसे पहले रक्षा मंत्री ने दिया: ट्रंप

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ईरान पर हमले का सुझाव सबसे पहले रक्षा मंत्री ने दिया: ट्रंप

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  • Publish Date - March 24, 2026 / 04:12 PM IST,
    Updated On - March 24, 2026 / 04:12 PM IST

वॉशिंगटन, 24 मार्च (भाषा) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ‘‘पश्चिम एशिया के मुद्दे’’ पर करीबी सहयोगियों के साथ चर्चा के दौरान ईरान पर हमला करने का सुझाव ‘‘सबसे पहले’’ रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने दिया था।

ट्रंप ने यह बात सोमवार को टेनेसी में आयोजित ‘मेम्फिस सेफ टास्क फोर्स’ गोलमेज बैठक में कही।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि निर्णय लेने से पहले उन्होंने हेगसेथ और ‘ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ’ के चेयरमैन, वायु सेना के जनरल डैन केन सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों को फोन कर ईरान की स्थिति पर चर्चा की।

उन्होंने कहा, “मैंने पीट को फोन किया, मैंने जनरल केन को फोन किया। मैंने अपने कई लोगों को फोन किया और कहा, ‘चलिए बात करते हैं। पश्चिम एशिया में हमारे सामने एक अहम मुद्दा है। ईरान नाम का देश 47 वर्षों से आतंकवाद का प्रसार करता रहा है और वह परमाणु हथियार के बेहद करीब है। या तो हम यूं ही आगे बढ़ते रह सकते हैं या फिर पश्चिम एशिया की ओर कदम बढ़ाकर एक बड़ी समस्या का समाधान कर सकते हैं।’’

देश में इस मुद्दे को लेकर आलोचना का सामना कर रहे ट्रंप ने हेगसेथ की त्वरित प्रतिक्रिया की सराहना करते हुए कहा, “पीट, मुझे लगता है कि आपने सबसे पहले कहा कि हमें कदम उठाना चाहिए, क्योंकि उन्हें परमाणु हथियार हासिल करने नहीं दिया जा सकता।”

इससे पहले ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा था कि उन्होंने ईरान को फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित रणनीतिक जलमार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए दी गई समयसीमा बढ़ा दी है।

उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर संभावित हमले को पांच दिन के लिए टाल दिया गया है।

बिना विवरण साझा किए अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी दावा किया कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के “पूर्ण समाधान” के लिए अमेरिका व ईरान के बीच “सार्थक बातचीत” हुई है।

हालांकि, ईरान ने ट्रंप के दावों को खारिज करते हुए इन्हें “फर्जी खबर” बताया।

ईरान की ओर से सोशल मीडिया पर कहा गया, “अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं हुई है। फर्जी खबरें फैला कर वित्तीय और तेल बाजारों को प्रभावित करने और उस दलदल से निकलने के लिए किया जा रहा है जिसमें अमेरिका और इजराइल फंसे हैं।”

भाषा खारी नरेश

नरेश