यूरोपीय संघ ने प्रवासन नीति में व्यापक बदलाव के लिए समझौता किया
यूरोपीय संघ ने प्रवासन नीति में व्यापक बदलाव के लिए समझौता किया
ब्रसेल्स, दो जून (एपी) यूरोपीय संघ (ईयू) ने अपनी प्रवासन नीति में व्यापक बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाया है। इसका उद्देश्य निर्वासन की प्रक्रिया को तेज करना और विदेश में हिरासत केंद्र बनाने के लिए विवादास्पद समझौते करने की योजना है।
दूसरी ओर अधिकार समूहों ने इसकी तुलना अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन की आक्रामक आव्रजन नीतियों से की है।
सत्ताइस देशों के समूह की अध्यक्षता कर रहे साइप्रस के उप-प्रवासन मंत्री निकोलस इओनाइड्स ने कहा, “नए विनियमन से उन व्यक्तियों को वापस भेजने की प्रक्रिया तेज होगी, जिन्हें यूरोपीय संघ में रहने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।”
यह समझौता सोमवार शाम यूरोपीय संघ की तीन प्रमुख संस्थाओं — यूरोपीय आयोग, यूरोपीय परिषद और यूरोपीय संसद के बीच तथाकथित “त्रिपक्षीय” वार्ता के दौरान बनी।
आलोचकों ने इस विनियमन की तुलना ट्रंप प्रशासन की आव्रजन रणनीति से की। ट्रंप प्रशासन ने हजारों लोगों को निर्वासित करने के लिए दुनिया भर के कई देशों के साथ गुप्त समझौते किए हैं।
ब्रिटेन ने भी प्रवासियों को रवांडा भेजने की योजना बनाई थी, लेकिन यह योजना कानूनी प्रक्रियाओं में उलझ गई और नयी सरकार बनते ही इस योजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
यह अस्थायी प्रस्ताव अब यूरोपीय संघ के सांसदों और सदस्य देशों के प्रमुखों के पास भेजा जाएगा, जहां इसके जल्द मंजूर होने की संभावना है।
यूरोपीय संघ के सदस्य देश जल्द ही संघ के बाहर के देशों के साथ द्विपक्षीय समझौते कर सकेंगे, जिनके तहत निर्वासन केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
कम से कम पांच यूरोपीय देश जर्मनी, ऑस्ट्रिया, नीदरलैंड्स, डेनमार्ग और यूनान पहले से ही तीसरी दुनिया के देशों मुख्य रूप से अफ्रीकी देशों के साथ “निर्वासन केंद्र” स्थापित करने पर बातचीत कर रहे हैं। यह मॉडल इटली और अल्बानिया के बीच हुए निरोध केंद्र समझौते पर आधारित है।
साल 2024 में कुछ देशों में दक्षिणपंथी दलों के सत्ता में आने के बाद यूरोपीय संघ लगातार अपनी प्रवासन नीतियों को सख्त बना रहा है।
एपी जोहेब पवनेश
पवनेश

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