यूरोपीय नेताओं का अमेरिका-ईरान वार्ता फिर से शुरू करने का आह्वान

यूरोपीय नेताओं का अमेरिका-ईरान वार्ता फिर से शुरू करने का आह्वान

यूरोपीय नेताओं का अमेरिका-ईरान वार्ता फिर से शुरू करने का आह्वान
Modified Date: February 28, 2026 / 08:26 pm IST
Published Date: February 28, 2026 8:26 pm IST

ब्रुसेल्स, 28 फरवरी (एपी) ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने अमेरिका-ईरान वार्ता फिर से शुरू करने का आह्वान किया और क्षेत्र के देशों पर ईरानी हमलों की निंदा की। इन देशों ने शनिवार को ईरान पर हुए अमेरिकी और इजराइली हमलों पर कोई टिप्पणी नहीं की।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री केअर स्टार्मर, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने शनिवार को एक बयान जारी करके कहा कि उनके देशों ने ईरान पर हुए हमलों में हिस्सा नहीं लिया, लेकिन वे अमेरिका, इजराइल और क्षेत्र के अन्य साझेदारों के साथ घनिष्ठ संपर्क में हैं।

इन तीनों देशों ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत के जरिए समाधान निकालने के प्रयासों का नेतृत्व किया है।

इन देशों ने कहा, “हम क्षेत्रीय देशों पर ईरान के हमलों की कड़ी निंदा करते हैं। ईरान को बिना सोचे समझे सैन्य हमलों से बचना चाहिए। हम बातचीत फिर से शुरू करने का आह्वान करते हैं और ईरानी नेतृत्व से बातचीत के जरिए समाधान खोजने का आग्रह करते हैं। अंततः ईरानी जनता को अपना भविष्य तय करने का अधिकार मिलना चाहिए।”

शनिवार को ईरान पर अमेरिका और इजराइल द्वारा किए गए हमलों के बाद, जिससे व्यापक संघर्ष में वृद्धि की वैश्विक चिंताएं पैदा हो गई हैं, यूरोपीय नेता आपात सुरक्षा बैठकें कर रहे हैं और पश्चिम एशिया में अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ईरान पर अमेरिका और इजराइल द्वारा किए गए हमलों की प्रतिक्रिया में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाने का आह्वान किया है।

ये प्रतिक्रियाएं अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान में कई ठिकानों पर बड़े हमलों के बाद आई हैं और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी लोगों से ‘अपनी सरकार पर नियंत्रण हासिल करने’ का आह्वान किया है।

अमेरिका द्वारा किए गए हमलों ने उसके लोकतांत्रिक सहयोगियों के लिए एक दुविधा खड़ी कर दी है। यूरोपीय नेता ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उसकी कट्टरपंथी धार्मिक सरकार द्वारा की जा रही कार्रवाई का कड़ा विरोध करते हैं, लेकिन वे ट्रंप द्वारा की गई एकतरफा सैन्य कार्रवाई का समर्थन करने से कतराते हैं, क्योंकि इससे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हो सकता है और एक व्यापक संघर्ष छिड़ सकता है।

पिछले साल जून में ट्रंप द्वारा ईरान पर किए गए हमले और पिछले महीने वेनेजुएला के निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी ने भी इसी तरह की दुविधा पैदा कर दी थी।

यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिकी सहयोगियों को हमलों की कोई अग्रिम सूचना दी गई थी या नहीं। जर्मन सरकार ने कहा कि उसे शनिवार सुबह ही सूचना मिली। फ्रांस के उप रक्षा मंत्री ने कहा कि फ्रांस को पता था कि कुछ होने वाला है, लेकिन यह नहीं पता था कि कब होगा।

मैक्रों ने एक बयान में कहा, “वर्तमान में जारी तनाव सभी के लिए खतरनाक है। यह रुकना चाहिए।।”

फ्रांस की संयुक्त अरब अमीरात, कतर और जॉर्डन में सैन्य उपस्थिति है। मैक्रों ने कहा कि वह पश्चिम एशिया में अपने सहयोगियों को सैन्य सहायता प्रदान करेगा।

मैक्रों ने कहा, “अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच युद्ध छिड़ने से शांति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर गंभीर परिणाम होंगे।” उन्होंने ईरान के नेतृत्व से अपने परमाणु और बैलिस्टिक कार्यक्रमों पर बातचीत के लिए प्रतिबद्ध होने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा, “ईरान की जनता को भी अपना भविष्य स्वतंत्र रूप से बनाने का अधिकार होना चाहिए। इस्लामी शासन द्वारा किए गए नरसंहार उसे अयोग्य ठहराते हैं और यह आवश्यक बनाते हैं कि जनता को अपनी आवाज उठाने का अवसर दिया जाए।”

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री केअर स्टार्मर ने शनिवार सुबह सरकार की आपातकालीन समिति की बैठक की अध्यक्षता की।

ब्रिटेन सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा, “हम इस संघर्ष को व्यापक क्षेत्रीय युद्ध में बदलते नहीं देखना चाहते,” और ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं के समाधान के लिए वार्ता-आधारित समाधान के प्रति ब्रिटेन के समर्थन को दोहराया। ब्रिटेन इन हमलों में शामिल नहीं था।

जर्मनी की सरकार की संकट प्रबंधन टीम की भी बैठक प्रस्तावित है।

हमले पर प्रतिक्रिया देते हुए, यूरोपीय संघ की शीर्ष राजनयिक ने पश्चिम एशिया के संघर्ष को “खतरनाक” बताया और कहा कि वह इजराइल एवं अरब देशों के अधिकारियों के साथ मिलकर वार्ता के जरिए शांति की दिशा में काम कर रही हैं।

सत्ताईस देशों के समूह की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास ने सोशल मीडिया पर लिखा, “ईरान के शासन ने हजारों लोगों की हत्या की है। उसका बैलिस्टिक मिसाइल और परमाणु कार्यक्रम, साथ ही आतंकवादी समूहों को समर्थन, वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है।”

नॉर्वे के विदेश मंत्री इस्पेन बार्थ इदे ने नॉर्वे प्रसारक एनआरके से कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता विफल होने से उन्हें आशंका है कि पश्चिम एशिया में “नया, व्यापक युद्ध” छिड़ सकता है।

स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने कहा कि मैड्रिड अमेरिका और इजराइल की “एकतरफा सैन्य कार्रवाई” को खारिज करता है, जो तनाव को बढ़ाती है और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को अधिक अनिश्चित और शत्रुतापूर्ण बनाती है। उन्होंने यह भी कहा कि स्पेन ईरानी शासन की कार्रवाइयों को भी समान रूप से खारिज करता है।

यूरोपीय संघ के नेताओं ने शनिवार को एक संयुक्त बयान जारी करके संयम बरतने और क्षेत्रीय कूटनीति को आगे बढ़ाने का आह्वान किया, ताकि “परमाणु सुरक्षा सुनिश्चित” की जा सके।

यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद अध्यक्ष एंतोनियो कोस्टा ने कहा, “हम सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने, नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और अंतरराष्ट्रीय कानून का पूर्ण सम्मान करने का आह्वान करते हैं।”

नोबेल शांति पुरस्कार विजेता संगठन इंटरनेशनल कैंपेन टू एबॉलिश न्यूक्लियर वेपंस ने अमेरिका और इजराइल के हमलों की कड़ी निंदा की। इसकी कार्यकारी निदेशक मेलिसा पार्के ने कहा, “ये हमले पूरी तरह गैर-जिम्मेदार हैं और इससे तनाव बढ़ने के साथ-साथ परमाणु प्रसार और परमाणु हथियारों के उपयोग का खतरा भी बढ़ सकता है।”

मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहीम ने इजराइल के हमलों और अमेरिका की सैन्य कार्रवाई की निंदा करते हुए चेतावनी दी कि बढ़ता संघर्ष पश्चिम एशिया को “विनाश के कगार” पर ले आया है।

पाकिस्तान के विदेश मंत्री इश्हाक डार ने शनिवार को अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची से फोन पर बात करते हुए ईरान पर “अनुचित हमलों” की निंदा की।

रूस के विदेश मंत्रालय ने इन हमलों को “एक संप्रभु और स्वतंत्र संयुक्त राष्ट्र सदस्य देश के खिलाफ पूर्व नियोजित और उकसावे के बिना किया गया सशस्त्र आक्रमण” बताया और सैन्य अभियान को तुरंत रोककर कूटनीति की ओर लौटने की मांग की।

टेलीग्राम पर जारी बयान में मंत्रालय ने वॉशिंगटन और तेल अवीव पर आरोप लगाया कि वे ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंता का “बहाना” बना रहे हैं, जबकि उनका वास्तविक उद्देश्य शासन परिवर्तन है।

एपी अमित माधव

माधव


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