पीओके में प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक बल प्रयोग, चुनाव विश्वसनीय नहीं: पाकिस्तानी मानवाधिकार संस्था

पीओके में प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक बल प्रयोग, चुनाव विश्वसनीय नहीं: पाकिस्तानी मानवाधिकार संस्था

पीओके में प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक बल प्रयोग, चुनाव विश्वसनीय नहीं: पाकिस्तानी मानवाधिकार संस्था
Modified Date: August 31, 2026 / 11:26 am IST
Published Date: August 31, 2026 11:26 am IST

लाहौर, 30 अगस्त (भाषा) पाकिस्तान के मानवाधिकार संगठन ने कहा है कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सरकार ने ‘‘जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग’’ किया।

संगठन ने हिंसा और बड़े पैमाने पर धांधली के आरोपों से प्रभावित चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं।

पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग (एचआरसीपी) के तथ्यान्वेषी मिशन की शनिवार को जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में जारी अशांति की वजह लंबे समय से बरकरार राजनीतिक और सामाजिक-आर्थिक शिकायतें, संस्थाओं के प्रति अविश्वास और शासन व्यवस्था की कमियां हैं।

एचआरसीपी ने कहा, ‘‘सरकार की ओर से लगातार बढ़ती टकरावपूर्ण प्रतिक्रिया, जिसमें जरूरत से अधिक बल प्रयोग भी शामिल है, ने ध्रुवीकरण को और गहरा किया है और जनता के भरोसे को कमजोर किया है।’’

आयोग ने यह भी कहा कि उसके मिशन को हिंसा के स्तर और सुरक्षा बलों के आचरण को लेकर अलग-अलग और परस्पर विरोधी दावे सुनने को मिले।

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की तथाकथित विधानसभा की 45 सीट के लिए 27 जुलाई से 10 अगस्त के बीच तीन चरण में चुनाव कराए गए।

प्रतिबंधित ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) जून से पीओके में विवादित 12 शरणार्थी सीट के मुद्दे पर लगातार प्रदर्शन कर रही थी। उसका आरोप है कि सत्ता प्रतिष्ठान इन सीटों का इस्तेमाल अपनी पसंद के व्यक्ति को पीओके की तथाकथित सरकार का प्रधानमंत्री बनाने के लिए करता है।

सरकार और जेएएसी के बीच 30 मई को बातचीत विफल होने के बाद पीओके सरकार ने पांच जून को आतंकवाद रोधी कानून के तहत इस संगठन पर प्रतिबंध लगा दिया।

जेएएसी के अनुसार, 27 जुलाई को हुए चुनाव के पहले चरण के दौरान 40 से अधिक लोग मारे गए। संगठन का यह भी दावा है कि जून के पहले सप्ताह से अब तक करीब 400 प्रदर्शनकारी मारे जा चुके हैं। हालांकि, संघीय सरकार ने इस दावे को खारिज किया है।

एचआरसीपी ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ ‘‘घातक और अत्यधिक’’ बल प्रयोग के आरोपों पर विशेष चिंता जताई। आयोग ने कहा कि उसे कई परिवारों से ऐसी जानकारी मिली, जिसमें आरोप लगाया गया कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई में कई प्रदर्शनकारी मारे गए या गंभीर रूप से घायल हुए। रिपोर्ट में कहा गया कि पी के पुलिस प्रमुख ने जून से अब तक करीब 38 सुरक्षाकर्मियों के मारे जाने की जानकारी दी है।

आयोग ने कहा, ‘‘हम नागरिकों के हताहत होने की पूरी संख्या या परिस्थितियों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सके, खासकर इसलिए क्योंकि हमारी टीम हिंसा के प्रमुख केंद्रों में से एक रावलाकोट तक नहीं पहुंच सकी।’’

आयोग ने जून से अब तक हुई सभी मौतों और गंभीर चोटों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की। इसमें यह भी जांच करने को कहा गया कि बल प्रयोग कानूनी, जरूरी और परिस्थितियों के अनुरूप था या नहीं।

रिपोर्ट में राजनीतिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ आतंकवाद रोधी कानून और एहतियाती हिरासत के प्रावधानों के इस्तेमाल पर भी चिंता जताई गई।

पीओके में हुए चुनावों को लेकर एचआरसीपी ने कहा, ‘‘बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती, लंबे समय तक संचार सेवाओं पर प्रतिबंध, प्रमुख राजनीतिक दलों का बहिष्कार, चरणबद्ध मतदान और सात निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव स्थगित किए जाने से चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर व्यापक सवाल खड़े होते हैं।’’

भारत का कहना है कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं। नयी दिल्ली यह भी कहती है कि इन केंद्र शासित प्रदेशों के कुछ हिस्सों पर पाकिस्तान ने ‘‘अवैध और जबरन कब्जा’’ कर रखा है।

भारत ने चार अगस्त को पीओके में हुए तथाकथित स्थानीय निकाय चुनावों को ‘‘पूरी तरह दिखावा’’ बताया था और कहा था कि इस तरह की ‘‘खोखली कवायद’’ क्षेत्र की वास्तविक स्थिति को छिपा नहीं सकती।

विदेश मंत्रालय ने पीओके में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पाकिस्तान की कार्रवाई की कड़ी आलोचना की और कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को मानवाधिकारों पर इस्लामाबाद की ‘‘पाखंडी नसीहतों की कमजोर परत’’ के पीछे की वास्तविकता को समझना चाहिए।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नियमित प्रेस वार्ता में कहा, ‘‘पीओके में हुआ यह तथाकथित स्थानीय चुनाव पूरी तरह दिखावा है। असल में वहां जनता का विरोध प्रदर्शन और पाकिस्तानी बलों द्वारा अंधाधुंध हत्याएं हो रही हैं। ऐसी खोखली कवायद वास्तविकता को नहीं छिपा सकती।’’

भाषा गोला सिम्मी

सिम्मी


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