अफ्रीकी महाद्वीप में पहले गांधी-किंग-मंडेला सम्मेलन का आयोजन

अफ्रीकी महाद्वीप में पहले गांधी-किंग-मंडेला सम्मेलन का आयोजन

अफ्रीकी महाद्वीप में पहले गांधी-किंग-मंडेला सम्मेलन का आयोजन
Modified Date: June 10, 2023 / 10:23 pm IST
Published Date: June 10, 2023 10:23 pm IST

(फाकिर हसन)

जोहानिसबर्ग, 10 जून (भाषा) दक्षिण अफ्रीका में एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में उन मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया, जिनका समाधान महात्मा गांधी, नेल्सन मंडेला और मार्टिन किंग लूथर द्वारा सुझाये गये अहिंसा के सिद्धांतों के माध्यम से किया जा सकता है।

पीटरमारित्जबर्ग गांधी फाउंडेशन के अध्यक्ष डेविड जेनगेन ने कहा कि अफ्रीकी महाद्वीप में शुक्रवार को संपन्न हुए तीन दिवसीय गांधी-किंग -मंडेला अंतररराष्ट्रीय सम्मेलन में इस बात की सहमति बनी कि मानवाधिकारों के सदंर्भ में अपने प्रयासों को तेज करने के लिए संयुक्त राष्ट्र एवं अफ्रीकी संघ जैसी संस्थाओं पर दबाव डालकर अहिंसा का संदेश आगे बढ़ाया जाए और उसके लिए नेटवर्किंग जारी रखा जाए।

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पीटरमारित्जबर्ग गांधी फाउंडेशन ने क्वाजुलु -नटाल विश्वविद्यालय के साथ मिलकर इस सम्मेलन का आयोजन किया।

जेनगेन ने कहा, ‘‘ 2023 का यह साल पीटरमारित्जबर्ग स्टेशन पर ट्रेन से युवा मोहनदास करमचंद गांधी को उतारे जाने ( जिसने अफ्रीका और भारत में उत्पीड़न एवं भेदभाव के विरूद्ध संघर्ष स्वरूप सत्याग्रह का मार्ग प्रशस्त किया) का 130 वां साल है। यह ‘इंडियन ओपिनियन’ की 120 वीं वर्षगांठ भी है। सन् 1903 में गांधी द्वारा शुरू किया यह पहला अखबार था।’’

विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव पुनीत कुंडल ने कहा कि यह साल भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच राजनयिक संबंध की बहाली की 30 वीं वर्षगांठ है, उससे पहले करीब चार दशक तक रंगभेद के कारण दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध टूटा रहा था।

कुंडल ने भारत में ब्रिटिश शासन के खात्मे में गांधी की भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, ‘‘ भारत को एक प्रकार के प्रकाशपुंज , एक प्रकार की आशा की जरूरत थी, जो उसे एकजुट कर सके और औपनिवेशक स्वामियों से लड़ने की ताकत दे सके। जिस व्यक्ति में उस साम्राज्य को अपने घुटने पर लाने का साहस एवं संकल्प था, वह वही व्यक्ति था जिसपर हमें आज गर्व है। ’’

भाषा राजकुमार दिलीप

दिलीप


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